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sanjiv verma salil
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 ककुभ / कुकुभसंजीव*(छंद विधान: १६ - १४, पदांत में २ गुरु)*यति रख सोलह-चौदह पर कवि, दो गुरु आखिर में भायाककुभ छंद मात्रात्मक द्विपदिक, नाम छंद ने शुभ पाया*देश-भक्ति की दिव्य विरासत, भूले मौज करें नेताबीच धार मल्लाह छेदकर, नौका खुदी डुबा देता*आशिको-माशूक के किस्...
 पोस्ट लेवल : कुकुभ छंद ककुभ ककुभ
अरुण कुमार निगम
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  (चित्र ओबीओ से साभार)  कुकुभ छन्द – पहला दृश्य एक सरीखी प्रात: संध्या,जीवन की सच्चाई रे एक सूर्य को आमंत्रण दे , दूजी करे विदाई रे कालचक्र की आवा-जाही, देती किसे दिखाई रेतालमेल का ताना-बाना, सुन्दर बुनना भाई रे  कुकुभ छन्द – दूसरा द...
 पोस्ट लेवल : कुकुभ छन्द