ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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नवगीत:गीत पुराने छायावादीमरे नहींअब भी जीवित हैं.तब अमूर्तअब मूर्त हुई हैंसंकल्पना अल्पनाओं कीकोमल-रेशम सी रचना कीछुअन अनसजी वनिताओं सीगेहूँ, आटा, रोटी है परिवर्तन यात्रालेकिन सच भीसंभावनाऐं शेष जीवन कीचाहे थोड़ी पर जीवित हैं.बिम्ब-प्रतीकवसन बदले हैंअलंकार भी बदल गए...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
shashi purwar
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चला बटोही कौन दिशा मेंपथ है यह अनजाना जीवन है दो दिन का मेलाकुछ खोना कुछ पानातारीखों पर लिखा गया हैकर्मों का सब लेखापैरों के छालों को रिसते कब किसने देखाभूल भुलैया की नगरी मेंडूब गया मस्तानाजीवन है दो दिन का मेलाकुछ खोना कुछ पानामृगतृष्णा के गहरे बादलहर पथ पर छितरा...
jaikrishnarai tushar
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एक गीत-नदी में जल नहीं हैधुन्ध में आकाश,पीले वन,नदी में जल नहीं है ।इस सदी मेंसभ्यता के साथक्या यह छल नहीं है ?गीत-लोरीकहकहेदालान के गुम हो गये,ये वनैलेफूल-तितली,भ्रमर कैसे खो गये,यन्त्रवतहोना किसीसंवेदना का हल नहीं है ।कहाँ तुलसीऔर कबिरा कापढ़े यह मंत्र काशी,लहरतार...
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--सभ्यता, शालीनता के गाँव में,खो गया जाने कहाँ है आचरण?कर्णधारों की कुटिलता देखकर,देश का दूषित हुआ वातावरण।--सुर हुए गायब, मृदुल शुभगान में,गन्ध है अपमान की, सम्मान में,आब खोता जा रहा अन्तःकरण।खो गया जाने कहाँ है आचरण?--शब्द अपनी प्राञ्जलता खो र...
Saransh Sagar
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पुणे पुलिस के संदीप सूर्यवंशी का गाना हो रहा है वायरल !.facebook-responsive { overflow:hidden; padding-bottom:75.25%; position:relative; height:0; } .facebook-responsive iframe { left:0; top:0; height:100%; width:100%; position:...
Saransh Sagar
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--तन्त्र अब खटक रहा है।सुदामा भटक रहा है।।--कंस हो गये कृष्ण आज,मक्कारी से चल रहा काज,भक्षक बन बैठे यहाँ बाज,महिलाओं की लुट रही लाज,तन्त्र अब खटक रहा है।सुदामा भटक रहा है।।--जहाँ कमाई हो हराम कीलूट वहाँ है राम नाम की,महफिल सजती सिर्फ जाम कीबोली लगती जहाँ चाम क...
sanjiv verma salil
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कृति चर्चा:'पहने हुए धूप के चेहरे' नवगीत को कैद करते वैचारिक घेरेआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*[कृति विवरण: पहने हुए धूप के चेहरे, नवगीत संग्रह, मधुकर अष्ठाना, प्रथम संस्करण २०१८, आई.एस.बी.एन. ९८७९३८०७५३४२३, प्रथम संस्करण २०१८, पृष्ठ १६०, मूल्य ३००/-, आवरण सजीओल्ड बहुर...
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--गीत और ग़ज़लों वाला जो सौम्य सरोवर है।मन के अनुभावों की इसमें छिपी धरोहर है।।--शब्द हिलोरें लेते जब भी इस रीती गागर में,देता हैं उडेल सब उनको, धारा बन सागर में,उच्चारण में ठहर गया जीवन्त कलेवर है।मन के अनुभावों की इसमें छिपी धरोहर है।।--पगडण्डी है वही प...
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--मीत बेशक बनाओ बहुत से मगर,मित्रता में शराफत की आदत रहे। स्वार्थ आये नहीं रास्ते में कहीं,नेक-नीयत हमेशा सलामत रहे।।--भारती का चमन आप सिंचित करो,भाव मौलिक भरो, शब्द चुनकर धरो,काल को जीत लो अपने ऐमाल से,गीत में सुर की धारा सलामत रहे।नेक-नीयत हमेशा सलामत रहे।।--आ...