काव्यांजलि:अमर शहीद कुंवर सिंहसंजीव*भारत माता पराधीन लख,दुःख था जिनको भारीवीर कुंवर सिंह नृपति कर रहे थे गुप-चुप तैयारीअंग्रेजों को धूल चटायी जब-जब वे टकराये जगदीशपुर की प्रजा धन्य थी परमवीर नृप पायेसमय न रहता कभी एक सा काले बादल छायेअंग्रेजी सैनिक की गोली लगी घाव...