एक रचना*रक्तबीज था हुआ कभी जोलौट आया है।राक्षस ने कोरोना कानाम पाया है।गिरेगी विष बूँदजिस भी सतह परउसे छूकर मनुज जोआगे बढ़ेगाउसीको माध्यम बनाकरयह चढ़ेगाबढ़ा तन का तापदेगा पीर थोड़ीकिन्तु लेगा रोक श्वासाआस छोड़ीअंतत: स्वर्गीय होचाहे न भाया है।सीख दुर्गा माई सेहम भी...
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