वर्षों पहले पहाड़ दुर्गम था, दूर होना कोई प्रश्न नहीं था?था तो पहाड़ का दुर्गम होना. सोचता था..... कभी पहाड़ की चोटी तक पहुंचा तो छू लूँगा आसमान हालाँकि यह भी भान था कि पहाड़ होता है वीरान.फिर भी पहाड़ मुझे खींचता था अपनी ओरया कभी ऐसा भी हुआ मैं खुद ही खिंच गया पहाड़ की...