--घर-आँगन-कानन में जाकर मैं,अपनी तुकबन्दी करता हूँ।अनुभावों का अनुगायक हूँ,मैं कवि लिखने से डरता हूँ।।--है नहीं मापनी का गुनिया,अब तो अतुकान्त लिखे दुनिया।असमंजस में हैं सब बालक,क्या याद करे इनको मुनिया।मैं बन करके पागल कोकिल,खाली पन्नों को भरता हूँ।मैं कवि लिखने स...