ब्लॉगसेतु

ललित शर्मा
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नमस्‍कार , 15 अगस्‍त 1947 को हमारे देश को स्वतंत्रता (आज़ादी).. मिली थी , अब कुछ भले ही कह दें कि आज़ादी नहीं, सत्ता के हस्तांतरण की संधि थी वो ,यह कैसी स्वतंत्रता ? पर इसे मानना मुश्किल है , अब देखिए कैसा था  स्वतंत्रता दिवस तब .........और अब........ &nbs...
ललित शर्मा
72
 नमस्‍कार ..आजादी का 65वां स्वतंत्रता दिवस आने पर हमारा मन गदगद हो उठा। पिछले साल हमने 65वां स्वतंत्रता  दिवस मनाया था और अब वह दिन दूर नहीं जब देश को आजाद हुए 100 वर्ष पूरे हो जायेंगे। अब आजाद हुए  हिन्दुस्तान को 100 वर्ष पूरे होने में मात्र 35 वर्ष...
अरुण कुमार निगम
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सब सूतत हें उन जागत हें, जाड़ - घाम मा मुचमुचावत हेंतज दाई ददा भईया भउजी, जाके जंग मा जान गँवावत हेंकोनों किसिम के बिपदा के घड़ी, कोनों गाँव गली कभू आवत हेनदिया – नरवा, डबरी - डोंगरी , कर पार उहाँ अगुवावत हें.बम, बारुद, बंदूक संग खेलैं  ,&nb...
Manoj Kumar
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एक अक्षर भी नहीं गंदा करूंगाश्यामनारायण मिश्रक्रांति के ये गीत चाहे न सुनो,मत कहो कि प्यार से मुझको घृणा है।संवेदना पूरी समर्पित थी कभीइक ज़माना था किसी के प्यार का।एक पल देखे बिना कटता न थामुख सलोना सरल भावुक यार का।और उठती पालकी का आज भीचेतना में चित्र वैसा ही जड...
ललित शर्मा
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आप सबों को संगीता पुरी का नमस्‍कार, कालाधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ योग गुरु बाबा रामदेव के गुरुवार से शुरू होने वाले आंदोलन के लिए रामलीला मैदान में बुधवार को तैयारी पूरी कर ली गई। उनके सहयोगियों को देशभर से हजारों लोगों के दिल्ली में जुटने की उम्मीद है। उनका कहन...
shashi purwar
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 मौसम सुहानाश्रावण का बहाना सावनी तीज मेंरिमझिम रिमझिम सलोनो पे नेह बरसते. चंचल बचपन  रूसना  - मनाना लड़ना - झगड़ना खेलते - हँसते ,मृदुल  मानस पटल पे अंकित मधुर स्नेह के पक्के रिश्ते . बदली बेला की परिपाटीकिय...
 पोस्ट लेवल : छन्दमुक़त गीत
Manoj Kumar
54
मिली नहीं रोटी दो जून कीश्यामनारायण मिश्रज़िंदगी गुज़र गईमस्जिद का द्वार लांघतेरोज़ पांच वक़्त मांगतेमिली नहीं रोटी दो जून की।अब्बा सा खांसता खखारतासुबह सूर्य खोलता मसहरी,जंफर सी फटी-फटी धूपफातिमा सी खीजती दुपहरी।किसी शाम चंदा ने धर दीरोटी  पै  डली  ...
ललित शर्मा
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सभी पाठकों को संगीता पुरी का नमस्‍कार , आज फ्रेंडशिप डे है  , इस दिवस के महात्‍म्‍य पर बहुत कुछ लिखा है ब्‍लॉगरों ने , बिना देर किए आज उनमें से ही कुछ महत्‍वपूर्ण लिंकों पर आपको लिए चलते हैं .....  मित्र दिन मित्र दिन का भारतीय संस्कृति में कितना महत्व ह...
shashi purwar
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बैरी बदराघुमड़ घुमड़आये भावनदेखो झूम के बरस गया सावन .बूंदो को लड़ी बरखा सी झड़ी पवन मतवाली इठला के चली चूमती पर्णों को कर्ण में मिसरी सी घुली !पर्ण के कोरो पेपड़ित बूंदें  जैसेबिखरे धवल मणि .मखमली हरित बिछोनाफूली अमराई कानन मेविशालकाय गिरि पे व्योम नेभीनी चु...
 पोस्ट लेवल : छन्दमुक़त गीत
jaikrishnarai tushar
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लोकप्रिय कवि -कैलाश गौतम समय -[08-01-1944से 09-12-2006]एक गीत -लो पढ़ो यह आज का अखबार बादल आ गए -कैलाश गौतम आ गए  उस पार से इस पार बादल आ गए |लो पढ़ो यह आज का अखबार बादल आ गए |पर्वतों को लाँघते झकझोरते जंगल हवा से खेलते बादल...
 पोस्ट लेवल : गीत /कैलाश गौतम