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sanjiv verma salil
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बाल गीत:धानू बिटिया*धानू बिटिया रानी है।सच्ची बहुत सयानी है।।यह हरदम मुस्काती है।खुशियाँ खूब लुटाती है।।है परियों की शहजादी।तनिक न करती बर्बादी।।आँखों में अनगिन सपने।इसने पाले हैं अपने।।पढ़-लिख कभी न हारेगी।हर दुश्मन को मारेगी।।हर बाधा कर लेगी पार।होगी इसकी जय-जयकार...
 पोस्ट लेवल : baal geet बाल गीत
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भारत का भाषा गीत आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*हिंद और हिंदी की जय-जयकार करें हम भारत की माटी, हिंदी से प्यार करें हम *भाषा सहोदरा होती है, हर प्राणी कीअक्षर-शब्द बसी छवि, शारद कल्याणी कीनाद-ताल, रस-छंद, व्याकरण शुद्ध सरलतमजो बोले वह लिखें-पढ़ें, विधि जगव...
 पोस्ट लेवल : भाषा गीत bhasha geet
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गीत:हारे हैं...संजीव 'सलिल'*कौन किसे कैसे समझाएसब निज मन से हारे हैं?.....*इच्छाओं की कठपुतली हमबेबस नाच दिखाते हैं.उस पर भी तुर्रा यह खुद कोतीसमारखाँ पाते हैं.रास न आये सच कबीर काहम बुदबुद गुब्बारे हैं...*बिजली के जिन तारों सेटकरा पंछी मर जाते हैं.हम नादां उनसे बि...
 पोस्ट लेवल : geet गीत हारे हैं
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नवगीत साक्षी * साक्षी देगा समय खुद * काट दीवारें रही हैं तोड़ना है रीतियाँ सब थोपना निज मान्यताएँभुलाना है नीतियाँ अब कौन- किसका हाथ थामे छोड़ दे कब? हुए कपड़ों की तरह अब देह-रिश्ते, नेह-नाते कूद मीनारें रही हैं साक्षी देगा समय खुद * घरौंदे बंधन हुए हैं आस...
 पोस्ट लेवल : नवगीत साक्षी sakshee navgeet
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गीत:हम मिले… संजीव*हम मिले बिछुड़ने को कहा-सुना माफ़ करो...*पल भर ही साथ रहेहाथों में हाथ रहे.फूल शूल धूल लिये-पग-तल में पाथ रहेगिरे, उठे, सँभल बढ़ेउन्नत माथ रहेगैरों से चाहो क्योँ?खुद ही इन्साफ करो...*दूर देश से आयादूर देश में आयाअपनों सा अपनापनऔरों में है...
 पोस्ट लेवल : geet गीत
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गीतः सुग्गा बोलो जय सिया राम...सन्जीव*सुग्गा बोलोजय सिया राम...*काने कौए कुर्सी कोपकड़ सयाने बन बैठेभूल गये रुकना-झुकनादेख आईना हँस एँठेखिसकी पाँव तले धरतीनाम हुआ बेहद बदनाम...*मोहन ने फिर व्यूह रचाकिया पार्थ ने शर-सन्धानकौरव हुए धराशायीजनगण सिद्‍ध हुआ मत...
 पोस्ट लेवल : geet गीत
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एक रचना संजीव *नहा रहे हैंबरसातों में हरे-भरे बतियाते झाड़अपनी जगहहमेशा ठांड़ेझूम-झूम मस्ताते झाड़*सूर्य-बल्बजब होता रौशनमेक'प करते बिना छिपे.शाखाओं,कलियों फूलों सेमिलते, नहीं लजाते झाड़नहा रहे हैंबरसातों मेंहरे-भरे बतियाते झाड़अपनी जगहहमेशा ठांड़ेझूम-झूम...
 पोस्ट लेवल : नवगीत navgeet
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नवगीत :समारोह है *समारोह है सभागार में। *ख़ास-ख़ास आसंदी पर हैं,खासुलखास मंच पर बैठे।आयोजक-संचालक गर्वित-ज्यों कौओं में बगुले ऐंठे।करतल ध्वनि,चित्रों-खबरों मेंरूचि सबकी हैनिज प्रचार में।*कुशल-निपुण अभियंता आए,छाती ताने, शीश उठाए।गुणवत्ता बिन कार्य हो र...
 पोस्ट लेवल : नवगीत navgeet
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एक रचनाधरती की छाती पै होरारओ रे सूरज भून।*दरक रे मैदान-खेत सबमुरझा रए खलिहान।माँगे सीतल पेय भिखारीले न रुपया दान।संझा ने अधरों पे बहिनालगा रखो है खून।धरती की छाती पै होरारओ रे सूरज भून।*धोंय, निचोरें सूखें कपरापहने गीले होंय।चलत-चलत कूलर हीटर भओपंखें चल-थक रोंय।आँ...
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अभिनव प्रयोग-गीत:कमल-कमलिनी विवाहसंजीव 'सलिल'**अंबुज शतदल कमलअब्ज हर्षाया रे!कुई कमलिनी का करगहने आया रे!...*अंभज शीतल उत्पल देख रहा सपनेबिसिनी उत्पलिनी अरविन्दिनी सँग हँसनेकुंद कुमुद क्षीरज अंभज नीरज के सँग-नीलाम्बुज नीलोत्पल नीलोफर के रंग.कँवल जलज अंबोज नलिन पुहु...