ब्लॉगसेतु

Sanjay  Grover
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ग़ज़लमेरी आवारग़ी को समझेंगे-लोग जब ज़िंदग़ी को समझेंगेगिरनेवालों पे मत हंसो लोगोजो गिरेंगे वही तो संभलेंगेऐसी शोहरत तुम्हे मुबारक़ हो-हमने कब तुमसे कहा! हम लेंगे!जब भी हिम्मत की ज़रुरत होगीएक कोने में जाके रो लेंगे क्यूं ख़ुदा सामने नहीं आताजब मिलेगा, उसीसे प...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लये तो हारा हुआ घराना हैइस ज़माने को क्या हराना हैये तो बचपन से मैंने देखा हैये ज़माना भी क्या ज़माना हैवक़्त से दोस्ती करो कैसेवक़्त का क्या कोई ठिकाना हैसच का हुलिया ज़रा बयान करोसच को सच से मुझे मिलाना हैसचके बारे में झूठ क्या बोलूंसच भी झूठों के काम आना हैसचसे ब...
Kajal Kumar
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Sanjay  Grover
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गज़लहाथ आई हयात कुछ भी नहींबात यूं है कि बात कुछ भी नहीं                                                        11-01-201...
Sanjay  Grover
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ग़ज़ल created by Sanjay Groverसच में या अफ़साने मेंमंटो पागलखाने मेंमंटो, तेरे और मेरेहै क्या फ़र्क़ ज़माने मेंसच लोगों को भाता हैंसिर्फ़ रहे जब गाने मेंझूठ को मैंने खोया हैअपने सच को पाने मेंहर पगले का नाम लिखासच के दाने-दाने में-संजय ग्रोवर02-10-2018
Sanjay  Grover
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ग़ज़लजब खुल गई पहेली, तो है समझना आसांसच बोलना है मुश्क़िल, लेकिन है गाना आसां पहले तो झूठ बोलो, ख़ुद रास्ता बनाओफिर दूसरों को सच का रस्ता बताना आसांवैसे तो बेईमानी .. में हम हैं पूरे डूबेमाइक हो गर मुख़ातिब, बातें बनाना आसांजो तुम तलक है पहुंचा, उन तक भी पहुंच...
Sanjay  Grover
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photo by Sanjay Groverग़ज़लभीड़, तन्हा को जब डराती हैमेरी तो हंसी छूट जाती हैसब ग़लत हैं तो हम सही क्यों होंभीड़ को ऐसी अदा भाती हैदिन में इस फ़िक़्र में हूं जागा हुआरात में नींद नहीं आती हैभीड़, तन्हा से करती है नफ़रतऔर हक़ प्यार पे जताती हैएक मुर्दा कहीं से ले आओभीड़ तो पी...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लराज़ खुल जाने के डर में कभी रहा ही नहींकिसीसे, बात छुपाओ, कभी कहा ही नहींमैंने वो बात कही भीड़ जिससे डरती हैये कोई जुर्म है कि भीड़ से डरा ही नहीं !जितना ख़ुश होता हूं मैं सच्ची बात को कहकेउतना ख़ुश और किसी बात पर हुआ ही नहींकिसीने ज़ात से जोड़ा, किसीने मज़हब से...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लया तो बेईमानी-भरी दुनिया से मैं कट जाऊंया कि ईमान के चक्कर में ख़ुद निपट जाऊंतुम तो चाहते हो सभी माफ़िया में शामिल होंतुम तो चाहोगे मैं अपनी बात से पलट जाऊं न मैं सौदा हूं ना दलाल न ऊपरवालालोग क्यों चाहते हैं उनसे मैं भी पट जाऊं मेरे अकेलेपन को मौक़ा मत समझ...