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jaikrishnarai tushar
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स्मृतिशेष कवि कैलाश गौतम कैलाश गौतम [08-01-1944-09-12-06]काव्य प्रेमियों के मानस को अपनी कलम और वाणी से झकझोरने वाले जादुई कवि का नाम है 'कैलाश गौतम'। जनवादी सोच और ग्राम्य संस्कृति का संवाहक यह कवि दुर्भाग्य से अब हमारे बीच नहीं है | आकाशवाणी इलाहाब...
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--सन्नाटा पसरा है अब तो,गौरय्या के गाँव में।दम घुटता है आज चमन की,ठण्डी-ठण्डी छाँव में।।--नहीं रहा अब समय सलोना,बिखर गया ताना-बाना,आगत का स्वागत-अभिनन्दन,आज हो गया बेगाना,कंकड़-काँटे चुभते अब तो,पनिहारी के पाँव में।दम घुटता है आज चमन की, ठण्डी-ठण्डी छाँव में।।...
 पोस्ट लेवल : गीत गौरय्या का गाँव
अनीता सैनी
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असबाब लादे रौबीले तन पर, यायावर मुस्कुराहट को मात दे गया,सजा सितारे सान से सीने  पर,    सपनों का सौदागर सादगी में सिमट गया |  आसमां की छात्रछाया उसका मन मोह गयी,   देह के उसको  मटमैला लिबास भा गया,  नींद क...
kumarendra singh sengar
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अपने गाँव बचपन से ही जाना होता रहता था. गर्मियों की छुट्टियाँ कई बार गाँव में ही बिताई गईं. इसके अलावा चाचा लोगों के साथ भी अक्सर गाँव जाना होता रहता था. हमारे गाँव जाने के क्रम में कोई न कोई साथ रहता था मगर उस बार अकेले जाना हो रहा था. बिना किसी कार्यक्रम के, बिना...
अजय  कुमार झा
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कहते हैं कि संगत का असर बहुत पड़ता है और बुरी संगत का तो और भी अधिक | बात उन दिनों की थी जब हम शहर से अचानक गाँव के वासी हो गए थे | चूंकि सब कुछ अप्रत्याशित था और बहुत अचानक हुआ था इसलिए कुछ भी व्यवस्थित नहीं था | माँ और बाबूजी पहले ही अस्वस्थ चल रहे थे | हम सब धीरे...
kumarendra singh sengar
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सावन का मौसम अपने आपमें अनेक तरह की रागात्मक क्रियाएं छिपाए रहता है. रक्षाबंधन का पावन पर्व, पेड़ों पर डाले गए झूले, उनमें पेंग भरते हर उम्र के लोग, गीत गाते हुए महिलाओं का झूलों के सहारे आसमान को धरती पर उतार लाने की कोशिश. सामान्य बातचीत में जब भी सावन का जिक्र हो...
शिवम् मिश्रा
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प्रीतिलता वादेदार (बांग्ला : প্রীতিলতা ওয়াদ্দেদার) (5 मई 1911 – 23 सितम्बर 1932) भारतीय स्वतंत्रता संगाम की महान क्रान्तिकारिणी थीं। वे एक मेधावी छात्रा तथा निर्भीक लेखिका भी थी। वे निडर होकर लेख लिखती थी। परिचय प्रीतिलता वादेदार का जन्म 5 म...
sanjiv verma salil
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नव गीत: झुलस रहा गाँव..... ...*झुलस रहा गाँवघाम में झुलस रहा...*राजनीति बैर की उगा रही फसल.मेहनती युवाओं की खो गयी नसल..माटी मोल बिक रहा बजार में असल.शान से सजा माल में नक़ल..गाँव शहर से कहोकहाँ अलग रहा?झुलस रहा गाँवघाम में झुलस रहा...*एक दूसरे की लगे जेब काटने.रेवड...
शिवम् मिश्रा
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प्रीतिलता वादेदार (बांग्ला : প্রীতিলতা ওয়াদ্দেদার) (5 मई 1911 – 23 सितम्बर 1932) भारतीय स्वतंत्रता संगाम की महान क्रान्तिकारिणी थीं। वे एक मेधावी छात्रा तथा निर्भीक लेखिका भी थी। वे निडर होकर लेख लिखती थी।परिचयप्रीतिलता वादेदार का जन्म 5 मई 1911 को तत्काली...
Tejas Poonia
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दिल्ली के नजदीक चकाचौंध से भरपूर शहर गुडगाँव जो कभी साधारण गाँव हुआ करता था फिर इस पर भी कुछ लोगों की नजर पड़ी और यह औद्योगिक नगरी में बदलता गया । हरियाणा राज्य का यह प्रांत कभी खेती के नाम पर सोना उगलता था जहाँ आज खेतों की जगह कंक्रीट के जंगल बिछे पड़े हैं । उसी जगह...