ब्लॉगसेतु

girish billore
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मैं तो मर कर ही जीतूंगा जीतो तुम तो जीते जीते !**************कितनी रातें और जगूंगा कितने दिन रातों से होंगेकितने शब्द चुभेंगें मुझको, मरहम बस बातों के होंगेबार बार चीरी है छाती, थकन हुई अब सीते सीते !!**************अपना रथ सरपट दौड़ाने तुमने मेरा पथ छीना है.&n...
अन्तर सोहिल
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"नजरों को हर घडी तेरी ही है जुस्तजूआँखों की आज आँखों से होने दो गुफ्तगू"श्री राज भाटिया जी ने जर्मनी से आकर आप सबसे मिलने का कार्यक्रम बनाया है। कुछ मित्र कहते हैं कि कोशिश करेंगें। मेरा उनसे कहना है कि वादा मत कीजिये केवल कोशिश कीजियेगा, क्योंकि वायदे टूट जात...
Krishna Kumar Yadav
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नेहरु जी के जन्म दिवस को 'बाल-दिवस' के रूप में मनाया जाता है. वाकई बाल-मन बड़ा चंचल होता है और बचपन की यादें हमेशा ताजी रहती हैं. आज बाल-दिवस पर बचपन की बातें हो जाएँ-बचपन मेरा कितना प्यारामम्मी-पापा का राजदुलारामाँ की ममता, पापा का प्यारयाद आता है लाड़-दुलार।बचपन म...
अन्तर सोहिल
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श्री राज भाटिया जी आज दिल्ली में हैं और कल सुबह अपने पैतृक घर रोहतक में होंगें। आप सबसे मिलने के लिये श्री राज भाटिया जी ने 21 नवम्बर, रविवार का कार्यक्रम रोहतक में रखा है।  कल की पोस्ट में आपको जगह और पूरा पता बता दिया जायेगा। जो मित्र आज दिल्ली में नुक्कड पर...
Krishna Kumar Yadav
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रात पूछने लगा लाड़ला,मम्मी से यह बात-‘बतलाओ...माँ! चन्दा का क्यों,दिखता आधा गात ?’बोली माँ,‘दे दिया पजामा-करने को कल साफ़।इसीलिए आ गया आज वह,पैंट पहनकर हाफ़।’-जितेन्द्र ‘जौहर’,आई आर - 13/6, रेणुसागर, सोनभद्र (उप्र) 231218.
अन्तर सोहिल
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योगीजन जानता ना कहना जिसका प्रभाव जिसकी कला का पार शारदा ना पाती है नार नारी ब्रह्मवादियों ने भी ना पाया तट रिद्धि-सिद्धि शक्तियां भी नित गुण गाती हैं शंकर समाधि में ढूँढते हैं जिसको श...
Krishna Kumar Yadav
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जंगल में मनी दीवालीचारों तरफ फैली खुशहालीशेर ने पटाखे छुड़ायेलोमड़ी ने दिये जलायेबन्दर करता खूब धमालभालू नाचे अपनी चालहाथी सब खा गया मिठाईगिलहरी ने रोनी सूरत बनाईशेर गरजे पानी बरसेहोती हाथी की ढुंढ़ाईतब तक लोमड़ी मिठाई लाईमिल-बाँट कर सबने खाई।कृष्ण कुमार यादव
Krishna Kumar Yadav
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देखो एक गगन पर तारे,मिलकर रहते कितने सारे नन्हें-मुन्ने प्यारे बच्चों,इनसे मिल कर रहना सीखो अपना लो तारों की आदत,लगने लगोगे सबको प्यारे या फिर शिक्षा फलों से लो,एक बाग़ में खिलते सारे कभी न आपस में लड़ते वो,एक को एक भी न मारे अगर न तुमको हो कुछ आता,तो ले लो औरों से...
 पोस्ट लेवल : संजय भास्कर बाल-गीत
seema sachdeva
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नाना जी की मूँछ जैसे गिलहरी जी की पूंछ अकड़ी रहती हरदम ऐसे जैसे कोई रस्सी गयी हो सूख। नाना जी मूँछों पर अपनी हरदम देते ताव पहलवान जी जैसे कोई जीत गए हों दाँव। कभी दाई मूँछ तो कभी बांई फ़ड़कती कभी ऊपर उठती कभी नीचे गिरती दरोगा की मूँछ भी उनके आगे प...
Ashok kumar
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मेरा आया यौवन,    मेरा घूघंटा उठा दे रे।        मैँ दुल्हन सी लगती हूँ ,            कोई मुझे दुल्हन बना दे रे।।    मुझे नीँद ना आये ,   &nbs...