ब्लॉगसेतु

हिमांशु पाण्डेय
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'मोहरे वही, बिसात भी वही और खिलाड़ी भी.../ यह कैसे हुआ मीत /....'बहुत पहले सुना था इस गीत को । कोशिश की, गीतकार का नाम पता चल जाय पर जान न सका उस वक्त । कुछ लोगों ने कहा, मुझे भी लगा कि शायद यह गीत प्रसिद्ध गीतकार श्री बुद्धिनाथ मिश्र का है, पर ठीक-ठीक अब भी नहीं प...
Krishna Kumar Yadav
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देश के प्यारे गाँधी बाबाबच्चों के बापू कहलाएसत्य-अहिंसा की नीति सेदेश को आजादी दिलवाए .सूरज से चमके बापू जीकभी न हिम्मत हारे थेअंगरेजों को मार भगायापीछे-पीछे सारे थे .हम बच्चों के प्यारे बापूसपनों में जब आते हैंसत्य, अहिंसा, दया, धर्मदेश प्रेम का पाठ पढ़ाते हैं।-कृष...
ललित शर्मा
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 इस गीत को मैने लगभग 10 वर्षों पूर्व लिखा था-आज पुन: प्रकाशित कर रहा हूँ, आशा है कि आपको पसंद आएगा।फूलों से हो लो तुम,जीवन में सुंगध भर लोमहकाओ तन-मन सारा भावों को विमल कर लोफूलों से हो लो तुम ........................................वो मालिक सबका हैं ,जिस मा...
Krishna Kumar Yadav
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एक बार की बात है,अब तक हमको याद है.जंगल में थे हम होते,पांच शेर देखे सोते.थोड़ी आहट पर हिलते,आंख जरा खोल देखते.धीरे से आंख झपकते,साथी से कुछ ज्यों कहते.दूर दिखीं आती काया,झुरमुट भैंसों का आया.नन्हा बछड़ा इक उसमें,आगे सबसे चलने में.शेर हुए चौकन्ने थे,घात लगाकर बैठे...
Krishna Kumar Yadav
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'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटता कवि कुलवंत सिंह का गीत. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...सोने की थाली में यदिमैं चांदनी भर पाऊँ,प्रेम रूप पर गोरी तेरेभर भर हाथ लुटाऊँ।हवा में घुल पाऊँ यदितेरी सांसो मे बस जाऊँ,धड़कन हृदय कीवक्ष के स...
 पोस्ट लेवल : गीत कुलवंत सिंह
Krishna Kumar Yadav
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बारिश का मौसम है आया।हम बच्चों के मन को भाया।।'छु' हो गई गरमी सारी।मारें हम मिलकर किलकारी।।कागज की हम नाव चलाएं।छप-छप नाचें और नचाएं।।मजा आ गया तगड़ा भारी।आंखों में आ गई खुमारी।।गरम पकौड़ी मिलकर खाएं।चना चबीना खूब चबाएं।।गरम चाय की चुस्की प्यारी।मिट गई मन की खुश्की...
ललित शर्मा
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युग पुरुष योगेश्वर श्री कृष्ण का आज जन्मदिवस है, इस अवसर पर मन में आया कि कुछ गीत सा रचा जाए। आपके लिए प्रस्तुत है-जन्माष्टमी पर आनंद लें। पनघट जाऊँ कैसे,छेड़े मोहे कान्हापानी नहीं है,जरुरी है लानापनघट जाऊँ कैसे,छेड़े मोहे कान्हा कितना है मुस्किल घरों से निकलनापानी भ...
Krishna Kumar Yadav
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'सप्तरंगी प्रेम' ब्लॉग पर आज प्रेम की सघन अनुभूतियों को समेटता आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' जी का एक प्रेम-गीत. आपकी प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा...भाग्य निज पल-पल सराहूँ,जीत तुमसे, मीत हारूँ.अंक में सर धर तुम्हारे,एक टक तुमको निहारूँ.....नयन उन्मीलित, अधर कम्पित,कहे...
Krishna Kumar Yadav
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प्यारी-प्यारी मेरी बहना हरदम माने मेरा कहना राखी का त्यौहार आए मन को भाये, खूब हर्षाए। बांधे प्यार से राखी बहना प्यार का अद्भुत सुंदर गहना भैया मेरे तुम रक्षा करना दुःख आये तो मिलजुल सहना। राखी बांध मिठाई खिलाए तिलक लगाकर खूब दुलराए ऐसा सुंदर है यह रिश्ता देख-दे...
Krishna Kumar Yadav
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बन्दर आया बन्दर आयामेरे घर एक बन्दर आयामैं डर कर भागा अन्दरमेरे पीछे पड़ गया बन्दरमैंने तब उसे केला दिखलायासोचा, मुश्किल से पीछा छुडायाबन्दर निकला बड़ा चालाककरता रहा भागम-भागबन्दर ने मुझसे केला छीनामुझको आया जोर का पसीनाबन्दर आया बन्दर आयामेरे घर एक बन्दर आया.संजय भ...
 पोस्ट लेवल : संजय भास्कर बाल-गीत