ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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Mukesh Tyagi"समाज में स्वतन्त्र चिंतन-विचार को भी नियंत्रित करने का अभियान चल रहा है क्योंकि पूँजी और मुनाफे के इस संकेन्द्रण से अधिकाँश लोगों के जीवन में जो गहन संकट पैदा होगा उसके ख़िलाफ़ होने वाले हर प्रतिरोध को पहले ही दबा देने की कोशिश की जा रही है। फासीवादी हमल...
jaikrishnarai tushar
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चित्र -गूगल से साभार खुली हुई वेणी को धूप में सुखाना मत खुली हुई वेणी को  धूप में सुखाना मत बूंद -बूंद धरती पे गिरने दो |सूख रही झीलों में लहर उठे प्यासे इन हँसों को तिरने दो |तुम्हें देख सागर से उमड़ -घुमड़ बादल भी धार तोड़...
kavita verma
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मधु से मंदिर में मिल कर मधुसुदन को कई पुरानी बातें याद आ गयीं .कैसे उसकी मधु से मुलाकात हुई कब वो प्यार में बदली और फिर समय ने कैसी करवट की .उस रिश्ते का क्या हुआ ?मधु से मिलकर उसे सारी बात बताने के बाद भी वह शांत थी ...उसके बाद वह फ...
अविनाश वाचस्पति
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खुली खिड़की से कुलवंत हैप्पीकुछ दिन पहले मैं अहमदाबाद के रेलवे स्टेशन पर खड़ा बठिंडा को जाने वाली रेलगाड़ी का इंतजार कर रहा था, मैं खड़ा था, लेकिन मेरी नजर इधर उधर जा रही थी, लड़कियों को निहारने के लिए नहीं बल्कि कुछ ढूंढने के लिए, जो खोया भी नहीं था। इतने में मेरी निगा...