ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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प्लास्टिक के पेड़नाइलॉन के फूलरबर की चिड़ियाँटेप पर भूले बिसरेलोकगीतों कीउदास लड़ियाँ.....एक पेड़ जब सूखतासब से पहले सूखतेउसके सब से कोमल हिस्से-उसके फूलउसकी पत्तियाँ ।एक भाषा जब सूखतीशब्द खोने लगते अपना कवित्वभावों की ताज़गीविचारों की सत्यता –बढ़ने लगते लोगों के ब...
Yashoda Agrawal
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हम सब एक सीधी ट्रेन पकड़ कर अपने अपने घर पहुँचना चाहते हम सब ट्रेनें बदलने की झंझटों से बचना चाहते हम सब चाहते एक चरम यात्रा और एक परम धाम हम सोच लेते कि यात्राएँ दुखद हैं और घर उनसे मुक्ति सचाई यूँ भी हो सकती है कि यात्...
Yashoda Agrawal
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1927-2017अबकी बार लौटा तो बृहत्तर लौटूंगा चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं कमर में बांधें लोहे की पूँछे नहीं जगह दूंगा साथ चल रहे लोगों को तरेर कर न देखूंगा उन्हें भूखी शेर-आँखों से अबकी बार लौटा तो मनुष्यतर लौटूंगा घर स...