ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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Hemant Kumar Jha26-12-2018 नरेंद्र मोदी देश में उतने कमजोर नहीं हुए हैं जितने भाजपा में होते जा रहे हैं...और... यह अप्रत्याशित भी नहीं है। अमित शाह को आगे बढ़ा कर उन्होंने जिस तरह सत्ता के साथ ही संगठन पर अपना एकछत्र नियंत्रण स्थापित कर लिया था यह भाजपा के लिय...
मुकेश कुमार
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अनंत तक पसरा ये अन्तरिक्षउनमें तैरते न जाने कितने सारे सौरमंडलसबका अलग अलग सूरजन जाने कितनी आकाशगंगाएंसबका अलग अलग वजूद और फिरअपनी अपनी तय कक्षा मेंपरिक्रमा करते ग्रह, उपग्रहतारे, धूमकेतु सब-सबलेकिन फिक्स रहता हैउन सब खगोलीय पिंडों के बीच का स्पेसविस्तार की हक़...
ANITA LAGURI (ANU)
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भारतीय भीड़ तंत्र ...       आए दिन आजकल हम सुनते हैं कि भीड़ ने फलाना  व्यक्ति को मार डाला। भीड़ ने छोटी- सी बात पर मासूम की पिटाई कर दी...... या फिर भीड़ ने धर्म के नाम पर झूठ-मूठ का अच्छे खासे माहौल को अव्यवस्थित कर दिया। अक्सर आप भी सुनत...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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मन के जालेजाले मकड़ी ही नहींमनुष्य भी बनाते हैंमकड़ी के जालों मेंकीड़े उलझ करमकड़ी का भोजनबन जाते हैंमनुष्य के मन में बनेसोच के जालेनिरंतर मनुष्य को हीभोजन बनाते हैंमनुष्यबाहर निकलने काजितना प्रयास करताउतना हीउलझता जाता हैजीवन पर्यन्तछटपटाता रहता है© डा.राजेंद्र तेला,न...
 पोस्ट लेवल : सोच जीवन कुंठा book
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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कभी कभी मन को खुश कर लेता हूँसमय के कागज़ पर भावनाओं की कलम चला देता हूँकभी आड़ा तिरछा कभी सीधा सच्चा लिख देता हूँशब्दों से चित्र बनाता हूँकिसी को खुश किसी को नाराज़ कर देता हूँ कुंठाओं की अभिव्यक्ति कोतनाव मुक्त रहने का साधन  समझता हूँ© डा.राजेंद्र तेला,निर...
 पोस्ट लेवल : जीवन कुंठा तनाव कलम selected
अनंत विजय
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लोकसभा चुनाव का कोलाहल, किस पार्टी में कौन शामिल हो रहा है , किस पार्टी ने किसको टिकट दिया, कौन सा नेता अवसरवादी और कौन सा नेता मौकापरस्त है, किसने तीन दशक तक एक पार्टी में रहने के बाद महज लोकसभा टिकट नहीं मिलने पर पार्टी छोड़ दी या बदल ली, किस पार्टी का कौन नेता त...
 पोस्ट लेवल : कुंठा रोड रेज
Kailash Sharma
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जीवन का उद्देश्य प्राप्ति असीम सुख की,दौड़ते रहते उसके पीछे।बदल जाती परिभाषा सुख की व्यक्ति व परिस्थिति अनुसारलेकिन बदलता नहीं लक्ष्य।होता है मष्तिष्क बचपन में पवित्र एवं इक्षुक सीखने का,शीशे का एक रंगीन टुकड़ा और एक बहुमूल्य हीरा देता है समान ख...
हंसराज सुज्ञ
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1- जब भी ऐसी कोई घटना प्रकाश में आती है, संस्कार व संस्कृति को सप्रयोजन भांडना शुरू हो जाता है. लेकिन संस्कार व संस्कृति को बार बार दुत्कारने के फलस्वरूप, लोगों में दुनिया व समाज की परवाह न करने का भाव जड जमाता है. अनुशासन विहिन भाव को स्वछंदता का खुला मैदान मिल जा...
अविनाश वाचस्पति
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आओ इस नियोजित करेंकुंठा को रोकेंस्वकेंद्रित भाव कोभाड़ में झोंखें !एक कुंठा ही है जोकई हादसे प्रसूतती है /विचारों की सरिता बहती बहतीदूर तक निकलेरात भर चलें सुबह पहुंचेंवहां जहाँ से सुनहरी सूर्य किरणें उगतीं हैंवही होती हैं आस किरणेंजो उगतीं हैं धनात्मक सोच के पूरब...
 पोस्ट लेवल : कुंठा
girish billore
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 पोस्ट लेवल : कुंठा दीपावली