गीत:हारे हैं...संजीव 'सलिल'*कौन किसे कैसे समझाएसब निज मन से हारे हैं?.....*इच्छाओं की कठपुतली हमबेबस नाच दिखाते हैं.उस पर भी तुर्रा यह खुद कोतीसमारखाँ पाते हैं.रास न आये सच कबीर काहम बुदबुद गुब्बारे हैं...*बिजली के जिन तारों सेटकरा पंछी मर जाते हैं.हम नादां उनसे बि...
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