ब्लॉगसेतु

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--जन्मदिवस चाचा नेहरू का, बच्चों भूल न जाना।ठाठ-बाट को छोड़ हमेशा, सादा जीवन अपनाना।।--नित्य-नियम से सदा सींचना, बगिया की फुलवारी।मत-मजहब के गुलदस्ते सी, वसुन्धरा है प्यारी।अपनी इस पावन धरती पर, वैमनस्य मत उपजाना। ठाठ-बाट को...
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--है नशा चढ़ा हुआ, खुमार ही खुमार है।तन-बदन में आज तो, चढ़ा हुआ बुखार है।।--मुश्किलों में हैं सभी, फिर भी धुन में मस्त है,ताप के प्रकोप से, आज सभी ग्रस्त हैं,आन-बान, शान-दान, स्वार्थ में शुमार है।तन-बदन में आज तो, चढ़ा हुआ बुखार है।।--हो गये उलट-पलट,...
 पोस्ट लेवल : गीत चढ़ा हुआ बुखार है
sanjiv verma salil
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नवगीत * सहनशीलता कमजोरी है सीनाजोरी की जय *गुटबंदीकर अपनी बात कहो ताली पिटवाओ। अन्य विचार न सुनो; हूटकर शालीनता भुलाओ। वृद्धों का अपमान करो फिर छाती खूब फुलाओ। श्रम की कद्र न करो, श्रमिक के हितकारी कहलाओ।बातें करें किताबी पर आचरण न किंचित है भय *नहीं गीत में छंद ज...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
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--घर-आँगन-कानन में जाकर मैं,अपनी तुकबन्दी करता हूँ।अनुभावों का अनुगायक हूँ,मैं कवि लिखने से डरता हूँ।।--है नहीं मापनी का गुनिया,अब तो अतुकान्त लिखे दुनिया।असमंजस में हैं सब बालक,क्या याद करे इनको मुनिया।मैं बन करके पागल कोकिल,खाली पन्नों को भरता हूँ।मैं कवि लिखने स...
sanjiv verma salil
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कृति चर्चा 'पोखर ठोंके दावा' : जल उफने ज्यों लावा चर्चाकार : आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*[कृति विवरण : पोखर ठोंके दावा, नवगीत संग्रह, अविनाश ब्योहार, प्रथम संस्करण २०१९, आकार  २० से. x १३ से., आवरण बहुरंगी पेपरबैक, पृष्ठ १२०, प्रकाशन काव्य प्...
sanjiv verma salil
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कृति चर्चा: चुप्पियों को तोड़ते हैं  -  नवाशा से जोड़ते हैं  चर्चाकार : आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*                                सृष्टि के निर्माण का मूल 'ध्वनि'...
अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : गीत
sanjiv verma salil
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नवगीत*दर्द होता हैमगरचुपचाप सहता।*पीर नदियों कीसुनाते घाट देखे।मंज़िलों का दर्दकहते ठाठ लेखे।शूल पैरों को चुभेकितने, कहाँ, कब?मौन बढ़ता कदमचुप रहनहीं कहता?*चूड़ियों की कथापायल ने कही है।अचकनों की व्यथाअनसुन ही रही है।मर्द को हो दर्दजग कहता, न होताशिला निष्ठुर मौनझरनाप...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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दोहा गीत:दीपक लेकर हाथ*भक्त उतारें आरती,दीपक लेकर हाथ।हैं प्रसन्न माँ भारती,जनगण-मन के साथ।।*अमरनाथ सह भवानी,कार्तिक-गणपति झूम।चले दिवाली मनाने,भायी भारत-भूम।।बसे नर्मदा तीर पर,गौरी-गौरीनाथ।भक्त उतारें आरती,दीपक लेकर हाथ।।*सरस्वती सिंह पर हुईं,दुर्गा सदृश सवार।मेघद...
 पोस्ट लेवल : दोहा गीत
sanjiv verma salil
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नवगीत:महका-महकासंजीवमहका-महकामन-मंदिर रख सुगढ़-सलौनाचहका-चहकाआशाओं के मेघ न बरसेकोशिश तरसेफटी बिमाई, मैली धोतीनिकली घर सेबासन माँजे, कपड़े धोएकाँख-काँखकरसमझ न आए पर-सुख सेहरसे या तरसेदहका-दहकाबुझा हौसलों का अंगारालहका-लहकाएक महल, सौ यहाँ झोपड़ीकौन बनाएऊँच-नीच यह, कह...
 पोस्ट लेवल : नवगीत