ब्लॉगसेतु

अनंत विजय
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भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय से संबद्ध कई सांस्कृतिक संगठन हैं जो बहुधा विवादों में रहते हैं। ऐसी ही एक संस्था है ललित कला अकादमी जो हमेशा से विवादों में ही रही है। घपले-घोटाले से लेकर अकादमी की पेंटिग्स को बेचने के आरोप वहां से बाहर निकलते रहे हैं। केस मुकदमे भ...
Basudeo Agarwal
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सावन मनभावन तन हरषावन आया।घायल कर पागल करता बादल छाया।।क्यों मोर पपीहा मन में आग लगाये।सोयी अभिलाषा तन की क्यों ये जगाये।पी की यादों ने क्यों इतना मचलाया।सावन -----ये झूले भी मन को ना आज रिझाये।ना बाग बगीचों की हरियाली भाये।बेदर्द पिया ने कैसा प्यार जगाया।सावन-----...
sanjiv verma salil
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हरिगीतिका सलिलासंजीव*(छंद विधान: १ १ २ १ २ x ४, पदांत लघु गुरु, चौकल पर जगण निषिद्ध, तुक दो-दो चरणों पर, यति १६-१२ या १४-१४ या ७-७-७-७ पर)*कण जोड़ती, तृण तोड़ती, पथ मोड़ती, अभियांत्रिकीबढ़ती चले, चढ़ती चले, गढ़ती चले, अभियांत्रिकीउगती रहे, पलती रहे, खिलती रहे, अभियांत्रि...
 पोस्ट लेवल : हरिगीतिका छंद harigitika chhand
sanjiv verma salil
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गीत:ज्ञान सुरा पी.…संजीव*ज्ञान सुरा पी बहकें ज्ञानी,श्रेष्ठ कहें खुद को अभिमानी।निज मत थोप रहे औरों पर-सत्य सुनें तो मरती नानी…*हाँ में हाँ चमचे करते हैं,ना पर मिल टूटे पड़ते हैं.समाधान स्वीकार नहीं है-सद्भावों को चुभ-गड़ते हैं.खुद का खुद जयकारा बोलेंकलह करेंगे मन मे...
 पोस्ट लेवल : geet गीत
sanjiv verma salil
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पर्यावरण गीत:किस तरह आये बसंतसंजीव*मानव लूट रहा प्रकृति कोकिस तरह आये बसंत?...*होरी कैसे छाये टपरिया?धनिया कैसे भरे गगरिया?गाँव लील कर हँसे नगरिया,राजमार्ग बन गयी डगरियाराधा को छल रहा सँवरियासुत भूला माँ हुई बँवरियाअंतर्मन रो रहा निरंतरकिस तरह गाये बसंत?...*सूखी नद...
 पोस्ट लेवल : paryavaran geet पर्यावरण गीत
sanjiv verma salil
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गीत:चाहता हूँ ...संजीव*काव्यधारा जगा निद्रा से कराता सृजन हमसे.भाव-रस-राकेश का स्पर्श देता मुक्ति तम सेकथ्य से परिक्रमित होती कलम ऊर्जस्वित स्वयं होहैं न कर्ता, किन्तु कर्ता बनाते खुद को लगन सेह्रदय में जो सुप्त, वह झंकार बनना चाहता हूँजानता हूँ, हूँ पुनः ओंकार बनन...
 पोस्ट लेवल : geet गीत
sanjiv verma salil
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बुन्देली गीत;संजीव*आ खें सेहर गाँव पछता रओ,नाहक मन खों चैन गँवा दओ....*छोर खेत-खलिहान आओ थो,नैनों मां सपना सजाओ थो।सेहर आओ तो छूटे अपने,हाय राम रे! टूटे सपने।धोखा दें खें, धोखा खा रओ....*दूनो काम, मजूरी आधी,खाज-कोढ़ मां रिस्वत ब्याधी।सुरसा कहें मूं सी मंहगाई-खुसियाँ...
 पोस्ट लेवल : bundeli geet बुन्देली गीत
sanjiv verma salil
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स्मृति-गीतमाँ के प्रति:संजीव*अक्षरों ने तुम्हें ही किया है नमनशब्द ममता का करते रहे आचमनवाक्य वात्सल्य पाकर मुखर हो उठे-हर अनुच्छेद स्नेहिल हुआ अंजुमनगीत के बंद में छंद लोरी मृदुलऔर मुखड़ा तुम्हारा ही आँचल धवलहर अलंकार माथे की बिंदी हुआ-रस भजन-भाव जैसे लिए चिर नवलले...
 पोस्ट लेवल : स्मृति-गीत maa माँ smruti geet
sanjiv verma salil
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बुन्देली गीतसंसद बैठ बजावैं बंसीसंजीव*संसद बैठ बजावैं बंसी, नेता महानिगोरो.कपरा पहिरे फिर भी नंगो, राजनीति को छोरो….*कुरसी निरख लार चुचुआवै, है लालच खों मारो.खाद कोयला सक्कर चैनल, खेल बनाओ चारो.आँख दिखायें परोसी, झूलै अम्बुआ डार हिंडोरोसंसद बैठ बजावैं बंसी, नेता मह...
 पोस्ट लेवल : bundeli geet बुन्देली गीत
sanjiv verma salil
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अभिनव प्रयोग-उल्लाला गीत:जीवन सुख का धाम हैसंजीव 'सलिल'*जीवन सुख का धाम है,ऊषा-साँझ ललाम है.कभी छाँह शीतल रहा-कभी धूप अविराम है...*दर्पण निर्मल नीर सा,वारिद, गगन, समीर सा,प्रेमी युवा अधीर सा-हर्ष, उदासी, पीर सा.हरी का नाम अनाम हैजीवन सुख का धाम है...*बाँका राँझा-ही...
 पोस्ट लेवल : उल्लाला गीत ullala geet