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ऋता शेखर 'मधु'
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गीत जाना जीवन पथ पर चलकरलगता नया नया हर पल हैधरती पर आँखें जब खोलींनया लगा माँ का आलिंगननयी हवा में नयी धूप मेंनये नये रिश्तों का बंधनशुभ्र गगन में श्वेत चन्द्रमालगता बालक सा निश्छल हैनया लगा फूलों का खिलनालगा नया उनका झर जानामौसम की आवाजाही मेंफिर से बगिया का भर ज...
 पोस्ट लेवल : गीत सभी रचनाएँ
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : बालगीत
ऋता शेखर 'मधु'
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सबको राह दिखाने वालेहे सूर्य! तुझको नमननित्य भोर नारंगी धारआसमान पर छा जातेखग मृग दृग को सोहेऐसा रूप दिखा जातेआरती मन्त्र ध्वनि गूँजेतम का हो जाता शमनहर मौसम की बात अलगशरद शीतल और जेठ प्रचंडभिन्न भिन्न हैं ताप तुम्हारेपर सृष्टि में रहे अखंडउज्ज्वलता के घेरे मेंनिरा...
 पोस्ट लेवल : कविता गीत सभी रचनाएँ
रविशंकर श्रीवास्तव
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शिवम् मिश्रा
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 हमारे देश में कई स्थानों पर आज जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है. कई अन्य स्थानों पर कल मनेगी कृष्ण के जन्म की अष्टमी...कृष्ण हमारी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ हैं. हमारा दिन, हमारी शाम, हमारे पर्व,  हमारा खान पान, हमारी परंपरायें ..कौन सी शाखा...
डा. सुशील कुमार जोशी
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लिखना जरूरी है तरन्नुम में मगर ठगे जाने का सारा बही खाता हिसाब कौन जानता है सुर मिले और बन पड़े गीत एक धुप्पल में कभी यही बकवास आज ही के दिन हर साल ठुमुकता चला आता है पुराने कुछ सूखे हुऐ घाव कुरेदने फिर एक बार ये अहसासभूला जाता है ताजिंदगी ठगना खुदा तक को&...
jaikrishnarai tushar
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चित्र-गूगल से साभारएक गीत-परदेसी केसर का एक फूल लानापरदेसीकेसर काएक फूल लाना ।धरती कीज़न्नत कोनज़र से बचाना ।शतदल कीगंध उठेमीठी डल झील से,पदमा सचदेवलिखेंकविता तफ़सील से,बंजारेघाटी केबाँसुरी बजाना ।हाथ मेंतिरंगा लेनीलगगन उड़ना,आतंकीआँधी सेले त्रिशूल लड़ना,बर्फ़ानी बाबाहरआ...
jaikrishnarai tushar
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विश्व नेता -माननीय मोदी जी कश्मीर  पर भारत सरकार द्वारा लिया गया निर्णय बहुत ही सराहनीय है, लेकिन विपक्ष के कुछ सांसद अपने ही देश के ख़िलाफ़ बयान देकर राष्ट्र की अस्मिता से खिलवाड़ ही नहीं सही मायने में राष्ट्रद्रोह कर रहे हैं । सरकार के साहसिक निर्णय के साथ...
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : बाल कथा बालगीत बालकथा
jaikrishnarai tushar
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एक गीत -अब बारूदी गन्ध न महके अब बारूदी गन्ध न महके खुलकर हँसे चिनार |हवा डोगरी में लिख जाये इलू -इलू या प्यार |जलपरियाँ लहरों से खेलें गयीं जो कोसों-मील ,फिर कल्हण की राजतारंगिणी गायेगी डल झील ,नर्म उँगलियाँ छेड़ें...