ब्लॉगसेतु

Basudeo Agarwal
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(बीती जवानी)(1)जवानी में जोइरादे पत्थर सेमजबूत होते थे,,,वे अब अक्सरपुराने फर्नीचर सेचरमरा टूट जाते हैं।**(2)क्षणिका  (परेशानी)जो मेरी परेशानियों परहरदम हँसते थेपर अब मैंने जबपरेशानियों मेंहँसना सीख लिया हैवे ही मुझे अबदेख देखरो रहे हैं।**(3)क्षणिका (पहचान)आभा...
Meena Bhardwaj
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                       उसने कहा था---मैं आत्मा हूँ उसकीमेरे से ही उसकी सम्पूर्णता हैमैं जीये जा रही हूँअपनी अपूर्णता के साथताकि…मैं उसकी सम्पूर्णता बनी रहूँ--- बाल्टी भर धूप ढकी रखी हैएक कोन...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ
Basudeo Agarwal
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(1)पेड़ की पत्तियों कासौंदर्य,तितलियों का रंग,उड़ते विहगों कीनोकीली चोंच की कूँची;मेरे प्रेम केकैनवस परप्रियतम का चित्रउकेर रही है,न जानेकब पूरा होगा।**क्षणिका (जिंदगी)(2)जिंदगीचैत्र की बासन्ती-वास,फिर ज्येष्ठ कीतपती दुपहरी,उस पर फिरसावन की फुहार,तब कार्तिक कीशरद सुह...
जेन्नी  शबनम
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कहानियाँ  *******1.छोटे-छोटे लम्हों में   यादों की ढेरों कतरन हैं   सबको इकट्ठाकर   छोटी-छोटी कहानी रचती हूँ   अकेलेपन में   यादों से कहानियाँ निकल   मेरे चेहरे पे खिल जाती हैं।   2.&nb...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ ज़िन्दगी
sanjiv verma salil
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*कुंडलिया वादे कर जो भुला दे, वह खोता विश्वास.ऐसे नेता से नहीं, जनता को कुछ आस.जनता को कुछ आस, स्वार्थ ही वह साधेगा.भूल देश-हित दल का हित ही आराधेगा.सलिल कहे क्यों दल-हित को जनता पर लादे.वह खोता विश्वास भला दे जो कर वादे १९-१२-२०१७ *शिवमय दोहे ल...
sanjiv verma salil
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क्षणिका *बहुत सुनी औरों की अब तो मनमानी कुछ की जाए.दुनिया ने परखा अब तक अब दुनिया भी परखी जाए *http://divyanarmada.blogspot.in/
 पोस्ट लेवल : क्षणिका
sanjiv verma salil
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क्षणिका :*मन-वीणा पर चोट लगी जब,तब झंकार हुई. रिश्तों की तुरपाई करते अँगुली चुभी सुई.खून जरा सा सबने देखा सिसक रहा दिल मौन?आँसू बहा न व्यर्थ पीर कब, बाँट सका है कौन? *१३-७-२०१८ http://divyanarmada.blogspot.in/
 पोस्ट लेवल : क्षणिका
जेन्नी  शबनम
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स्त्री हूँ (10 क्षणिकाएँ) ******* 1. अकेली   *** रह जाती हूँ   बार-बार   हर बार   बस अपने साथ   मैं, नितांत अकेली!   2. भूल जाओ *** सपने तो...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ स्त्री
ऋता शेखर 'मधु'
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क्षणिकाएँ------------- १.आँधियाँ चलींदो पँखुरी गुलाब कीबिखर गईं टूटकरमन पूरे गुलाब की जगहउन पँखुरियों पर अटका रहा|2रेगिस्तान मेंआँधियों ने मस्ती कीरेत से भर गई थीं आँखेंआँखों पर होने चाहिये थेचश्मे3हवा स्थिर थीजब रौशन किया था एक दीयामचल गई ईर्ष्...
sanjiv verma salil
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 आज की रचनाएँ:क्षणिका :तुम्हारा हर सचगलत हैहमाराहर सच गलत हैयही हैअब की सियासतदोस्त हीकरते अदावत*मुक्तक:मँहगा न मँहगा सस्ता न सस्तासस्ता विदेशी करे हाल खस्तालेना स्वदेशी कुटियों से सामां-उसका भी बच्चा मिले ले के बस्ताउद्योगपतियों! मुनाफा घटाओमजदूरी थोड़ी कभी तो...
 पोस्ट लेवल : क्षणिका मुक्तक