ब्लॉगसेतु

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--कर्णधारों की कुटिलता देखकर,देश का दूषित हुआ वातावरण।सभ्यता, शालीनता के गाँव में,खो गया जाने कहाँ है आचरण?--सुर हुए गायब, मृदुल शुभगान में,गन्ध है अपमान की, सम्मान में,आब खोता जा रहा अन्तःकरण।खो गया जाने कहाँ है आचरण?--शब्द अपनी प्राञ्जलता खो र...
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--सवाल पर सवाल हैं, कुछ नहीं जवाब है।राख में दबी हुई, हमारे दिल की आग है।।--गीत भी डरे हुए, ताल-लय उदास हैं.पात भी झरे हुए, शेष चन्द श्वास हैं,दो नयन में पल रहा, नग़मग़ी सा ख्वाब है।राख में दबी हुई, हमारे दिल की आग है।।--ज़िन...
 पोस्ट लेवल : पथ नहीं सरल यहाँ गीत
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--कर रही हूँ प्रभू से यही प्रार्थना।ज़िन्दगी भर सलामत रहो साजना।।--चन्द्रमा की कला की तरह तुम बढ़ो,उन्नति की सदा सीढ़ियाँ तुम चढ़ो,आपकी सहचरी की यही कामना।-- ज़िन्दगी भर सलामत रहो साजना।।आभा-शोभा तुम्हारी दमकती रहे,मेरे माथे पे बिन्दिया चमकती रहे,मुझपे रखना पि...
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थक गईं नजरें तुम्हारे दर्शनों की आस में।आ भी आओ चन्द्रमा तारों भरे आकाश में।।चमकते लाखों सितारें किन्तु तुम जैसे कहाँ,साँवरे के बिन कहाँ अटखेलियाँ और मस्तियाँ,गोपियाँ तो लुट गईं है कृष्ण के विश्वास में।आ भी आओ चन्द्रमा तारों भरे आकाश में।।आ गया मौसम गुलाबी, मह...
 पोस्ट लेवल : गीत करवाचौथ पर
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--आशा और निराशा की जो,पढ़ लेते हैं सारी भाषा।दो नयनों में ही होती हैं,दुनिया की पूरी परिभाषा।।--दुख के बादल आते ही ये,खारे जल को हैं बरसाते।सुख का जब अनुभव होता है,तब ये फूले नहीं समाते।सरल बहुत हैं-चंचल भी हैं,इनके भीतर भरी पिपासा।दो नयनों में ही होती है...
अरुण कुमार निगम
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"तब के गीत और अब के गीत"मित्रों का सहमत होना जरूरी नहीं है किंतु मेरा मानना यह है किश्वेत-श्याम फिल्मों के दौर में जिंदगी के रंगों को सिनेमा के पर्दे पर सजीव करने के लिए गायक, गीतकार, संगीतकार, निर्देशक और कलाकार बेहद परिश्रम करते थे। परिश्रम का यह रंग ही श्वेत-श्य...
sanjiv verma salil
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एक रचना*महरी पर गड़तीगृद्ध-दृष्टि साहो रहा पर्यावरण*दोष अपना और पर मढ़सभी परिभाषा गलत पढ़जिस तरह हो सीढ़ियाँ चढ़  देहरी के दूरमिट्टी गंदगी साकर रहे हैं आचरण*हवस के बनकर पुजारीआरती तन की उतारीदियति अपनी खुद बिगाड़ीचीयर डालाअसुर बनकरमाँ धरा का...
 पोस्ट लेवल : नवगीत navgeet
sanjiv verma salil
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गीत:आराम चाहिए...संजीव 'सलिल'*हम भारत के जन-प्रतिनिधि हैंहमको हर आराम चाहिए.....*प्रजातंत्र के बादशाह हम,शाहों में भी शहंशाह हम.दुष्कर्मों से काले चेहरेकरते खुद पर वाह-वाह हम.सेवा तज मेवा के पीछे-दौड़ें, ऊँचा दाम चाहिए.हम भारत के जन-प्रतिनिधि हैंहमको हर आराम चाहिए....
 पोस्ट लेवल : आराम चाहिए... गीत
sanjiv verma salil
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दोहा गीत-बंद बाँसुरी*बंद बाँसुरी चैन की,आफत में है जान।माया-ममता घेरकर,लिए ले रही जान।।*मंदिर-मस्जिद ने किया, प्रभु जी! बंटाधारयह खुश तो नाराज वह, कैसे पाऊँ पार?सर पर खड़ा चुनाव है,करते तंग किसान*पप्पू कहकर उड़ाया, जिसका खूब मजाकदिन-दिन जमती जा रही, उसकी भी अब धाकरोह...
 पोस्ट लेवल : दोहा गीत बंद बाँसुरी
sanjiv verma salil
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एक गीत -एक पैरोडी*ये रातें, ये मौसम, नदी का किनारा, ये चंचल हवा ३१कहा दो दिलों ने, कि मिलकर कभी हम ना होंगे जुदा ३०*ये क्या बात है, आज की चाँदनी में २१कि हम खो गये, प्यार की रागनी में २१ये बाँहों में बाँहें, ये बहकी निगाहें २३लो आने लगा जिंदगी का मज़ा १९*सितारों की...
 पोस्ट लेवल : एक गीत -एक पैरोडी