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sanjiv verma salil
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गणितीय मुक्तक:*बिंदु-बिंदु रखते रहे, जुड़ हो गयी लकीर।जोड़ा किस्मत ने घटा, झट कर दिया फकीर।।कोशिश-कोशिश गुणा का, आरक्षण से भाग-रहे शून्य के शून्य हम, अच्छे दिन-तकदीर।।*खड़ी सफलता केंद्र पर, परिधि प्रयास अनाथ।त्रिज्या आश्वासन मुई, कब कर सकी सनाथ।।छप्पन इंची वक्ष का निक...
sanjiv verma salil
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गणितीय मुक्तक: *बिंदु-बिंदु रखते रहे, जुड़ हो गयी लकीर। जोड़ा किस्मत ने घटा, झट कर दिया फकीर।।कोशिश-कोशिश गुणा का, आरक्षण से भाग-रहे शून्य के शून्य हम, अच्छे दिन-तकदीर।।*खड़ी सफलता केंद्र पर, परिधि प्रयास अनाथ। त्रिज्या आश्वासन मुई, कब कर सकी सनाथ।।छप्पन इंची वक्ष का...