ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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लखनऊ,  06-05-2018 :कल दिनांक 05 मई 2018 को यू पी प्रेस क्लब, हजरतगंज, लखनऊ में कवि और लेखक कौशल किशोर की दो पुस्तकों  ' वह औरत नहीं महानद थी ' ( कविता संग्रह ) एवं ' प्रतिरोध की संस्कृति ' ( लेखों का संग्रह ) का विमोचन - लोकार्पण तथा समीक्षा कार्यक्रम वरि...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) Kaushal Kishor13-02-2018 आज भारतीय उप - महाद्वीप के इंकलाबी शायर फैज़ अहमद फैज़ का जन्मदिन है। उन्हें याद करते हुए आज से करीब 33 साल पहले लिखा आले...
Yashoda Agrawal
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बड़े बाबू को घर में भी सभी बड़े बाबू कहते हैं। उन्होंने चपरासी से लेकर बड़े बाबू बनने का सफर चालीस साल में तय किया। जब वह रिटायर हुए तो घर वाले मायूस हो गये। उनकी मायूसी का कारण कम पेंशन नहीं पर टेबिल के नीचे की वह कमाई थी। जिसे ऊपरी कमाई कहते है। वह किताब बंद हाे...
Yashoda Agrawal
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कुछ दिन पहले इस किताब में -महक रहे थे बरक नये।जिल्दसाज तुम बतलाओ।वे सफे सुनहरे किधर गये।जहाँ इत्र की महक रवां थी।जलने की बू आती है।दहशत वाले बादल कैसे।आसमान में पसर गये।बूढ़ा होकर इंकलाब क्यों -लगा चापलूसी करने।कलमों को चाकू होना था।क्यों चमच्च में बदल गये।बंधे रहें...
विजय राजबली माथुर
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******https://www.facebook.com/photo.php?fbid=1330825176982767&set=a.135683056496991.27535.100001658931800&type=3कौशल किशोर जी ने जिस वास्तविकता को इंगित किया है कि, वामपंथियों ने डॉ अंबेडकर द्वारा बताए मार्ग जातीय असमानता के विरुद्ध संघर्ष को अहमियत नहीं द...
रविशंकर श्रीवास्तव
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विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )जन संदेश टाईम्स , लखनऊ  दिनांक 06 नवंबर 2015 में  प्रकाशित कौशल किशोर जी का सारगर्भित लेख  एवं उनका संकलित समाचार  ------ संकलन...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) असद जैदी साहब   दिनांक 01 सितंबर 2015 को क़ैसर बाग स्थित राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह के जयशंकर प्रसाद सभागार में 'राही मासूम रज़ा साहित्य ए...
विजय राजबली माथुर
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 माईक पर कौशल किशोर व मंच पर प्रो .मेनेजर पाण्डेय Vir Vinod Chhabra6 hrs · आलोचना की संस्कृति खतरे में है - प्रो.मैनेजर पाण्डेय। -वीर विनोद छाबड़ा आज के भारत में लोकतंत्र और आलोचना की संस्कृति - यह विषय था, कल लखनऊ में जन संस्कृति मंच के तत्वाधान में आयोजित स...
नई कलम
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एक बार फिर कौशल सा'ब का कलाम आपकी आँखों  में सरमाया करना चाहता हूँ क़ुबूल करें .. आपकी दुआओं का तलबगार रहूँगा..आधा छूटा हुआ जाम खुली हुई किताब रिन्दों का साथ फिर भी अकेला हूँ याद आती है वो याद जिनमें  मैं जवाँ हुआ      &n...
 पोस्ट लेवल : कौशल किशोर