ब्लॉगसेतु

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बिंदीबिंदी से शोभा बढे, नारी की भरपूर। नथनी कहती झूम के, मत जाओ तुम दूर।। मत जाओ तुम दूर, सजन से कहती सजनी। रहना हरदम पास ,दिवस हो चाहे रजनी। कह राधे गोपाल, पहाड़ी हो या सिंधी। चमक रही है भाल,सभी नारी के बिंदी।
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विधा-मुक्त छंद माँ -बेटी के साथ में,करती हँस के बात।बेटी को वो दे रही,जीवन की सौगात।।जीवन की सौगात, ज़िन्दगी होती भारी।पर बिटिया  तो लगती हर माता को प्यारी।कह राधे गोपाल,गोद में माँ के लेटीहँस कर करती बात , सदा ही माँ अरू बेटी : माँ -बेटी के साथ...
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 कुमकुम कुमकुम भर के माँग में, नार करे श्रृंगार ।फेरे लेकर सात वो, आती पिय के द्वार। आती पिय के द्वार, विदाई करती माता। वर जी आए द्वार, बदलता भाई छाता।। कह राधे गोपाल, पिता जी क्यों है गुमसुम। नारी का श्रृंगार, सदा से ही है कुमकुम।
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काजल (3)काजल आँखों पर लगा, नैन रही मटकाय।देख सजन को सामने, गोरी भी इठलाय।। गोरी भी इठलाय, झुका वो नैना बोले।  मुस्काती वो आय, सजन सम्मुख वो डोले। कह राधे गोपाल, सजन को देखे हरपल। नैन रही मटकाय, लगाकर वो तो काजल।।
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गजरा लेके गजरा हाथ में, साजन जी मुस्काय। सजनी जी के बाल पे, पिन से वो अटकाय।।पिन से वो अटकाय, करे वो बातें मन की। सोनी सी हो नार,अरे मेरे जीवन की। कह राधे गोपाल, लुभाओ कजरा देके। जाओ साजन धाम, सदा तुम गजरा लेके।।
sanjiv verma salil
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कुण्डलियासंजीव 'सलिल'हिंदी की जय बोलिए, हो हिंदीमय आप.हिंदी में नित कार्य कर, सकें विश्व में व्याप..सकें विश्व में व्याप, नाप लें सकल ज्ञान का.नहीं व्यक्ति का, बिंदु 'सलिल' राष्ट्रीय आन का..नेह-नरमदा नहा बोलिए होकर निर्भय.दिग्दिगंत में गूज उठे, फिर हिंदी की जय..१२....
 पोस्ट लेवल : कुण्डलिया
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सड़कों का हाल बदतर अब होने लगा, है सड़कों का हाल। पैदल जो भी चल रहे, वो होते बेहाल।। वो होते बेहाल, सड़क ढूँढे फिरते हैं। गड्ढों में है पैर, तभी तो वह गिरते हैं। कह राधे गोपाल, रहोगे कब तक घर पर। सड़कों का अब हाल, हुआ है बद से बदतर।&nb...
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  कंगन कंगन सोने के बने, चाँदी की पाजेब। पहनो गोरी ये सभी, जाओ पिय के देश।। जाओ पिय के देश, बसाओ अपने घर को।जा बेटी ससुराल, वरण करलो तुम वरको।कह राधे गोपाल, बिखेरे खुशबू चंदन। लाओ तुम गलहार, सजन हाथों के कंगन।।
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वेणीवेणी प्यारी सी बने, यदि हो लंबे बाल। नागिन जैसी लग रही, गोरी की तो चाल।। गोरी की तो चाल, लगे हैं सबको प्यारी। रानी बनकर राज, करे हर घर में नारी ।कह राधे गोपाल, प्रथम नारी की श्रेणी। नारी की है शान, बनी बालों की वेणी।
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फूलफूल खिले हैं डाल पे, महक उठा है बाग। बैठ डाल पर आम की, कोयल गाती राग। कोयल गाती राग, भ्रमर तितली भी डोले। आओ रस लो बाँट, मधुमक्खी भी बोले।कह राधेगोपाल, पथिक को शूल मिले हैं। आओ देखो बाग, डाल में फूल खिले हैं।