ब्लॉगसेतु

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जीवन में अँधियारा, लेकिन सपनों में उजियाला है।आभासी दुनिया में होता, मन कितना मतवाला है।।--चहक-महक होती बसन्त सी, नहीं दिखाई देती है,आहट नहीं मगर फिर भी, पदचाप सुनाई देती है,वीरानी बगिया को जो, पल-पल अमराई देती है,शिथिल अंग में...
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मौसम कितना हुआ सुहाना।रंग-बिरंगे सुमन सुहाते।सरसों ने पहना पीताम्बर,गेहूँ के बिरुए लहराते।।--दिवस बढ़े हैं शीत घटा है,नभ से कुहरा-धुंध छटा है,पक्षी कलरव राग सुनाते।गेहूँ के बिरुए लहराते।।--काँधों पर काँवड़ें सजी हैं,बम भोले की धूम मची है,शि...
ऋता शेखर 'मधु'
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ओ मधुरमासआओ ढूँढने चलेंप्यारे बसंत कोपवन सुहानी मन भायीमिली नहीं फूलों की बगियास्वर कोयल के कर्ण बसेछुपी रही खटमिट्ठी अमियायादों के पट खोल सखेले उतार खुशियाँ अनंत कोओ कृष्ण-रासता-थइया करवाओनर्तक बसंत कोमन देहरी पर जा सजीभरी अँजुरी प्रीत रंगोलीमिलन विरह की तान लिएप्...
 पोस्ट लेवल : नवगीत गीत
अनीता सैनी
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 मुक्त पवन का बहता झोंका,   कुछ पल का बने सहारा है,  निर्मल नीर चाँद की छाया,ऐसा सुख स्वप्न हमारा है। समय सरित बन के बह जाता,  रहस्यमयी लहरों में कौन, शून्यकाल की सीमा  बैठा,नीरव पुलिन मर्मान्तक मौन।  गहन...
sanjiv verma salil
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नवगीत *गीत औरनवगीत नहीं हैंभारत पाकिस्तान।बने मसीहाखींचें सरहदमठाधीश हैरान।पकड़ न आतीगति-यति जैसेहों बच्चे शैतान।अनुप्रासों केमधुमासों काकरते अनुसंधान।साठ सालपहले की बातेंथोपें, कहें विधान।गीत औरनवगीत नहीं हैंदुश्मन सच पहचान।लगे दूर सेबेहद सुंदरपहले हर मुखड़ा।नि...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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विशेष लेखनवगीत और देशआचार्य संजीव 'सलिल'*विश्व की पुरातनतम संस्कृति, मानव सभ्यता के उत्कृष्टतम मानव मूल्यों, समृद्धतम जनमानस, श्रेष्ठतम साहित्य तथा उदात्ततम दर्शन के धनी देश भारत वर्तमान में संक्रमणकाल से गुजर रहा है।पुरातन श्रेष्ठता, विगत पराधीनता, स्वतंत्रता पश्च...
 पोस्ट लेवल : लेख नवगीत और देश
sanjiv verma salil
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नवगीतसुनो शहरियों! संजीव वर्मा 'सलिल'*सुनो शहरियों!पिघल ग्लेशियरसागर का जल उठा रहे हैंजल्दी भागो।माया नगरी नहीं टिकेगीविनाश लीला नहीं रुकेगीकोशिश पार्थ पराजित होगाश्वास गोपिका पुन: लुटेगीबुनो शहरियों !अब मत सपनेखुद से खुद ही ठगा रहे होमत अनुरागोसंबंधों के लाक्...
 पोस्ट लेवल : नवगीत सुनो शहरियों!
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रुद्रपुर (ऊधमसिंहनगर) में देशज सर्वोदय सांस्कृतिक समिति द्वारा आयोजित देशी मेला एवं होली महोत्सव में आयोजित कवि सम्मेलन में मेरा काव्य पाठ।मित्रों!आज प्रस्तुत हैं मेरी तीन पुरानी रचनाएँ--(1)फूलों की मुझको चाह नहीं,मैं काँटों को स्वीकार करूँ।चन्दन से मुझको मोह नहीं,...
अनीता सैनी
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बीज रोप दे बंजर में कुछ,यों कोई होश नहीं खोता,अंशुमाली से मोती मन केक्यों पीड़ा पथ में तू बोता।मधुर भाव बहता जीवन में,प्रीत प्रसून फिर नहीं झरता,विरह वेदना लिखे लेखनी,यों पाखी प्रेम नहीं मरता।नभ-नूर बिछुड़ तारीकाएँ,  व्याकुल होकर पुष्कर रोता, बीज रोप...
sanjiv verma salil
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लेख:भारत की लोक सम्पदा: फागुन की फागेंआचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'.भारत विविधवर्णी लोक संस्कृति से संपन्न- समृद्ध परम्पराओं का देश है। इन परम्पराओं में से एक लोकगीतों की है। ऋतु परिवर्तन पर उत्सवधर्मी भारतीय जन गायन-वादन और नर्तन की त्रिवेणी प्रवाहित कर आनंदित होते है...
 पोस्ट लेवल : फागें लेख लोकगीत