ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
विजय राजबली माथुर
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विजय राजबली माथुर
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अनिल सिन्हालखनऊ का लोहिया पार्क : मूर्तियों और प्रतीकों तक सिमट गई है विचारधारादेश के अधिकतर राजनीतिक दलों ने अपने आदर्श छोड़कर पूंजीवाद के आगे घुटने टेक दिए हैंविचारधाराओं की वापसी से ही बचेगा लोकतंत्र : जातियों के कई राजनीतिक समूह अब बड़ी संख्या में उस बीजेपी...
विजय राजबली माथुर
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Roli Dixit
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खुशबुएँ सिधारींहेराई गयी मिटियारोई के आंख मूंदेछज्जे बैठी बिटियादिया-बाती तेल नाइना खावे को रोटियाउल्लू लक्ष्मी लै उड़े, पूजेसालिगराम की बटियाकपड़ा ना बताशा-खीलकहाँ मिले खुटियागरिबिया से नेह बढ़िअंसुवन से पिरितियाबस सपना मा रहि गईंदेवारी की बतिया...
Roli Dixit
159
'बापू सहर जात हौ पेड़ा लेत आयो' कलुआ की बात सुनते ही नन्हकू ने खाली जेब में हाथ डाला।'सुनत हौ बप्पा की खांसी गढ़ाई रही न होते कौनो सीसी लाय देते सहर ते...इत्ते दिन ते परे-परे खाँसत हैं..करेजा हौंक जात है..''हम सहर बिरवा हलावे नाइ जाइ रहेन..देखी जाय डॉकटर अम्मा का कब...
 पोस्ट लेवल : कहानी लघुकथा गरीबी
विजय राजबली माथुर
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* निर्णायक पदों पर दंभी, मूढ़, कट्टर, पूर्वाग्रही बैठ गये हैं और अपने निर्णयों से पूरे देश को दुख दे रहे हैं, जीवन दुभर कर रहे हैं।** यह देश बहुत बड़ी तबाही की तरफ जा रहा है...आने वाले दिन बहुत बुरे होने वाले हैं..*** इस देश का बुद्धिजीवी, सृजनशील, कला...
Roli Dixit
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आते हुए उसने खटकाया भी नहींजैसे दबे पाँव मगर&#234...
सुशील बाकलीवाल
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कहाँ पर बोलना है और कहाँ पर बोल जाते हैंजहाँ खामोश रहना है वहाँ मुँह खोल जाते हैंनयी नस्लों के ये बच्चे जमाने भर की सुनते हैंमगर माँ बाप कुछ बोले तो बच्चे बोल जाते हैफसल बर्बाद होती है तो कोई कुछ नही कहताकिसी की भैंस चोरी हो तो सारे बोल जाते हैंबहुत ऊँची दुकानो मे...
सुशील बाकलीवाल
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          एक उद्योगपति आवश्यक मीटिंग के लिये कहीं जा रहा था । अचानक रास्ते में उसकी कार बंद हो गई । रुकने का समय नहीं था अतः उसने कार की रिपेरिंग व घर पहुंचाने की जिम्मेदारी ड्रायवर पर छोडते हुए कुछ दूर खडे एक ऑटो-रिक...