दायरे में सिकुड़ रही स्वतंत्रता, पनीली कर सकूँ ऐसा नीर कहाँ से लाऊं ? कविता सृजन की आवाज़  है चिरकाल तक जले,  कवि हृदय में वो आग कैसे जलाऊं ? समझा पाऊँ शोषण की परिभाषा,  ऐसा तर्क कहाँ  से लाऊं  ? स्वार्थ के...