ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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पथरीले हठीले हरियाली से सजे पहाड़ ग़ाएब हो रहे हैं बसुंधरा के शृंगार खंडित हो रहे हैं एक अवसरवादी सर्वे के परिणाम पढ़कर जानकारों से मशवरा ले स्टोन क्रशर ख़रीदकर एक दल में शामिल हो गया चँदा भरपूर दिया संयोगवश /...
हिमांशु पाण्डेय
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आज देखा तुम्हें अन्तर के मधुरिल द्वीप पर !निज रूपाकाश में मधुरिम प्रभात को पुष्पायित करती, हरसिंगार के कुहसिल फूल-सी,प्रणय-पर्व की मुग्ध कथा-सी बैठी थीं तुम ! अपने लुब्ध नयनों से ढाँक कर ताक रहा था तुम्हें !औचक ही तुमने मुझे देख लिया ! अकारण ही सहसा आ गयी लाज तुम्...