ब्लॉगसेतु

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 सुख दुख सुख-दुख जीवन में सदा, आते एक समान |सुख जल्दी से बीतता, दुख लाता व्यवधान |दुख लाता व्यवधान, झलकती पीड़ा भारी |ईश्वर करता दूर, सखे पनपती पीर तुम्हारी |कह राधे गोपाल, तसल्ली रक्खो मन में |आते रहते पास, अरे सुख-दुख जीवन में ||
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   फूलों का उपहारचंपा की कलियां खिली, झूम रहा कचनार। बगिया सबको दे रही, फूलों का उपहार।।फूलों का उपहार , प्रकृति हम सबको बांटेफूलों के तो साथ, रहे हैं हरदम कांटे। कह राधे गोपाल,चलो मिलकर सब सखियां।खिली हुईं है आज, सखी चंपा की कलियां।।
अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : कुंडलियां
अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : कुंडलियां
अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : कुंडलियां
Basudeo Agarwal
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धोती कुर्ता पागड़ी, धवल धवल सब धार।सुड़क रहे हैं चाय को, करते गहन विचार।।करते गहन विचार, किसी की शामत आई।बैठे सारे साथ, गाँव के बूढ़े भाई।।झगड़े सब निपटाय, समस्या सब हल होती।अद्भुत यह चौपाल, भेद जो सब ही धोती।।बासुदेव अग्रवाल नमनतिनसुकिया29-06-18
Basudeo Agarwal
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गीता अद्भुत ग्रन्थ है, काटे भव की दाह।ज्ञान अकूत भरा यहाँ, जिसकी कोइ न थाह।जिसकी कोइ न थाह, लगाओ जितना गोता।कटे पाप की पाश, गात मन निर्मल होता।कहे 'बासु' समझाय, ग्रन्थ यह परम पुनीता।सब ग्रन्थों का सार, पढें सारे नित गीता।।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया17-12-18
Basudeo Agarwal
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महिमा कुर्सी की बड़ी, इससे बचा न कोय।राजा चाहे रंक हो, कोउ न चाहे खोय।कोउ न चाहे खोय, वृद्ध या फिर हो बालक।समझे इस पर बैठ, सभी का खुद को पालक।कहे 'बासु' कविराय, बड़ी इसकी है गरिमा।उन्नति की सौपान, करे मण्डित ये महिमा।।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया22-12-2018
sanjiv verma salil
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इस सादगी पे कौन न मर जाए ऐ खुदा! कौन-कौन इस चित्र पर अपनी कलम चलाएगा? गद्य या पद्य की किसिस भी विधा में लिखें-*चित्र पर रचना:छंद:  कुंडलिया*विधान: एक दोहा + एक रोलाअ. २ x १३-११, ४ x ११-१३ = ६ पंक्तियाँआ. दोहा का आरंभिक शब्द या शब्द समूह रोला का अंतिम शब्द...
 पोस्ट लेवल : कुंडलिया kundaliya
Basudeo Agarwal
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सारी पहने लहरिया, घर से निकली नार।रीत रिवाजों में फँसी, लम्बा घूँघट डार।लम्बा घूँघट डार, फोन यह कर में धारे।शामत उसकी आय, हाथ इज्जत पर डारे।अबला इसे न जान, लाज की खुद रखवारी।कर देती झट दूर, अकड़ चप्पल से सारी।।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया19-5-17