ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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  सात वर्ष पूर्व आज ही के दिन इस 'क्रांतिस्वर ' ब्लाग को प्रारम्भ किया था। 1973 में पहली बार आगरा और मेरठ के स्थानीय अखबारों में मेरे लेख प्रकाशित हुये थे तब से जब तब अखबारों में लेख छपते रहे हैं। आगरा के 'सप्तदिवा ' साप्ताहिक से पहले सहायक फिर उप संपादक...
 पोस्ट लेवल : क्रांतिस्वर
विजय राजबली माथुर
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 ..................................."विजय माथुर जी ने ‘क्रांति स्वर‘ के माध्यम से अपनी विचारधारा को पेश करने की एक अनाधिकार चेष्टर की है। वर्तमान काल में यह देखने में आ रहा है कि जो आदमी धर्म के बुनियादी सिद्धांतों तक से कोरा है और जिसके आचरण में धर्म कम और पश...
विजय राजबली माथुर
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अखबार पढ़ने का शौक तो बचपन ही से था तभी तो बाबूजी लखनऊ में  रविवार  को   'स्वतंत्र भारत'का साप्ताहिक अंक 1959-60 में  6-7 वर्ष की उम्र से ही मुझे खरीद देते थे । फिर लखनऊ से बरेली जाने पर आफिस की क्लब से  क्रांतिकारियों के उपन्यास,धर्मयु...
विजय राजबली माथुर
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अखबार पढ़ने का शौक तो बचपन ही से था तभी तो बाबूजी लखनऊ में  रविवार  को   'स्वतंत्र भारत'का साप्ताहिक अंक 1959-60 में  6-7 वर्ष की उम्र से ही मुझे खरीद देते थे । फिर लखनऊ से बरेली जाने पर आफिस की क्लब से  क्रांतिकारियों के उपन्यास,धर्मय...
विजय राजबली माथुर
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  -कम्युनिस्ट आंदोलन -विफल क्यों?---मनीषा पांडेManisha Pandey's status. एक पुरानी एफबी पोस्‍ट, जो अचानक रेलेवेंट हो उठी है - 21 साल की उम्र में जब मैंने पहली बार इलाहाबाद छोड़ा, तो शहर के क्रांतिकारियों ने मुझे एक तमगे से नवाजा था - कॅरियरिस्ट । मनीषा...
विजय राजबली माथुर
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मंगलवार, 3 अगस्त 2010 से इस ब्लाग का प्रारम्भ इस लेख से हुआ था : "लखनऊ तब और अब " http://vidrohiswar.blogspot.in/2010/08/blog-post.htmlवैसे एक ब्लाग 'क्रांतिस्वर' पहले से चल रहा था जिसमें पूर्व प्रकाशित लेखों को देना शुरू किया था। नए विचार भी उसी में दे रहे थे।...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )हिंदुस्तान,लखनऊ,27-04-2012 सचिन और रेखा को राष्ट्रपति महोदया द्वारा राज्य सभा मे बतौर सांसद खिलाड़ी और कलाकार होने के नाते मनोनीत किया गया है। किन्...
विजय राजबली माथुर
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पूनम की जो रचनाएँ समय-समय पर 'क्रांतिस्वर' और 'जो मेरा मन कहे' मे प्रकाशित हुई हैं उन्हे आज 'पूनम वाणी' के रूप मे पुस्तकाकार रूप देकर उनको जन्मदिन का उपहार देने का प्रयास "तेरा तुझ को अर्पण,क्या लागे मेरा" के आधार पर किया है। एक तो सर्वहारा तिस पर भी  कंजूस इस...