ब्लॉगसेतु

Shachinder Arya
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बिलकुल अभी, सीढ़ियाँ चढ़ते हुए सोच रहा था, कितना अच्छा होता, मैं इस दुनिया के किसी भी देश का नागरिक न होता। पर इस सोचने के साथ ही एक पल में मैंने न केवल राष्ट्र-राज्य के राजनैतिक इतिहास को ख़ारिज कर दिया अपितु इसकी किसी भी तरह से हताश दिखने वाली टिप्पणी में उन सारी पर...
Shachinder Arya
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किसी का शहर छोड़कर जाना कैसा है? हमेशा के लिए। कभी लौटकर वापस न आने के लिए। कई दोस्त हैं जो अब यहाँ नहीं हैं। सब बारी-बारी अपने सपनों को समेटकर यहाँ से चल दिये। जिन बक्सों में वह इन्हे भरकर लाये थे, उनमें क्या ले गए होंगे, पता नहीं। उन्होने किसी को भी नहीं बताया। शा...