ब्लॉगसेतु

रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : ग़ज़लें
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : कविता ग़ज़लें
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--जिन्दगी के गीत गाता जा रहा हूँसाँस की सरगम सुनाता जा रहा हूँ--पाँव बोझिल हैं थकी है पीठ भीबोझ जीवन का उठाता जा रहा हूँ--मिल गया जो भी नजराना मुझे शान से उसको लुटाता जा रहा हूँ--उम्र अब कितनी बची है क्या पताघोंसला फिर भी बनाता जा रहा हूँ--कुछ पुराने साज दामन...
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--दरक़ती जा रही हैं नींव, अब पुख़्ता ठिकानों कीतभी तो बढ़ गयी है माँग छोटे आशियानों की--जिन्हें वो देखते कलतक, हिक़ारत की नज़र से थेउन्हीं के शीश पर छत, छा रहे हैं शामियानों की--बहुत अभिमान था उनको, कबीलों की विरासत परहुई हालत बहुत खस्ता, घ...
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--पथ उनको क्या भटकायेगा, जो अपनी खुद राह बनातेभूले-भटके राही को वो, उसकी मंजिल तक पहुँचाते--अल्फाज़ों के चतुर चितेरे, धीर-वीर-गम्भीर सुख़नवरजहाँ न पहुँचें सूरज-चन्दा, वो उस मंजर तक हो आते--अमर नहीं है काया-माया, लेकिन शब्द अमर होते हैंशब्द धरोहर हैं समाज की, दिशाही...
sanjiv verma salil
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हिंदी ग़ज़ल इसने पढ़ीफूहड़ हज़ल उसने गढ़ीबेबात ही हर बात क्योंसच बोल संसद में बढ़ी?कुछ दूर तुम, कुछ दूर हमयूँ बेल नफरत की चढ़ीडालो पकौड़ी प्रेम कीस्वादिष्ट हो जीवन-कढ़ीदे फतह ठाकुर श्वास कोहँस आस ठकुराइन गढ़ीकोशिश मनाती जीत कोमाने न जालिम नकचढ़ी***संजीव९४२५१८३२४४ht...
 पोस्ट लेवल : हिंदी ग़ज़ल
सुबोध  श्रीवास्तव
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चित्र गूगल सर्च इंजन से साभार(एक)आत्मा आहत हुई तो शब्द बाग़ी हो गयेकहते कहते हम ग़ज़ल दुष्यंत त्यागी हो गये है सियासत कोठरी काजल की, रखना एहतियातअच्छे-अच्छे लोग इसमें जा के दाग़ी हो गयेगेह-त्यागन और ये सन्यास धारण सब फ़रेबज़िन्दगी से हारने वाले विरागी हो गयेगालियाँ...
 पोस्ट लेवल : ग़ज़ल
Sanjay  Grover
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ग़ज़लअपनी तरह का जब भी उन्हें माफ़िया मिलाबोले उछलके देखो कैसा काफ़िया मिलाफ़िर नस्ल-वर्ण-दल्ले हैं इंसान पे काबिज़यूँ जंगली शहर में मुझे हाशिया मिलामुझतक कब उनके शहर में आती थी ढंग से डाकयां ख़बर तक न मिल सकी, वां डाकिया मिलाजब मेरे जामे-मय में मिलाया सभी ने ज़ह्रतो तू...
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--दर्द की छाँव में मुस्कराते रहेफूल बनकर सदा खिलखिलाते रहे--हमको राहे-वफा में ज़फाएँ मिलीज़िन्दग़ी भर उन्हें आज़माते रहे--दिल्लगी थी हक़ीक़त में दिल की लगीबर्क़ पर नाम उनका सजाते रहे--जब भी बोझिल हुई चश्म थी नींद सेख़्वाब में वो सदा याद आते रहे--पास आते नहीं, दूर ज...
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--कितने हसीन फूल, खिले हैं पलाश मेंफिर भी भटक रहे हैं, चमन की तलाश में--पश्चिम की गर्म आँधियाँ, पूरब में आ गयीग़ाफ़िल हुए हैं लोग, क्षणिक सुख-विलास में--जब मिल गया सुराज तो, किरदार मर गयाशैतान सन्त सा सजा, उजले लिबास में--क़श्ती को डूबने से, बचायेगा कौन अबशामिल हैं...