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sahitya shilpi
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ग़ज़ल:1  मेरे पास कितनी कहानी पड़ी है। लबों पर टिकी है जबानी पड़ी है।   कई बार होगी अभी तो मोहब्बत अभी यार पूरी जवानी पड़ी है।   उसे अब कहाँ कुछ बताना पड़ेगा वो लड़की तो पहले से मानी पड़ी है।   कहां तक बतायें उसे हाल ए दिल मिरे दिल पे कितनी निशानी पड़ी...
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 पोस्ट लेवल : गौरव शुक्ला ग़ज़ल
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--दर्द का सिलसिला दिया तुमनेआज रब को भुला दिया तुमने--हमने करना वफा नहीं छोड़ानफरतों का सिला दिया तुमने--खिलती चम्पा को नोंचकर फेंकाफिर नया गुल खिला दिया तुमने--हमको आब-ए-हयात के बदलेफिर हलाहल पिला दिया तुमने--मौत माँगी थी हमने मौला सेफिर से मुर्दा जिला दिया तुमने-...
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हिम्मत अभी नहीं हारी हैजंग ज़िन्दगी की जारी है--मोह पाश में बँधा हुआ हूँये ही तो दुनियादारी है--ज्वाला शान्त हो गई तो क्यादबी राख में चिंगारी है--किस्मत के सब भोग भोगनाइस जीवन की लाचारी है--चार दिनों के सुख-बसन्त मेंमची हुई मारा-मारी है--हाल भले बेहाल हुआ होजान सभी...
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मुफ्त में मिलती नहीं सौगात हैंतंज करने से बिगड़ती बात हैंहो सके तो वक्त से कुछ सीख लो सामने आकर खड़ी अब मात हैं सोचकर चौपाल में मुँह खोलनातल्खियाँ देतीं बड़ा आघात हैं  सूफियों को ध्यान रखना चाहिएयूँ नहीं मिलती यहाँ खैरात हैं  मुफलिसी में भूख लगत...
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--बहता जल का सोता है हाथ-हाथ को धोता है --फूल कहाँ से पायेगा वो जो काँटों को बोता है --जिसके पास अधिक है होता वही अधिकतर रोता है --साथ समय के सब सम्भव है क्यों धीरज को खोता है  --फसल उगेगी कैसे अच्छी नहीं खेत को जोता है&...
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--भाव अपनी ग़ज़ल में कैसे भरूँशब्द को अपने गरल कैसे करूँ--फँस गया अपने बुने ही जाल मेंरास्ता अपना सरल कैसे करूँ--तिश्नगी से कण्ठ सूखा जा रहाआचमन देकर तरल कैसे करूँ--ज़िन्दगी में चाह है, ना राह हैचश्म को अपनी सजल कैसे करूँ--तन-बदन में पड़ गयीं है झुर्रियाँ“रूप” को अ...
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जब भी पुरवा बयार आती हैज़िन्दगी खूब खिलखिलाती है--जब भी बादल फलक घिरते हैंयाद साजन की तब सताती है--जब भी भँवरे गुहार करते हैंतब कली खुल के मुस्कराती है--सर्दियाँ शीत जब उगलतीं हैंचाँदनी भी कहर सा ढाती है--ज़िन्दगीभर सफर में रहना हैमंज़िलें हाथ नहीं आती है--हुस्न रह...
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--वोटरों को लीलने को, आ गये फकीर हैंअमन-चैन छीनने को, आ गये हकीर हैं--तिजारतों के वास्ते, बना रहे हैं रास्ते,हरी घास छीलने को, आ गये अमीर हैं--दे रहे हैं मुफ्त में, सुझाव भी-सलाह भी,गोटियों को लीलने को, आ गये वज़ीर हैं--ज़िन्दगी के हाट में, बेचते हैं मौत को,धीरता क...
 पोस्ट लेवल : आ गये फकीर हैं ग़ज़ल