ब्लॉगसेतु

राजेश कश्यप
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1 मई/अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस विशेषयह है श्रमिकों के खून-पसीने से लिखी गई महागाथा!- राजेश कश्यपहर काल में श्रमिकों की हालत दयनीय रही है। लेकिन, कोरोना काल में तो आज श्रमिक अति दयनीय है। हर तरह का शोषण श्रमिकों की नियति बन गई है। कोरोना काल तो श्रमिकों के लिए किसी...
मुकेश कुमार
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जी रहे हैं या यूँ कहें कि जी रहे थेढेरों परेशानियों संगथी कुछ खुशियाँ भी हमारे हिस्सेजिनको सतरंगी नजरों के साथहमने महसूस करबिखेरी खिलखिलाहटेंकुछ अहमियत रखते अपनों के लिएहम चमकती बिंदिया ही रहेउनके चौड़े माथे कीइन्ही बीतते हुए समयों मेंकुछ खूबियाँ ढूंढ कर सहेजी भीकभी...
विजय राजबली माथुर
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Ravindra Pandey
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ख़ातिर वतन के देखो, क़ुरबां हुए हैं लाल,फड़क उठी भुजाएँ, अब ठोकने को ताल।इतना ही रहम कर दो, सुनो मेरे हुक्मरान,लाने दो काट कर सिर, रह जाये ना मलाल।सिंदूर मिट गए कई, घर-आँगन उजड़ गए,कैसी चली समय ने, ये साजिशों की चाल।ख़ामोशी छा गयी है,  सरहद  के  पार भी,दह...
VMWTeam Bharat
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सलमान खुर्शीद ने कह दिया कि कांग्रेस के दामन पर मुसलमानों के खून के दाग लगे हैं। मैं कांग्रेस का नेता हूं। इस नाते मुसलमानों के ख़ून के यह धब्बे मेरे अपने दामन पर भी हैं - सलमान खुर्शीदकांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने ताला नगरी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के...
sanjiv verma salil
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मुक्तक सलिला *प्रीत की रीत सरस गीत हुईमीत सँग श्वास भी संगीत हुईआस ने प्यास को बुझने न दियाबिन कहे खूब बातचीत हुई*क्या कहूँ, किस तरह कहूँ बोलो?नित नई कल्पना का रस घोलोरोक देना न कलम प्रभु! मेरीछंद ही श्वास-श्वास में घोलो*छंद समझे बिना कहे जातेज्यों लहर-साथ हम...
Bhavna  Pathak
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बड़े काम की साफ सफाईलाख रोग की एक दवाईसुबह उठो पानी पी करकेफ्रेश हो आओ मेरे भाईब्रश करना और रोज नहानाकपड़े साफ पहन कर आनाजब नाखून बड़े हो जाएंदेर न करना उन्हें कटानाकचरा इधर उधर मत फेंकोडस्टबिन में हरदम डालोभोजन करने के  पहले तुमधोना हाथ कभी मत भूलोघर बाहर जब...
Ravi Parwani
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29 + Facts about Blood in Hindi, रक्त से जुड़े 30 रोचक तथ्य रोबोट जैसा नकली मानव तक वैज्ञानिकों ने बना लिया है पर वह लोग अभी भी मानव का लोही ( रक्त ) बनाने में निष्फल साबित हुए है | इसीलिए तो दुनिया भर की संस्थाए आज सभी को रक्तदान के लिए सभी को जागृत कर रही है...
जन्मेजय तिवारी
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                          उस दिन रात कुछ ज्यादा ही काली और डरावनी थी । झींगुर तक डर के मारे अपने वाद्य यंत्रों को समेट कर इधर-उधर छिप गए थे । कभी...
Kajal Kumar
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