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sanjiv verma salil
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गीत भक्तों से सावधान*जो दुश्मन देश के, निश्चय ही हारेंगेदिख रहे विरोधी जो वे भी ना मारेंगेजो तटस्थ-गुरुजन हैं, वे ही तो तारेंगेमुट्ठी में कब किसके, बँधता है आसमानभक्तों से सावधान*देशभक्ति नारा है, आडंबर प्यारा हैसेना का शौर्य भी स्वार्थों पर वारा हैमनमानी व्या...
 पोस्ट लेवल : गीत भक्तों से सावधान
अनीता सैनी
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खिल उठेगा आँचल धरा का, मानव मन अब अवसाद न कर, चहुओर प्रेम पुष्प खिलेंगें समय साथ है आशा तू धर।  पतझर पात विटप से झड़ते, बसँत नवाँकुर खिल आएगा, खुशहाली भारत में होगी  गुलमोहर-सा खिल जाएगा, बितेगा फिर समय ये भारी,  संय...
sanjiv verma salil
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एक रचना : साथ मोदी के*कर्ता करता है सही, मानव जाने सत्यकोरोना का काय को रोना कर निज कृत्यकोरो ना मोशाय जी, गुपचुप अपना कामजो डरता मरता वही, काम छोड़ नाकामभीत न किंचित् हों रहें, घर के अंदर शांतमदद करें सरकार की, तनिक नहीं हों भ्रांतबिना जरूरत क्रय करें, नहीं अधिक स...
 पोस्ट लेवल : कोरोना मोदी गीत
sanjiv verma salil
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नवगीत*पीर ने पूछेंदोस दै रयेकाय निकल रय?कै तो दई 'घर बैठो भइया'दवा गरीबी की कछु नइयाढो लाये कछु कौन बिदेस सेंहम भोगें कोरोना दइयारोजी-रोटी गईराम रे! हांत सें    तोते उड़ रयदो बचो-बचाओ खाओफिर उधार सें काम चलाओदो दिन भूखे बैठ बिता लएजान बचाने, गाँव...
 पोस्ट लेवल : कोरोना नवगीत
sanjiv verma salil
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नवगीत:*गरियाए बिनहजम न होताखाना, किसको कोसें?.वैचारिक प्रतिबद्ध भौत हमजो न साथ हो, करें फौत हमझूठ - हकीकत क्या?क्यों सोचें?स्वार्थ जियें, सर्वार्थ-मौत हमजुतियाए बिननींद न आतीबैर हमेसा पोसें.संसद हो या टी. व्ही. चरचाजन-धन का लाखों हो खरचानकल मार  याधमकी दे...
 पोस्ट लेवल : नवगीत : bhasha geet
sanjiv verma salil
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मतदाता विवेकाधिकार मंच*त्रिपदिक छंद हाइकुविषय: पलाशविधा: गीत*लोकतंत्र का / निकट महापर्व / हावी है तंत्र*मूक है लोक / मुखर राजनीति / यही है शोकपूछे पलाश / जनता क्यों हताश / कहाँ आलोक?सत्ता की चाह / पाले हरेक नेता / दलों का यंत्र*योगी बेहाल / साइकिल है पंचर / हाथी बे...
 पोस्ट लेवल : पलाश हाइकु गीत नोटा
sanjiv verma salil
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एक रचना-परिवर्तन*करें भिखारी भीड़ बढ़ाकरआरक्षण की माँगअगर न दे सरकार तोड़ देंकानूनों की टाँग*पढ़े-लिखे हम, सुख समृद्धि भीपाई है भरपूरअकल-अजीर्ण हो गया, सारीसमझ गयी है दूरस्वार्थ-साधने खापों मेंफैसले किये अंधेरहें न रहने देंगे सुख सेकर गोरखधंधेअगड़े होकर भी करते हैंपिछड़ो...
 पोस्ट लेवल : गीत - आरक्षण
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--सहमी कलियाँ आज चमन में।सन्नाटा है आज वतन में।।--द्वार कामना से संचित है,हृदय भावना से वंचित है,प्यार वासना से रंजित है,कैसे फूल खिलें उपवन में?सन्नाटा है आज वतन में।।--सूरज शीतलता बरसाता,चन्दा अगन लगाता जाता,पागल षटपद शोर मचाता,धूमिल तारे नीलगगन में।सन्नाटा है आज...
अनीता सैनी
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प्रीत व्यग्र हो कहे राधिका, घूँघट ओट याद हर्षाती ।मुँह फेरुँ तो मिले कान्हाई, जीवन मझधारे तरसाती ।।साँझ-विहान गुँजे अभिलाषा, मनमोहिनी- मिलन को आयी। प्रिये की छवि उतरी नयन में, अश्रुमाला गिर हिय समायी। जलती पीड़ा दीप माल-सी,  ...
अनीता सैनी
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पी प्रीत में कान्हा से कहे राधिका, घूँघट ओढ़े  याद हर्षाया करती है, मुँह फेरुँ राह में मिले मनमौजन-सी, जीवन मझधार में रुलाया करती है।  साँझ-सवेरे गुँजित डोले अभिलाषा, मनमोहिनी मिलने मुझसे आयी, परछाई प्रिये की  उतरी नयनन में,&n...