ब्लॉगसेतु

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--नहीं रहा अब समय पुरानाख़ुदगर्ज़ी का हुआ ज़माना--कैसे बुने कबीर चदरियाउलझ गया है ताना-बाना--पसरी है सब जगह मिलावटनकली पानी नकली दाना--देशभक्त हैं दुखी देश मेंलूट रहे मक्कार खज़ाना--आजादी अभिशाप बन गयीहुआ बेसुरा आज तराना--दीन-धर्म के फन्दे में हैमानवता का अब अफसाना...
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--सुबह होगी तो सूरज निकल जायेगावक्त के साथ सब कुछ बदल जायेगा--जिन्दगी में कभी हार मत माननाधूप में बर्फ सारा पिघल जायेगा--दिल की कोटर में भी तो जलाओ दियादेखकर रौशनी मनल मचल जायेगा --पोथियाँ तो जगत की पढ़ो प्यार सेदम्भ का आशियाँ खुद दहल जायेगा--जूझ...
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--अजनबी ख्वाब में आता क्यों हैहाले-दिल अपना सुनाता क्यों है--अपने लब पे अधूरी प्यास लिएतिशनगी अपनी बुझाता क्यों है--कौन से जन्म का ये नाता हैहमको अपना वो बताता क्यों है--खुली आँखों में रूबरू नहीं होताअपना अधिकार जताता क्यों है--बात करता है चाँद-तारों कीझूठ से अपने...
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--जिन्दगी में बबाल मत करनाप्यार में कुछ सवाल मत करना--ये जहाँ आग का समन्दर हैतैरने का खयाल मत करना-- बेजुबानों में जान होती हैउनका झटका-हलाल मत करना-- प्रीत का ताल तो अनोखा हैडूबने का मलाल मत करना-- नेक-नीयत से मंजिले मिलतींझूठ से कुछ कमाल मत कर...
संतोष त्रिवेदी
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सब गिर गए हैं,किसे अब गिराएँ,मुहब्बत में थोड़ा,ज़हर भी मिलाएँ ।तनिक पास आओ,हमसे मिलोझटकने से पहले,गले तो लगाएँ।मिल कर रहेंगे तो अच्छा रहेगा,तुम जेल जाओ,तुम्हें हम छुड़ाएँ। तुम्हारे हैं पासे,तुम्हारी हैं चालें,गिरो तो गिराएँ,उठो तो उठाएँ ।सियासत की बहती गंगा यह...
 पोस्ट लेवल : सियासत ग़ज़ल
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--जिन्दगी साथ निभाओ, तो कोई बात बने राम सा खुद को बनाओ, तो कोई बात बने -- एक दिन दीप जलाने से भला क्या होगा रोज दीवाली मनाओ, तो कोई बात बने -- इन बनावट के उसूलों में, धरा ही क्या है प्यार की आग जगाओ, तो कोई बात बने -- सिर्फ पु...
 पोस्ट लेवल : तो कोई बात बने ग़ज़ल
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--न मजमून लिखते, न कुछ बात होतीबताओ तो कैसे मुलाकात होती--अगर दोस्ती है तो शिकवे भी होंगेन शक कोई होता, न कुछ घात होती--अगर तुम न प्यादे को आगे बढ़ातेन शह कोई पड़ती, न फिर मात होती--दिखाता न सूरत अगर चाँद अपनीन फिर ईद होती न सौगात होती--अगर छुपके ऐसे...
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--भावनाओं का अचानक भर गया तालाब हैदेशभक्ति का वतन में आ गया सैलाब है --अब खुशी पसरी हुई दीवारों दर चहके हुएजगमगाती हैं मिनारें सज गयी मेहराब है--मानता लोहा हमारा आज सारा ही जहाँअपने हुनर की देश में कारीगरी नायाब है--देखकर ऐसी बुलन्दी बहुत सदमा है वहाँदुश्मनों...
 पोस्ट लेवल : ‘रूप’ की महताब ग़ज़ल
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कविता ग़ज़लें
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जन्मदिन पर शब्द नूतन गढ़ रहा हूँमैं अभी तक आपको ही पढ़ रहा हूँ--जिन्दगी में हैं बहारें आपसे ही आपके कारण समय से लड़ रहा हूँ--नाखुदा की आप ही पतवार होआपके कारण अगाड़ी बढ़ रहा हूँ --नित नये अध्याय अब भी जोड़ता हूँकामनाओं में नगीने जड़ रहा हूँ --साथ मत...