ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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तिमिर भय नेबढ़ाया हैउजास से लगाव,ज्ञानज्योति नेचेतना से जोड़ातमस कास्वरूपबोध और चाव।घुप्प अँधकार मेंअमुक-अमुक वस्तुएँपहचानने का हुनर,पहाड़-पर्वतकुआँ-खाईनदी-नालेअँधेरे में होते किधर?कैसी साध्य-असाध्यधारणा है अँधेरा,अहम अनिवार्यता भी हैसृष्टि में अँधेरा।कृष्णपक्ष कीविकट...
ऋता शेखर 'मधु'
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'भगिनी का सुत काल है’, सुनकर सिहरा कंस।शिशु वध करने के लिए, भाई बना नृशंस।।गर्भवती जकड़ी गई, हा! कैसा था पाप।वसुदेव संग देवकी, झेल रही संताप।।चमक रही थी दामिनी, गरजा था घन घोर।रखवाले बेसुध हुए, नींद पड़ी अति जोर।।कारा में गूँजा रुदन, खुली लौह जंजीर।पुत्र आठवाँ देखक...