ब्लॉगसेतु

Kailash Sharma
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कितनी दूर चला आया हूँ,कितनी दूर अभी है जाना।राह है लंबी या ये जीवन,नहीं अभी तक मैंने जाना।नहीं किसी ने राह सुझाई,भ्रमित किया अपने लोगों ने।अपनी राह न मैं चुन पाया,बहुत दूर जाने पर जाना।बढ़े हाथ उनको ठुकराया,अपनों की खुशियों की खातिर।लेकिन आज सोचता हूँ मैं,अपने दिल क...
Kailash Sharma
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चारों ओर पसरा है सन्नाटामौन है श्वासों का शोर भी,उघाड़ कर चाहता फेंक देनाचीख कर चादर मौन की,लेकिन अंतस का सूनापनखींच कर फिर से ओढ़ लेता चादर सन्नाटे की।पास आने से झिझकतासागर की लहरों का शोर,मौन होकर गुज़र जाता दरवाज़े से दबे क़दमों से भीड़ का कोलाहल, अनकहे...
Kailash Sharma
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बन न पाया पुल शब्दों का,भ्रमित नौका अहसासों कीमौन के समंदर में,खड़े है आज भी अज़नबी से अपने अपने किनारे पर।****अनछुआ स्पर्शअनुत्तरित प्रश्नअनकहे शब्दअनसुना मौन क्यों घेरे रहतेअहसासों को और माँगते एक जवाब हर पल तन्हाई में।****रात भर सिलते रहे दर्द की चादर,उधेड़ गया फिर...
Kailash Sharma
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तुम संबल हो, तुम आशा हो,तुम जीवन की परिभाषा हो।शब्दों का कुछ अर्थ न होता,उन से जुड़ के तुम भाषा हो।जब भी गहन अँधेरा छाता,जुगनू बन देती आशा हो।जीवन मंजूषा की कुंजी,करती तुम दूर निराशा हो।नाम न हो चाहे रिश्ते का,मेरी जीवन अभिलाषा हो।...©कैलाश शर्मा
Kailash Sharma
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                                     बीसवाँ अध्याय (२०.११-२०.१४)                      &nbs...
Kailash Sharma
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                                     बीसवाँ अध्याय (२०.६-२०.१०)                      &nbsp...
Kailash Sharma
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कुछ घटता है, कुछ बढ़ता है,जीवन ऐसे ही चलता है।इक जैसा ज़ब रहता हर दिन,नीरस कितना सब रहता है।मन के अंदर है जब झांका,तेरा ही चहरा दिखता है।चलते चलते बहुत थका हूँ,कांटों का ज़ंगल दिखता है।आंसू से न प्यास बुझे है,आगे भी मरुधर दिखता है।...©कैलाश शर्मा
Kailash Sharma
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                                     बीसवाँ अध्याय (२०.१-२०.०५)                      &nbsp...
Kailash Sharma
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गीला कर गयाआँगन फिर से,सह न पायाबोझ अश्क़ों का,बरस गया।****बहुत भारी हैबोझ अनकहे शब्दों का,ख्वाहिशों की लाश की तरह।****एक लफ्ज़जो खो गया था,मिला आजतेरे जाने के बाद।****रोज जाता हूँ उस मोड़ पर जहां हम बिछुड़े थे कभी अपने अपने मौन के साथ,लेकिन रोज टूट जाता स्वप्नथामने से...
Kailash Sharma
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                                     उन्नीसवां अध्याय (१९.०५-१९.०८)                       ...