ब्लॉगसेतु

6
--सम्बन्धों के चक्रव्यूह में,सीख रहा हूँ दुनियादारी।जब पारंगत हो जाऊँगा,तब बन जाऊँगा व्यापारी।।--खुदगर्जी के महासिऩ्धु में,कैसे सुथरा कहलाऊँगा?पीने का पानी गंगा से,गागर में कैसे पाऊँगा?बिना परिश्रम, बिना कर्म के,क्या बन पाऊँगा अधिकारी।जब पारंगत हो जाऊँगा,तब बन...
sanjiv verma salil
5
एक रचना *हम जो कहते हम जो करते वही ठीक है मानो *जंगल में जनतंत्र तभी जब तंत्र बन सके राजा। जन की जान रखे मुट्ठी में पीट बजाये बाजा। शिक्षालय हो या कार्यालय कभी शीश मत तानो *लोकतंत्र में जान लोक कीतंत्र जब रुचे...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
6
--आपाधापी की दुनिया में,ऐसे मीत-स्वजन देखे हैं।बुरे वक्त में करें किनारा,ऐसे कई सुमन देखे हैं।।--धीर-वीर-गम्भीर मौन है,कायर केवल शोर मचाता।ओछी गगरी ही बतियाती,भरा घड़ा कुछ बोल न पाता।गर्जन करते, बरस न पाते,हमने वो सावन देखे हैं।बुरे वक्त में करें किनारा,ऐसे कई सुमन...
sanjiv verma salil
5
गीत:मन से मन के तार जोड़ती.....संजीव 'सलिल'**मन से मन के तार जोड़ती कविता की पहुनाई का.जिसने अवसर पाया वंदन उसकी चिर तरुणाई का.....*जहाँ न पहुँचे रवि पहुँचे वह, तम् को पिए उजास बने.अक्षर-अक्षर, शब्द-शब्द को जोड़, सरस मधुमास बने..बने ज्येष्ठ फागुन में देवर, अधर-कमल...
 पोस्ट लेवल : गीत
sanjiv verma salil
5
सामयिक दोहा गीत*अहंकार की हार*समय कह रहा: 'आँक लेतू अपनी औकात।मत औरों की फ़िक्र कर,भुला न बोली बात।।जीत नम्रता की हुई,अहंकार की हार...*जनता ने प्रतिनिधि चुने,दूर करें जन-कष्ट।मुक्त कराओ किसी से,नहीं घोषणा शिष्ट।।बड़बोले का सिर झुका,सही नियति का न्याय।रोजी छन गरीब की,...
 पोस्ट लेवल : दोहा गीत
sanjiv verma salil
5
नवगीत:लेटा हूँमखमल गादी परलेकिननींद नहीं आती है.इस करवट में पड़े दिखाईकमसिन बर्तनवाली बाईदेह सांवरी नयन कटीलेअभी न हो पाई कुड़माईमलते-मलते बर्तनखनके चूड़ीजाने क्या गाती हैमुझ जैसेलक्ष्मी पुत्र कोबना भिखारी वह जाती है.उस करवट ने साफ़-सफाईकरनेवाली छवि दिखलाईआहा! उलझी लट...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
5
सामयिक नवगीत खाट खड़ी है*बड़े-बड़ों की खाट खड़ी हैमोल बढ़ गया है छोटों का.हल्ला-गुल्ला,शोर-शराबाहै बिन पेंदी के लोटों का.*नकली नोट छपे थे जितनेपल भर में बेकार हो गए.आम आदमी को डँसने सेपहले विषधर क्षार हो गए.ऐसी हवा चली है यारो!उतर गया है मुँह खोटों काबड़े-बड़ों की खा...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
5
नवगीत कोई बताए?*उगा सूरज कहाँ सेकोई बताए?*खबर हैसच बोलता है एक नेता।मिला है अफसरनहीं जो घूस लेता।आधुनिक महिलामिली दीपक जलाए।उगा सूरज कहाँ सेकोई बताए?*एक ठेकेदारपूरा काम करता।एक जज जोन्याय देने में न डरता।दिखा विज्ञापनन जो मिथ्या दिखाए।उगा सूरज कहाँ सेकोई बताए?...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
6
--गाँव-गली, नुक्कड़-चौराहे,सब के सब बदनाम हो गये।कामी-कपटी और मवाली,रावण सारे राम हो गये।।--रामराज का सपना टूटा,बिखर गया हर पत्ता-बूटा।जिसको मौका मिला उसी ने,खेत-बाग-वन जमकर लूटा।हत्या और बलात् कर्म अब,जन-जीवन में आम हो गये।।कामी-कपटी और मवाली,रावण सारे राम हो गये।...
6
--नीलगगन पर कुहरा छाया, दोपहरी में शाम हो गई।शीतलता के कारण सारी, दुनियादारी जाम हो गई।।--गैस सिलिण्डर से ग़ायब है, लकड़ी गायब बाज़ारों से,कैसे जलें अलाव यही सब, पूछ रहे हैं सरकारों से,जीवन को ढोनेवाली अब, काया भी नाकाम हो गई।शीतलता के...