किस तरह डूब जाऊं मैं अब भी ख्यालों में कि जोखिम भी न हो और गीत भी गाता रहूं...बिछड़ जाऊं दूर भी रहूं लेकिन पास आता रहूं...है क्या कोई जिंदगी जिसमें हमसफर भी न हो और तुम्हारे साथ चलता रहूं...(किंकर्तव्यविमूढ़। ऐसी पंक्तियां हैं, मैं नहीं)----------किस चीज का गुमान है...