ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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रवीन्द्र  सिंह  यादव
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गाँव की चौपाल पर अलाव सामयिक चर्चा का फैलाव बिषयों का तीव्र बहाव मुद्दों पर सहमति-बिलगाव। बुज़ुर्ग दद्दू और पोते के बीच संवाद -दद्दू : *****मुहल्ले से        रमुआ ***** को बुला  लइओ ,        ...
Sanjay  Grover
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कोई पांच-एक साल पहले की बात है एक व्यक्ति के बयान पर तथाकथित हंगामा खड़ा हो गया। उस व्यक्ति का नाम मैंने पहली बार उसी दिन सुना था। शहर भी छोटा ही था जहां बिना मतलब कोई आता-जाता नहीं है। इधर मेरे कॉमन सेंस ने मेरे लिए समस्या पैदा कर दी, हमेशा ही करता है। मैंने सोचा क...
PRABHAT KUMAR
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अरे भाई गाली देने से पहचान होती है?बचपन से आज तक किसी को गालियां नहीं दी। किसी को साला तक नहीं कहा। शब्द निकलते ही नहीं मानो। हां बचपन में हम भाई बहन कुत्ता और कुत्ती शब्द का इस्तेमाल जरूर कर लेते थे। गालियां देता नहीं था लेकिन जब किसी के द्वारा मुझे गालियां मिलती...
जन्मेजय तिवारी
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              साधो, दिल को आघात पहुँचाने वाली एक घटना अभी हाल ही में घटित हुई है । सोशल मीडिया पर यदि यह वायरल न हुई होती, तो शायद ही कोई जान पाता इस घटना के बारे में । अखबारों में वैसे भी ऐसी घटनाओं के लिए जगह नहीं होती । हा...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )https://www.facebook.com/narendra.parihar.186/posts/578412792306769https://www.facebook.com/narendra.parihar.186/posts/578412855640096
विजय राजबली माथुर
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http://jagadishwarchaturvedi.blogspot.in/2015/11/blog-post_16.html****" कम से कम आरएसएस ने अभी तक दयानन्द सरस्वती जैसा कोई महान् हिन्दू पैदा नहीं किया है ! देश में महान हिन्दू और महान भारतीय होने का गौरव दयानन्द सरस्वती को हासिल है"http://jagadishwarchatu...
anup sethi
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जीते जी मरण मेरा भेजा फिर गएला है मेरे बाप। मेरे कू किधर का नईं छोड़ा ए लोग। मयैं बौह्त अकेली रह गई रे। मेरी पुच्‍छल पकड़ के सुर्ग जाने की बात करते, पन मयैं किधर जाऊं ? दिल्‍ली के पछुआड़े के एक गांव में मेरे ऊपर ऐसा जुर्म कर डाला! मेरा नाम ले के एक भला माणुस मार डा...
Shachinder Arya
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वह लोग एक ऐसे समय में जी रहे थे, जहाँ इस शहर के अलावे कहीं किताब लिखने वाले नहीं बचे थे। जिसे आना था, जिसे छपना था, उसे इस राजधानी आना पड़ता। यह मजबूरी कम सुविधा अधिक थी। यह उन सबका संगठित प्रयास था, जो लेखकों को यहाँ अपने आप खींच लाता। कोई भी होता उसे पिताजी मार्ग...
Kajal Kumar
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