ब्लॉगसेतु

अरुण कुमार निगम
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परिहास – रविकर..........**************************जली कटी देती सुना, महीने में दो चार ।तुम तो भूखी एक दिन, सैंयाँ बारम्बार ।सैंयाँ बारम्बार ,  तुम्हारे  व्रत की माया । सौ प्रतिशत अति शुद्ध, प्रेम-विश्वास समाया ।रविकर फांके खीज, गालियाँ भूख-लटी दे ।कैसे म...
अरुण कुमार निगम
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कुण्डलिया  1. – “ अम्बर ”आगे  तीनों लोक  के , अम्बर का  विस्तारमंदाकिनियाँ  हैं   कई , धारे  अरुण हजारधारे अरुण हजार , ऋषि गुनी  कहे अनंताअम्बर का  विस्तार  , जान पाये  नहि संताकितने  ही  ब्रम्ह...
shashi purwar
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1  चक्षु ज्ञान के खोलिए,जीवन है अनमोल.  शब्द बहुत ही कीमती,सोच-समझ कर बोल.  सोच-समझ कर बोल,बिगड़ जाते हैं नाते.  रहे सफलता दूर, मित्र भी पास न आते.   मिटे सकल अज्ञान, ग्रन्थ की बात मान के.  फैलेगा आलोक,खोल मन चक्षु ज्ञान के.&nbsp...
 पोस्ट लेवल : कुण्डलियाँ
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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  आज स्वतन्त्रता दिवस है, और आज मेरी पुस्तक प्रेस से छूटकर मेरे घर आ गयी है। हिन्दुस्तानी एकेडेमी ने इसे छापकर निश्चित रूप से एक नयी शुरुआत की है। कहना न होगा कि आज मैं बहुत प्रसन्न हूँ। ब्लॉग की किताब छापना व्यावसायिक रूप से कितना उपयोगी है इसका पता शायद इ...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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  आजकल चुनावी सरगर्मी में कोई दूसरा विषय अपनी ओर ध्यान नहीं खींच पा रहा है। दिनभर दफ़्तर से लेकर घर तक और अखबार-टीवी से लेकर इण्टरनेट तक बस चुनावी तमाशे की ही चर्चा है। सरकारी महकमें तो बुरी तरह चुनावगामी हो गये हैं। ऐसे में मेरा मन भी चुनावी कविता में हाथ...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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(१)देखो भाई आ गया, फिर पन्दरह अगस्त।आग लगी है देश में, नेता फिर भी मस्त।नेता फिर भी मस्त, खूब झण्डा फहराया।जम्मू कर्फ्यूग्रस्त, बड़ा संकट गहराया॥सुन सत्यार्थमित्र बैरी को बाहर फेंको।सर्प चढ़ा जो मुकुट, दंश देता है देखो॥ (२) आज़ादी की बात पर...