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ऋता शेखर 'मधु'
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दोहा गीतिकारंग बिरंगे पुष्प हैं, बगिया के आधार।मिलजुल कर मानव रहें, सुन्दर हो संसार।।तरह तरह की बोलियाँ, तरह तरह के लोग।मन सबका है एक सा, सुखद यही है सार।।मंदिर में हैं घण्टियाँ, पड़ता कहीं अजान।धर्म मज़हब कभी कहाँ, बना यहाँ दीवार।।दान पुण्य  से है धनी, अपना भार...
 पोस्ट लेवल : गीतिका छंद दोहा
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--फूल हो गये ज़ुदा, शूल मीत बन गयेभाव हो गये ख़ुदा, बोल गीत बन गये--काफ़िला बना नहीं, पथ कभी मिला नहींवर्तमान थे कभी, अब अतीत बन गये--देह थी नवल-नवल, पंक में खिला कमलतोतली ज़ुबान की, बातचीत बन गये--सभ्यता के फेर में, गन्दगी के ढेर मेंमज़हबों की...
भावना  तिवारी
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प्रधान मंत्री मोदी जी की कविता की पंक्ति से प्रेरणा पा लिखी गीतिका।(मापनी:- 12222  122)अभी तो सूरज उगा है,सवेरा यह कुछ नया है।प्रखरतर यह भानु होता ,गगन में बढ़ अब चला है।अभी तक जो नींद में थे,जगा उन सब को दिया है।सभी का विश्वास ले के,प्रगति पथ पर चल पड़ा है।तमस...
 पोस्ट लेवल : गीतिका
sanjiv verma salil
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मुक्तकछंद- हरिगीतिका संजीव .सम वेदना की सघनता वरदान है, अभिशाप भी.अनुभूति की अभिव्यक्ति है, चीत्कार भी, आलाप भी.निष्काम हो या कामकारित, कर्म केवल कर्म है-पुण्य होता आज जो, होता वही कल पाप है...४-१२-२०१७ http://divyanarmada.blogspot.in/
ऋता शेखर 'मधु'
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सभी मित्रों को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ| मेरे इस गीत को फेसबुक के एक बड़े उत्कृष्ट समूह में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है|एकल काव्य पाठ मंच का दशकोत्सव समारोह सम्पन्न -*****^*****^****^****^****^****^****^****^****एकल काव्य-पाठ -एक साहित्यिक मंच द्वारा दस द...
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--धरा सुसज्जित होती जिनसे, वो ही वृक्ष कहाते हैं, जो गौरव और मान बढ़ाते, वो ही दक्ष कहाते हैं। -- हरित क्रान्ति के संवाहक, ये जन,गण के रखवाले, प्राण प्रवाहित करने वाली, मन्द समीर बहाते हैं। -- पत्ते, फूल, मूल, फल जिनके, जीवन देने वाले हैं, देते है...
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--चौमासे में श्याम घटा, जब आसमान पर छाती है।आजादी के उत्सव की, वो हमको याद दिलाती है।।--देख फुहारों को उगते हैं, अब तो अन्तस में अक्षर,इनसे ही कुछ शब्द बनाकर, तुकबन्दी हो जाती है।--खुली हवा में साँस ले रहे, हम जिनके बलिदानों से,उन वीरों की गौरवगाथा, मन में जोश...
अविनाश वाचस्पति
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समर्पयामि रामोत्सव (अथ किन्नर कथासंवाद ५) में तीन दिवसीय प्रस्तुति में प्रथम दिवस  ग़ज़ल गायक मिथलेश लखनवी, द्वितीय दिवस साहित्य भूषण देवकीनन्दन शान्त जी ने स्वलिखित हरदौल चरित प्रस्तुत किया, तृतीय दिवस बाराबंकी से उभरती हुई गायक सुश्री अदिति वर्मा ने रा...
sanjiv verma salil
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हरिगीतिका सलिलासंजीव*(छंद विधान: १ १ २ १ २ x ४, पदांत लघु गुरु, चौकल पर जगण निषिद्ध, तुक दो-दो चरणों पर, यति १६-१२ या १४-१४ या ७-७-७-७ पर)*कण जोड़ती, तृण तोड़ती, पथ मोड़ती, अभियांत्रिकीबढ़ती चले, चढ़ती चले, गढ़ती चले, अभियांत्रिकीउगती रहे, पलती रहे, खिलती रहे, अभियांत्रि...
sanjiv verma salil
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हरिगीतिका सलिलाअभियांत्रिकी, तकनीक, भारत, अभियानसंजीव*(छंद विधान: १ १ २ १ २ x ४, पदांत लघु गुरु, चौकल पर जगण निषिद्ध, तुक दो-दो चरणों पर, यति १६-१२ या १४-१४ या ७-७-७-७ पर)*कण जोड़ती, तृण तोड़ती, पथ मोड़ती, अभियांत्रिकीबढ़ती चले, चढ़ती चले, गढ़ती चले, अभियांत्रि...