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sanjiv verma salil
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समीक्षा :बुधिया लेता टोह : चीख लगे विद्रोहआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'स्वातंत्र्योत्तर भारतीय साहित्य छायावादी रूमानियत (पंत, प्रसाद, महादेवी, बच्चन), राष्ट्रवादी शौर्य (मैथिली शरण गुप्त, माखन लाल चतुर्वेदी, दिनकर, सोहनलाल द्विवेदी) और प्रगतिवादी यथार्थ (निराला, नागार...
shashi purwar
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श्वेत चाँदनी पंख पसारे उतरी ज्यों उपवन में पुष्प कुटज के जीवट लगते चटके सुन्दर, वन मेंश्वेत श्याम सा रूप सलोना फूल सुगन्धित काया काला कड़वा नीम चढ़ा है ग्राही शीतल मायाछाल जड़ें और बीज औषिधि व्याधि हरे जीवन में पुष्प कुटज के जीव...
 पोस्ट लेवल : कुटज के फूल नवगीत गीत
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बुंदेली नवगीत  कनैया नई सुदरो*नई सुदरो, बब्बा नई सुदरो मन कारो, कनैया नई सुदरो*कालिज मा जा खेंनें खोलें किताबेंभासन दें, गुंडों सेंऊधम कराबेंअधनंगी मोंड़िन सँगफोटू खिंचाबेभारत मैया कींनाक कटाबेफरज निभाबें माबा पिछरोमन कारो,कनैया नई सुदरो*दुसमन की...
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बुंदेली नवगीत :का बिगार दओ?*काए फूँक रओ बेदर्दी सें हो खें भाव बिभोर?का बिगार दो तोरो मैंनेभइया रामकिसोर??*हँस खेलत तीसंग पवन खेंपेंग भरत ती खूब।तेंदू बिरछाबाँह झुलाउतरओ खुसी में डूब।कें की नजरलग गई दइया!धर लओ मो खों तोर।का बिगार दो तोरो मैंनेभइया रामकिसोर??*क...
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बुंदेली गीत  -भुन्सारे चिरैया*नई आई,बब्बा! नई आईभुन्सारे चरैया नई आई*पीपर पै बैठत थी, काट दओ कैंने?काट दओ कैंने? रे काट दओ कैंने?डारी नें पाई तो भरमाईभुन्सारे चरैया नई आईनई आई,सैयां! नई आई*टला में पीयत ती, घूँट-घूँट पानीघूँट-घूँट पानी रे घूँट-घूँट पानीटला खों...
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बुंदेली गीत -*हम का कर रए?जे मत पूछो,तुम का कर रएजे बतलाओ?*हमरो स्याह सुफेद सरीखोतुमरो धौला कारो दीखोपंडज्जी ने नोंचो-खाओहेर सनिस्चर भी सरमाओघना बाज रओ थोथा दानाठोस पकाहिल-मिल खा जाओहम का कर रए?जे मत पूछो,तुम का कर रएजे बतलाओ?*हमरो पाप पुन्न सें बेहतरतुमरो पुन्न पा...
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नवगीत:संजीव *गैर कहोगे जिनको वे ही मित्र-सगे होंगे*ना माँगेंगे पानी-राशनना चाहेंगे प्यारनहीं लगायेंगे वे तुमकोअनचाहे फटकारशिकवे-गिले-शिकायततुमसे?, होगी कभी नहींन ही जतायेंगे वे तुम परकभी तनिक अधिकारकाम पड़े पर नहींआचरणप्रेम-पगे होंगेगैर कहोगे जिनकोवे...
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समीक्षा :''है छिपा सूरज कहाँ पर'' : खोजिए नवगीत मेंआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल"*[कृति विवरण : है छिपा सूरज कहाँ पर, नवगीत संग्रह, गरिमा सक्सेना, प्रथम संस्करण २०१९, आई.एस.बी.एन. ९७८९३८८९४६१७९, आकार २२ से.मी. x १४.से.मी., आवरण बहुरंगी सजिल्द लेमिनेटेड जैकेट सहित,...
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नवगीत:संजीव *समय के संतूर पर सरगम सुहानी बज रही.आँख उठ-मिल-झुक अजानेआँख से मिललज रही.*सुधि समंदर में समाई लहर सीशांत हो, उत्ताल-घूर्मित गव्हर सीगिरि शिखर चढ़ सर्पिणी फुंकारती-शांत स्नेहिल सुधा पहले प्रहर सीमगन मन मंदाकिनीकैलाश प्रवहितसज रही.मुदित नभ न...
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नवगीत  *हम आज़ाद देश के वासी,मुँह में नहीं लगाम। *जब भी अपना मुँह खोलेंगे,बेमतलब बातें बोलेंगे।नहीं बोलने के पहले हमबात कभी अपनी तोलेंगे।ना सुधरें हैं, ना सुधरेंगेगलती करें तमाम।*जितना भी ऊँचा पद पाया,उतना नीचा गिर गर्राया।लज्जा-हया-शर्म तज, मुस्कानिष...
 पोस्ट लेवल : नवगीत azad आज़ाद