ब्लॉगसेतु

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नभ में छाये काले बादल।मन भरमाते काले बादल।।दिन में छाया है अँधियारा,बादल से सूरज है हारा,बौराये हैं काले बादल।मन भरमाते काले बादल।।चपला चम-चम चमक रही है,आसमान मॆं दमक रही है,बरस रहे हैं काले बादल।मन भरमाते काले बादल।।बादल होते हैं मतवाले,जीवन जग को देने वाले,बारिश...
sanjiv verma salil
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नवगीत:करो बुवाई...संजीव 'सलिल'*खेत गोड़करकरो बुवाई...*ऊसर-बंजर जमीन कड़ी है.मँहगाई जी-जाल बड़ी है.सच मुश्किल की आई घड़ी है.नहीं पीर की कोई जडी है.अब कोशिश कीहो पहुनाई.खेत गोड़करकरो बुवाई...*उगा खरपतवार कंटीला.महका महुआ मदिर नशीला.हुआ भोथरा कोशिश-कीला.श्रम से कर धरत...
 पोस्ट लेवल : नवगीत करो बुवाई
sanjiv verma salil
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गीत:मौसम बदल रहा है…संजीव*मौसम बदल रहा हैटेर रही अमराईपरिवर्तन की आहटपनघट से भी आई...*जन आकांक्षा नभ कोछूती नहीं अचंभाछाँव न दे जनप्रतिनिधिज्यों बिजली का खंभाआश्वासन की गर्मीसूरज पीटे डंकाशासन भरमाता हैजनगण मन में शंकाअपचारी ने निष्ठाबरगद पर लटकाईसीता-द्रुपदसुता अब...
 पोस्ट लेवल : गीत
अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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गीत हम अभियंता...संजीव वर्मा 'सलिल'*हम अभियंता!, हम अभियंता!!मानवता के भाग्य-नियंता...*माटी से मूरत गढ़ते हैं,कंकर को शंकर करते हैं.वामन से संकल्पित पग धर,हिमगिरि को बौना करते हैं.नियति-नटी के शिलालेख परअदिख लिखा जो वह पढ़ते हैं.असफलता का फ्रेम बनाकर,चित्र सफल...
 पोस्ट लेवल : गीत अभियंता
sanjiv verma salil
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गीतअपने अम्बर का छोरसंजीव*मैंने थाम रखीअपनी वसुधा की डोरतुम थामे रहनाअपने अंबर का छोर.…*हल धर करहलधर से, हल ना हुए सवालपनघट मेंपन घट कर, पैदा करे बवालकूद रहेबेताल, मना वैलेंटाइनजंगल कटे,खुदे पर्वत, सूखे हैं तालपजर गयीअमराई, कोयल झुलस गयी-नैन पुतरियाटँगी डाल पर, रोय...
 पोस्ट लेवल : गीत अंबर
sanjiv verma salil
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नवगीतराम रे!*राम रे!कैसो निरदै काल?*भोर-साँझ लौ गोड़ तोड़ रएकामचोर बे कैते।पसरे रैत ब्यास गादी पैभगतन संग लपेटे।काम पुजारी गीता बाँचेंगोपी नचें निढाल-आँधर ठोंके तालराम रे!बारो डाल पुआल।राम रे!कैसो निरदै काल?*भट्टी देह, न देत दबाईपैलउ माँगें पैसा।अस्पताल मा घुसे कसाईथ...
 पोस्ट लेवल : नवगीत राम रे!
sanjiv verma salil
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गीत :उड़ने दो…संजीव*पर मत कतरोउड़ने दो मन-पाखी को।कहो कबीरासीख-सिखाओ साखी को...*पढ़ो पोथियाँ,याद रखो ढाई आखर।मन न मलिन हो,स्वच्छ रहे तन की बाखर।जैसी-तैसीछोड़ो साँसों की चादर।ढोंग मिटाओ,नमन करो सच को सादर।'सलिल' न तजनारामनाम बैसाखी को...*रमो राम में,राम-राम सब से कर लो।...
 पोस्ट लेवल : गीत
PRAVEEN GUPTA
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"सेठ जयदयाल गोयनका जी का गीता के प्रचार का कारण"गीताप्रेस का मुख्य उद्देश्य ईश्वरप्रेम, सत्य, सदाचार और सद्भावों के प्रचार-हेतु मानव-सेवार्थ सद्‍ग्रन्थोंका प्रकाशन करना है।गीताप्रेस की स्थापनाके पूर्व गीताजीकी पुस्तक मिलनी दुर्लभ थी। मिलती भी तो पाठ शुद्ध नहीं होता...
sanjiv verma salil
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हास्य गीत *प्रभु जी! हम जनता, तुम नेताहम हारे, तुम भए विजेता।।प्रभु जी! सत्ता तुमरी चेरीहमें यातना-पीर घनेरी ।।प्रभु जी! तुम घपला-घोटालाहमखों मुस्किल भयो निवाला।।प्रभु जी! तुम छत्तीसी छातीतुम दुलहा, हम महज घराती।।प्रभु जी! तुम जुमला हम तालीभरी तिजोरी, जेबें खा...
 पोस्ट लेवल : हास्य गीत