--नहीं रहा अब समय पुरानाख़ुदगर्ज़ी का हुआ ज़माना--कैसे बुने कबीर चदरियाउलझ गया है ताना-बाना--पसरी है सब जगह मिलावटनकली पानी नकली दाना--देशभक्त हैं दुखी देश मेंलूट रहे मक्कार खज़ाना--आजादी अभिशाप बन गयीहुआ बेसुरा आज तराना--दीन-धर्म के फन्दे में हैमानवता का अब अफसाना...