ब्लॉगसेतु

sanjiv verma salil
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* ब्रम्ह कमल* कमल, कुमुद, व कमलिनी का प्रयोग कहीं-कहीं भिन्न पुष्प प्रजातियों के रूप में है, कहीं-कहीं एक ही प्रजाति के पुष्प के पर्याय के रूप में. कमल के रक्तकमल, नीलकमल तथा श्वेतकमल तीन प्रकार रंग के आधार पर वर्णित हैं. कमल-कमलिनी का विभाजन बड़े-छोटे आकार के आधार...
sanjiv verma salil
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नवगीत :तुम*तुम मुस्काईंतो ऊषा केहुए गुलाबी गाल।*सूरज करता ताका-झाँकीमन में आँकें सूरत बाँकीनाच रहे बरगद बब्बा भीझूम दे रहे ताल।तुम इठलाईंतो पनघट पेकूकी मौन रसाल।तुम मुस्काईंतो ऊषा केहुए गुलाबी गाल।*सद्यस्नाता बूँदें बरसेंदेख बदरिया हरषे-तरसेपवन छेड़ता श्यामल कुंतलउल...
 पोस्ट लेवल : नवगीत तुम
jaikrishnarai tushar
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हिन्दुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के अध्यक्षडॉ ० उदय प्रताप सिंह  बालकृष्ण भट्ट की मूर्ति का अनावरण करते हुए परिचय -हिन्दुस्तानी एकेडमी प्रयागराज की स्थापना आज़ादी के पूर्व १९२७ में हुई थी |तत्कालीन मंत्री राय राजेश्वर बली के समय में | इसके पूर्व अध्यक्षों में...
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--चिट्ठी-पत्री का युग बीता, आया है अब नया जमाना।मुट्ठी में सिमटी है दुनिया,छूट गया पत्रालय जाना।।--रंग-ढंग नवयुग में बदले,चाल-ढाल भी बदल गयी है।मंजिल पहले जैसी ही है,मगर डगर तो बदल गयी है।जिसको देखो वही यहाँ पर,मोबाइल का हुआ दिवाना।मुट्ठी में सिमटी है दुनिया,छ...
sanjiv verma salil
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नवगीत संजीव*नहा रहे हैंबरसातों मेंहरे-भरे बतियाते झाड़अपनी जगहहमेशा ठांड़ेझूम-झूम मस्ताते झाड़*सूर्य-बल्बजब होता रौशनमेक'प करते बिना छिपे.शाखाओं,कलियों फूलों सेमिलते, नहीं लजाते झाड़नहा रहे हैंबरसातों मेंहरे-भरे बतियाते झाड़अपनी जगहहमेशा ठांड़ेझूम-झूम मस्ताते झाड़*बऊ...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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हाइकु गीत:आँख का पानीसंजीव 'सलिल'*रोक न पायेजनक जैसे ज्ञानीआँसू अपने.मिट्टी में मिलारावण जैसा ध्यानीटूटे सपने.आँख से पानीन बहे, पर रहेआँख का पानी...*पल में मरेहजारों बेनुगाहगैस में घिरे.गुनहगारहैं नेता-अधिकारीझूठे-मक्कार.आँख में पानीदेखकर रो पड़ाआँख का पानी...*२६-६...
 पोस्ट लेवल : हाइकु गीत आँख का पानी
mahendra verma
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गीत-संगीत किसे अच्छा नहीं लगता ! यदि गीत किसी प्रख्यात साहित्यकार का हो जिसे संगीतबद्ध कर गाया गया हो तो ऐसी रचना सहसा ध्यान आकर्षित करती ही है । प्रसिद्ध साहित्यकार धर्मवीर भारती की एक कविता है- ‘ढीठ चांदनी’ । इस की प्रारंभिक पंक्ति है-‘आजकल तमाम रात चाँदनी जगाती...
अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : नवगीत
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--सागर में से भर कर निर्मल जल को लाये हैं।झूम-झूम कर नाचो-गाओ, बादल आये हैं।।--गरमी ने लोगों के तन-मन को झुलसाया है,बहुत दिनों के बाद मेघ ने दरस दिखाया है,जग की प्यास बुझाने को ये छागल लाये हैं।झूम-झूम कर नाचो-गाओ, बादल आये हैं।।--नाच रहे पेड़ों के पत्ते,...
sanjiv verma salil
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स्मृति गीत / शोक गीतसंजीव 'सलिल'याद आ रही पिता तुम्हारी*याद आ रहीपिता तुम्हारी...तुम सा कहाँ मनोबल पाऊँ?जीवन का सब विष पी पाऊँ.अमृत बाँट सकूँस्वजनों को-विपदा को हँस सह मुस्काऊँ.विधि ने काहेबात बिगारी?याद आ रही पिता तुम्हारी...*रही शीश पर जब तव छाया.तनिक न विपदा से...