ब्लॉगसेतु

Sumit Pratap Singh
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दिल्ली गेट के पासइतिहास के दुःख भरे पलों को अपने सीने में दबाएउदास गुमसुम साखड़ा है खूनी दरवाजाजब भी सुनता है कोई अनजान सी आहट तोहो उठता है चौकन्नाऔर अपने विशाल शरीर को कड़ा कर मजबूत करने लगता हैकुछ देर बाद अपने इस प्रयास में असफल होने परसुबक...
Kajal Kumar
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उसे अपनी ज़िंदगी से यूं तो कोई शि‍कायत नहीं थी पर फि‍र भी बहुत से ऐसे सवाल थे जि‍नके जवाब उसके पास नहीं थे; कि‍ताबें थीं कि‍ उनमें अलग-अलग तरह की बातें लि‍खी मि‍लतीं. और उन कि‍ताबों से भी उठते दूसरे सवालों के जवाब देने वाला फि‍र कोई न होता. इसी ऊहापोह में उसने एक ब...