ब्लॉगसेतु

डा. सुशील कुमार जोशी
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लिखना जरूरी है तरन्नुम में मगर ठगे जाने का सारा बही खाता हिसाब कौन जानता है सुर मिले और बन पड़े गीत एक धुप्पल में कभी यही बकवास आज ही के दिन हर साल ठुमुकता चला आता है पुराने कुछ सूखे हुऐ घाव कुरेदने फिर एक बार ये अहसासभूला जाता है ताजिंदगी ठगना खुदा तक को&...
jaikrishnarai tushar
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चित्र-गूगल से साभारएक गीत-परदेसी केसर का एक फूल लानापरदेसीकेसर काएक फूल लाना ।धरती कीज़न्नत कोनज़र से बचाना ।शतदल कीगंध उठेमीठी डल झील से,पदमा सचदेवलिखेंकविता तफ़सील से,बंजारेघाटी केबाँसुरी बजाना ।हाथ मेंतिरंगा लेनीलगगन उड़ना,आतंकीआँधी सेले त्रिशूल लड़ना,बर्फ़ानी बाबाहरआ...
jaikrishnarai tushar
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विश्व नेता -माननीय मोदी जी कश्मीर  पर भारत सरकार द्वारा लिया गया निर्णय बहुत ही सराहनीय है, लेकिन विपक्ष के कुछ सांसद अपने ही देश के ख़िलाफ़ बयान देकर राष्ट्र की अस्मिता से खिलवाड़ ही नहीं सही मायने में राष्ट्रद्रोह कर रहे हैं । सरकार के साहसिक निर्णय के साथ...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : बाल कथा बालगीत बालकथा
jaikrishnarai tushar
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एक गीत -अब बारूदी गन्ध न महके अब बारूदी गन्ध न महके खुलकर हँसे चिनार |हवा डोगरी में लिख जाये इलू -इलू या प्यार |जलपरियाँ लहरों से खेलें गयीं जो कोसों-मील ,फिर कल्हण की राजतारंगिणी गायेगी डल झील ,नर्म उँगलियाँ छेड़ें...
sanjiv verma salil
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ॐ पुरोवाक आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*विश्ववाणी हिंदी का साहित्य सृजन विशेषकर छांदस साहित्य इस समय संक्रमण काल से गुजर रहा है। किसी समय कहा गया था -  सूर सूर तुलसी ससी, उडुगन केसवदास अब के कवि खद्योत सम जहँ-तहँ करात प्रकास जिन्हें '...
 पोस्ट लेवल : गीतिका आकुल पुरोवाक
sanjiv verma salil
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बाल गीत:बरसे पानीसंजीव 'सलिल'*रिमझिम रिमझिम बरसे पानी.आओ, हम कर लें मनमानी.बड़े नासमझ कहते हमसेमत भीगो यह है नादानी.वे क्या जानें बहुतई अच्छालगे खेलना हमको पानी.छाते में छिप नाव बहा ले.जब तक देख बुलाये नानी.कितनी सुन्दर धरा लग रही,जैसे ओढ़े चूनर धानी.काश कहीं झूला...
 पोस्ट लेवल : varsha वर्षा bal geet बालगीत
sanjiv verma salil
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नवगीत:आओ! तम से लड़ें...संजीव 'सलिल'*आओ! तम से लड़ें,उजाला लायें जग में...***माटी माता,कोख दीप है.मेहनत मुक्ताकोख सीप है.गुरु कुम्हार है,शिष्य कोशिशें-आशा खूनखौलता रग में.आओ! रचते रहेंगीत फिर गायें जग में.आओ! तम से लड़ें,उजाला लायें जग में...***आखर ढाईपढ़े न अब तक.अ...
 पोस्ट लेवल : नवगीत navgeet
sanjiv verma salil
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नवगीत :संजीव *संसद की दीवार पर दलबन्दी की धूल राजनीति की पौध परअहंकार के शूल*राष्ट्रीय सरकार कीहै सचमुच दरकारस्वार्थ नदी में लोभ कीनाव बिना पतवारहिचकोले कहती विवशनाव दूर है कूललोकतंत्र की हिलातेहाय! पहरुए चूल*गोली खा, सिर कटाकरतोड़े थे कानूनक्या सोचा...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : बाल कथा बालगीत बालकथा