ब्लॉगसेतु

Meena Bhardwaj
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(1)थके तन में बोझल मनडूब रहा है यूं .....जैसे..अतल जल मेंपत्थर का टुकड़ा(2)स्नेहिल अंगुलियों कीछुवन मांगता है मन..बन्द दृगों की ओट मेंनींद नहीं..जलन भरी है(3)दिखावे से भरपूरढेर सारी गर्मजोशीआजकल केरिश्ते-नाते भी ..हायब्रिड गुलाब जैसे लगते हैं★★★
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ
Meena Bhardwaj
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(1)बेसबब नंगे पाँव ...भागती सी जिन्दगीकट रही है बस यूं …जैसे एक पखेरु लक्ष्यहीन उड़ान में...समय के बटुए सेरेजगारी खर्च रहा हो …(2)नेह के धागों से बुनी थी वह  कमीजवक्त के साथ...नेह के तन्तुसूखते गए और….कमीज की सींवन दुर्बलएक युग  के बादधूल अटी गठर...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ
Meena Bhardwaj
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(1)मानो या ना मानो दिल की धडकनों जैसाबेशुमार लगाव है तुम सेजेनेटिक प्रॉब्लम की सुनते हीउसके लिए भी तो यूं ही बेहिसाब प्यार छलका थाजैसे तुम्हारे लिए छलकता हैप्रतिदिन… प्रतिपल...(2)अजीब सी हलचल होती है दूध के उबाल सी….जब कहीं विनम्रता को &nbs...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ
जेन्नी  शबनम
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क्षणिकाएँ (10 क्षणिका)   1.चुटकी   *******   एक चुटकी नमक   एक चुटकी सिन्दुर   एक चुटकी ज़हर   मुझे औरत करते रहे   ज़िन्दगी भर।   2. विद्रोही औरतें   *******   ...
Meena Bhardwaj
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मन ऊब गया है अपने आप सेआज कल खुद से कुट्टी चल रही है वरना ऊब के लिए फुर्सत कहाँ….जिन्दगी से तो अपनी गाढ़ी छनती हैअहसासों की जमीन को भीहोती है रिश्तों में उर्वरता की जरुरत माटी भी मांगती है चन्द बारिश की बूँदें...सोंधी सी खुश्बू बिखेरने की खातिरफोन उठाते ही...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ
Meena Bhardwaj
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कुछ यादेंफाउंटेन पेन से कागज पर उकेरीइबारत सी होती हैं भीग भले ही जाएमगर अपना अक्स नही खोती  है खुशी से लबरेज़चंद अल्फाज़ औरखनकती आवाजदेते हैं गवाही इस बात की.., किनेह के धागे बड़े मजबूत हैंअविरल प्रवाह बहता खारापनबना उसकी पहचानअपने या बेगानेकितने ही अश्रु भरे उर...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ
Meena Bhardwaj
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(1)  सांध्य आरती में,जलती धूप सी ।कुछ अनुभूत यादें,जब भी आती हैं ।मन के भूले-भटके, छोर महकने लगते हैं ।(2)स्मृतियों का वितानसंकरा सा है...जरा और खोल दो ।यादों के जुगनू..मन के बियाबान मेंथोड़े और बढ़ गए हैं ।।         ...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ
जेन्नी  शबनम
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अंतर्मन (15 क्षणिकाएँ)   *******   1.   मेरे अंतर्मन में पड़ी हैं   ढेरों अनकही कविताएँ   तुम मिलो कभी   तो फुर्सत में सुनाऊँ तुम्हें।   2.   हजारों सवाल हैं मेरे अंतर्मन में  &nbs...
देवेन्द्र पाण्डेय
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अपराधी कौन ?................नदियाँ सूखती हैं समुंदर के प्यार में समुंदर प्यार करता तोनदियांपहाड़ चढ़ जातीं!किसी नदी की मृत्यु के लिएकोई मनुष्यजिम्मेदार नहीं।...............खिलाड़ी .........................दर्शकों को लगाऔर रेफरी का भी यही निर्णय थ...
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ व्यंग्य
शालिनी  रस्तौगी
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आवाजेंमन में उठतीआवाजेंकानों में  फुसफुसातीगुनगुनातीं,चीखतीं चिल्लातीं,मेरे होंठों पेमौन बनकेठहर जाती  हैं 
 पोस्ट लेवल : क्षणिकाएँ