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sanjiv verma salil
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सामयिक गीति रचनासंजीव.जब-जब कंपित भू हुई हिली आस्था-नीवआर्तनाद सुनते रहेबेबस करुणासींवन हारो सामनापूर्ण हो तभी कामनाध्वस्त हुए वे ही भवनजो अशक्त-कमजोरतोड़-बनायें फिर उन्हेंकरें परिश्रम घोरसुरक्षित रहे जिंदगीप्रेम से करो बन्दगीसंरचना भूगर्भ कीप्लेट दानवाकारऊपर-न...
 पोस्ट लेवल : geet bhukamp गीत भूकंप
sanjiv verma salil
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मुक्तक गीत:अभियंता दिवस (१५ सितंबर) पर विशेष रचना:हम अभियंता...संजीव 'सलिल'*हम अभियंता!, हम अभियंता!!मानवता के भाग्य-नियंता...*माटी से मूरत गढ़ते हैं,कंकर को शंकर करते हैं.वामन से संकल्पित पग धर,हिमगिरि को बौना करते हैं.नियति-नटी के शिलालेख परअदिख लिखा जो वह पढ़ते...
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गीत:हम मिले… संजीव*हम मिले बिछुड़ने को कहा-सुना माफ़ करो...*पल भर ही साथ रहेहाथों में हाथ रहे.फूल शूल धूल लिये-पग-तल में पाथ रहेगिरे, उठे, सँभल बढ़ेउन्नत माथ रहेगैरों से चाहो क्योँ?खुद ही इन्साफ करो...*दूर देश से आयादूर देश में आयाअपनों सा अपनापनऔरों में है...
 पोस्ट लेवल : geet गीत
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नवगीतकारे बदरा *आ रे कारे बदरा*टेर रही धरती तुझे आकर प्यास बुझा रीते कूप-नदी भरने की आकर राह सुझा ओ रे कारे बदरा *देर न कर अब तो बरस बजा-बजा तबला बिजली कहे न तू गरज नारी है सबला भा रे कारे बदरा *लहर-लहर लहरा सक...
 पोस्ट लेवल : नवगीत barsat बरसात navgeet
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नवगीत :का बिगार दओ?*काए फूँक रओ बेदर्दी सें हो खें भाव बिभोर?का बिगार दो तोरो मैंनेभइया रामकिसोर??*हँस खेलत तीसंग पवन खेंपेंग भरत ती खूब।तेंदू बिरछाबाँह झुलाउतरओ खुसी में डूब।कें की नजरलग गई दइया!धर लओ मो खों तोर।का बिगार दो तोरो मैंनेभइया रामकिसोर??*काट-सुखाभ...
 पोस्ट लेवल : नवगीत धूम्रपान navgeet dhoomra pan
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नवगीतःसुग्गा बोलोसन्जीव*सुग्गा बोलोजय सिया राम...*काने कौए कुर्सी कोपकड़ सयाने बन बैठेभूल गये रुकना-झुकनादेख आईना हँस एँठेखिसकी पाँव तले धरतीनाम हुआ बेहद बदनाम...*मोहन ने फिर व्यूह रचाकिया पार्थ ने शर-सन्धानकौरव हुए धराशायीजनगण सिद्‍ध हुआ मतिमानखुश मत हो, सच याद रख...
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एक नवगीत तुम्हें प्रणाम *मेरे पुरखों! तुम्हें प्रणाम। *सूक्ष्म काय थे,चित्र गुप्त विधि ,अणु-परमाणु-विषाणु विष्णु हो धारे तुमने। कोष-वृद्धि कर 'श्री' पाई है। जल-थल--नभ पर कीर्ति-पताका फहराई है। पंचतत्व तुमनाम अनाम। मेरे पुरखों! तुम्हें प्रणाम। *भू-नभ दिग्दिगंत यश गा...
 पोस्ट लेवल : नवगीत purakhon पुरखों navgeet
ऋता शेखर 'मधु'
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सबकी अपनी राम कहानी=================जितने जन उतनी ही बानीसबकी अपनी राम कहानीऊपर ऊपर हँसी खिली हैअंदर में मायूस गली हैकिसको बोले कैसे बोले अँखियों में अपनापन तोलेपाकर के बोली प्रेम भरीआँखों में भर जाता पानीमन का मौसम बड़ा निरालापतझर में रहता मतवालादिखे चाँदनी कड़ी धूप...
 पोस्ट लेवल : कविता गीत सभी रचनाएँ
sanjiv verma salil
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दोहा - सोरठा गीतपानी की प्राचीर*आओ! मिलकर बचाएँ,पानी की प्राचीर।पीर, बाढ़ - सूखा जनित हर, कर दे बे-पीर।। *रखें बावड़ी साफ़,गहरा कर हर कूप को। उन्हें न करिये माफ़,जो जल-स्रोत मिटा रहे।।चेतें, प्रकृति का कहीं,कहर न हो, चुक धीर।आओ! मिलकर बचाएँ,पानी की प्राच...
sanjiv verma salil
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सोरठा - दोहा गीतसंबंधों की नाव*संबंधों की नाव,पानी - पानी हो रही। अनचाहा अलगाव,नदी-नाव-पतवार में।।*स्नेह-सरोवर सूखते,बाकी गन्दी कीच।राजहंस परित्यक्त हैं,पूजते कौए नीच।।नहीं झील का चाव,सिसक रहे पोखर दुखी।संबंधों की नाव,पानी - पानी हो रही।।*कुएँ - बावली में नहीं...