ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
306
पथरीले हठीले हरियाली से सजे पहाड़ ग़ाएब हो रहे हैं बसुंधरा के शृंगार खंडित हो रहे हैं एक अवसरवादी सर्वे के परिणाम पढ़कर जानकारों से मशवरा ले स्टोन क्रशर ख़रीदकर एक दल में शामिल हो गया चँदा भरपूर दिया संयोगवश /...
हिमांशु पाण्डेय
137
आज देखा तुम्हें अन्तर के मधुरिल द्वीप पर !निज रूपाकाश में मधुरिम प्रभात को पुष्पायित करती, हरसिंगार के कुहसिल फूल-सी,प्रणय-पर्व की मुग्ध कथा-सी बैठी थीं तुम ! अपने लुब्ध नयनों से ढाँक कर ताक रहा था तुम्हें !औचक ही तुमने मुझे देख लिया ! अकारण ही सहसा आ गयी लाज तुम्...