ब्लॉगसेतु

Meena Bhardwaj
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                       उसने कहा था---मैं आत्मा हूँ उसकीमेरे से ही उसकी सम्पूर्णता हैमैं जीये जा रही हूँअपनी अपूर्णता के साथताकि…मैं उसकी सम्पूर्णता बनी रहूँ--- बाल्टी भर धूप ढकी रखी हैएक कोन...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ
जेन्नी  शबनम
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कहानियाँ  *******1.छोटे-छोटे लम्हों में   यादों की ढेरों कतरन हैं   सबको इकट्ठाकर   छोटी-छोटी कहानी रचती हूँ   अकेलेपन में   यादों से कहानियाँ निकल   मेरे चेहरे पे खिल जाती हैं।   2.&nb...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ ज़िन्दगी
जेन्नी  शबनम
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स्त्री हूँ (10 क्षणिकाएँ) ******* 1. अकेली   *** रह जाती हूँ   बार-बार   हर बार   बस अपने साथ   मैं, नितांत अकेली!   2. भूल जाओ *** सपने तो...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ स्त्री
ऋता शेखर 'मधु'
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क्षणिकाएँ------------- १.आँधियाँ चलींदो पँखुरी गुलाब कीबिखर गईं टूटकरमन पूरे गुलाब की जगहउन पँखुरियों पर अटका रहा|2रेगिस्तान मेंआँधियों ने मस्ती कीरेत से भर गई थीं आँखेंआँखों पर होने चाहिये थेचश्मे3हवा स्थिर थीजब रौशन किया था एक दीयामचल गई ईर्ष्...
Meena Bhardwaj
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✴️ अनकही व्यथा मन में दबायेधूसर मेघ …बिना नागा चले आते हैंसांझ की अगवानी मेंऔर न जाने क्यों...ढुलक जाते हैं अश्रु बूँद सेधरा के आँचल में..✴️खड़ी रहने दोअपरिचय की दीवारकुछ भरम..मुस्कुराहटों में सजे बड़े भले लगते हैं✴️रा...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ
Meena Bhardwaj
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कड़वे घूंट सा आवेश तो पी लियामगर...गहरी सांसों में मौन भरे पलकों की चिलमन मेंएक क़तरा...अटका रह गया वहअभी तक वहीं ठहरा हैखारे सागर सा..
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ
जेन्नी  शबनम
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रूह (10 क्षणिकाएँ) ******* 1. कील ******* मन के नाज़ुक तहों में   कभी एक कील चुभी थी   जो बाहर न निकल सकी   वह बारहा टीस देती है   जब-जब दूसरी नई कील   उसे और अंदर बेध देती है !   ...
Meena Bhardwaj
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झील किनारे...बसी है बैया कॉलोनी,सूखी शाखों पर ।मेरे मन की सोचों जैसी...थकान भरी और,स्पन्दनहीन ।
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ
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--जीवन !दो चक्रकभी सरलकभी वक्र,--जीवन !दो रूपकभी छाँवकभी धूप--जीवन!दो रुखकभी सुखकभी दुःख--जीवन !दो चक्रकभी सरलकभी वक्र,--जीवन !दो रूपकभी छाँवकभी धूप--जीवन!दो रुखकभी सुखकभी दुःख--जीवन !दो खेलकभी जुदाईकभी मेल--जीवन !दो ढंगकभी दोस्तीकभी जंग--जीवन !दो आसकभी तमकभी प्रका...
 पोस्ट लेवल : कुछ क्षणिकाएँ जीवन
Meena Bhardwaj
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(1)मुझको समझने के लिएकाफी हैं  शब्दों के पुलमेरी दुनिया शब्दों से परेअधूरी सी है ….(2)सांसारिक व्यवहारिकताअभेद्य दीवार सी हैमेरे लिए...पारदर्शिता के अभाव मेंघुटन महसूस होती है(3)अचानक …टूट कर गिरा एक लम्हाखुद की खुदगर्ज़ी भूल...सीना ताने खड़ा हैलेने हिसाबज़िन्दगी...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ