ब्लॉगसेतु

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--सुबह होगी तो सूरज निकल जायेगावक्त के साथ सब कुछ बदल जायेगा--जिन्दगी में कभी हार मत माननाधूप में बर्फ सारा पिघल जायेगा--दिल की कोटर में भी तो जलाओ दियादेखकर रौशनी मनल मचल जायेगा --पोथियाँ तो जगत की पढ़ो प्यार सेदम्भ का आशियाँ खुद दहल जायेगा--जूझ...
sanjiv verma salil
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एक रचना *श्वास श्वास समिधा है आस-आस वेदिका *अधरों की स्मित के पीछे है दर्द भी नयनों में शोले हैं गरम-तप्त, सर्द भी रौनकमय चेहरे से पोंछी है गर्द भी त्रास-त्रास कोशिश है हास-हास साधिका *नवगीती बन्नक है जनगीति मन्नत मेहनत की माटी में सीकर मिल जन्नत करना है मंज़िल को ध...
sanjiv verma salil
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ॐ पुरोवाक आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*विश्ववाणी हिंदी का साहित्य सृजन विशेषकर छांदस साहित्य इस समय संक्रमण काल से गुजर रहा है। किसी समय कहा गया था -  सूर सूर तुलसी ससी, उडुगन केसवदास अब के कवि खद्योत सम जहँ-तहँ करात प्रकास जिन्हें '...
 पोस्ट लेवल : गीतिका आकुल पुरोवाक
sanjiv verma salil
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हरिगीतिका सलिलासंजीव*(छंद विधान: १ १ २ १ २ x ४, पदांत लघु गुरु, चौकल पर जगण निषिद्ध, तुक दो-दो चरणों पर, यति १६-१२ या १४-१४ या ७-७-७-७ पर)*कण जोड़ती, तृण तोड़ती, पथ मोड़ती, अभियांत्रिकीबढ़ती चले, चढ़ती चले, गढ़ती चले, अभियांत्रिकीउगती रहे, पलती रहे, खिलती रहे, अभियांत्रि...
 पोस्ट लेवल : हरिगीतिका छंद harigitika chhand
ऋता शेखर 'मधु'
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रजनी छंद गीतिकाइस जगत में जो सभी से प्रेम करता हैवह तपिश में चाँदनी बनकर उतरता हैईश से जो भी मिले स्वीकार कर लेनाआसरा के साथ ही विश्वास रहता हैकोंपलें उगती वहीं झरते जहाँ पत्तेरात के ही गर्भ से सूरज निकलता हैहो समर्पण भाव हरसिंगार के जैसादेखना कैसे वहाँ पर प्यार पल...
 पोस्ट लेवल : गीतिका कविता गंज़ल
sanjiv verma salil
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अभियांत्रिकी हरिगीतिका सलिला संजीव *(छंद विधान: १ १ २ १ २ x ४, पदांत लघु गुरु, चौकल पर जगण निषिद्ध, तुक दो-दो चरणों पर, यति १६-१२ या १४-१४ या ७-७-७-७ पर) *कण जोड़ती, तृण तोड़ती, पथ मोड़ती, अभियांत्रिकी बढ़ती चले, चढ़ती चले, गढ़ती चले, अभियांत्रिकी उगती रहे, पलती रहे, खिल...
ऋता शेखर 'मधु'
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करती समर्पित काव्य उनको, देश हित में जो डटे|वे वेदना सहते विरह की, संगिनी से हैं कटे ||दिल में बसा के प्रेम तेरा, हर घड़ी वह राह तके|लाली अरुण या अस्त की हो, नैन उसके नहिं थके||जब देश की सीमा पुकारे, दूर हो सरहद कहीं|इतना समझ लो प्यार उसका, राह का बाधक नहीं||तुम हो...
 पोस्ट लेवल : छंद हरिगीतिका
ऋता शेखर 'मधु'
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नौका समय की जब बनी वो, अनवरत बहने लगी |मासूम बचपन की कहानी, प्यार से कहने लगी ||कोमल घरौंदे रेत के वो, टूटकर बिखरे रहे |हम तो वहीं पर आस बनकर, पुष्प में निखरे रहे ||1||तरुणी परी बन खिलखिलाई, चूड़ियों में आ बसी |अनुराग की वो प्रीत बनकर, रागिनी में जा बसी ||वो बंसरी...
 पोस्ट लेवल : छंद हरिगीतिका
sanjiv verma salil
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मुक्तक .संवेदना की सघनता वरदान है, अभिशाप भी.अ&#2...
sanjiv verma salil
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छंद सलिला:गीतिका छंद *छंद लक्षण: प्रति पद २६ मात्रा, यति १४-१२, पदांत लघु गुरुलक्षण छंद:लोक-राशि गति-यति भू-नभ , साथ-साथ ही रहतेलघु-गुरु गहकर हाथ- अंत , गीतिका छंद कहतेउदाहरण:१. चौपालों में सूनापन , खेत-मेड में झगड़ेउनकी जय-जय होती जो , धन-बल में हैं तगड़ेखोट न...