ब्लॉगसेतु

सतीश सक्सेना
101
वह दिन भूलीं कृशकाय बदन,अतृप्त भूख से , व्याकुल हो,  आयीं थीं , भूखी, प्यासी सी इक दिन इस द्वारे आकुल हो जिस दिन से तेरे पाँव पड़े  दुर्भाग्य युक्त इस आँगन में !अभिशप्त ह्रदय जाने कैसे ,भावना क्रूर इतनी मन में ,पीताम्बर प...
मुकेश कुमार
208
पिछले दिनों जिस  तरह  से एक व्यक्ति की हत्या बेवजह हो गयी .........हाँ बेवजह ही तो कहूँगा इस वजह कोसिर्फ ये शंका की उसने क्या खाया है !! एक सभ्य समाज में हत्या का उद्देश्य ये नहीं हो सकता !बस इसी पर मेरी ये कविता !!अख़लाक़बूढ़े तो हो ही चुके थे तुम,  मर...
हंसराज सुज्ञ
343
मांसाहार और शाकाहार समान हैं ?अक्सर सुनती हूँ मैं तर्क मांसाहार के सन्दर्भ में कि शाकाहार और मांसाहार समान हैं। क्या सच ?एक सुखद अनुभूति कीयाद है मन मेंकॉलेज की खिड़की पर बैठी मैं खिड़की से भीतर आती सौम्य जीवनदायी वायु।  गहरी साँस...
हंसराज सुज्ञ
343
यह बात तो हर कोई जानता है कि माँस कैसे प्राप्त किया जाता है. जीवन हर जीव को उतना ही प्रिय है, जितना कि हम सब को. अपनी खुशी से कोई पशु मरना नहीं चाहता. अत: उसे मारने से पूर्व अनेक क्रूर और अमानुषिक यातनाएं दी जाती हैं. जब वह वध स्थान पर खडा किया जाता है तो उसकी क...
पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक
735
नसीबों वाले हैं, जिनके है बेटियाँ   घर की लक्ष्मी है लड़की, भविष्य की आवाज़ है लड़की. सबके सिर का नाज़ है लड़की, माता-पिता का ताज है लड़की. घर भर को जन्नत बनती हैं बेटियाँ, मधुर मुस्कान से उसे सजाती है बेटियाँ. पिघलती हैं अश्क बनके माँ के दर्द से, रोते हुए बाब...
पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक
735
अपनाने का डर सा लगताशेरों- शायरी की महफिल में आपका स्वागत है. नाचीज़ का सलाम कबूल करें. शेरों- शायरी, ग़ज़लों, कविताओं की दुनियां में जब कोई भी, कभी भी किसी रचना को सुनता या पढ़ता है. तब कई बार लगता है कि-उपरोक्त रचना को या सिर्फ इन लाइनों को मेरे लिए कहा गया है....
पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक
482
क़ानूनी समाचारों पर बेबाक टिप्पणियाँ (7) प्रिय दोस्तों व पाठकों, पिछले दिनों मुझे इन्टरनेट पर हिंदी के कई लेख व क़ानूनी समाचार पढने को मिलें. उनको पढ़ लेने के बाद और उनको पढने के साथ साथ उस समय जैसे विचार आ रहे थें. उन्हें व्यक्त करते हुए हर लेख के साथ ही अपने अनुभव क...
पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक
482
क़ानूनी समाचारों पर बेबाक टिप्पणियाँ (2) प्रिय दोस्तों व पाठकों, पिछले दिनों मुझे इन्टरनेट पर हिंदी के कई लेख व क़ानूनी समाचार पढने को मिलें.उनको पढ़ लेने के बाद और उनको पढने के साथ साथ उस समय जैसे विचार आ रहे थें. उन्हें व्यक्त करते हुए हर लेख के साथ ही अपने अनुभव के...