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sanjiv verma salil
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ॐ आदरणीय बंधु!सादर नमन। प्रकाशनार्थ एक आलेख संलग्न है. बैंक विवरण निम्न है- बैंक विवरण: देना बैंक, राइट टाउन जबलपुर, IFAC: BKDN 0811119, लेखा क्रमांक: 111910002247 sanjiv verma अग्रिम धन्यवाद सहित संजीव सलिल विशेष लेख-नवगीत और देश -संज...
 पोस्ट लेवल : नवगीत और देश
sanjiv verma salil
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गीत:मन से मन के तार जोड़ती.....संजीव 'सलिल' *मन से मन के तार जोड़ती कविता की पहुनाई का.जिसने अवसर पाया वंदन उसकी चिर तरुणाई का.....*जहाँ न पहुँचे रवि पहुँचे वह, तम को पिए उजास बने.अक्षर-अक्षर, शब्द-शब्द को जोड़, सरस मधुमास बने..बने ज्येष्ठ फागुन में देवर, अधर-...
 पोस्ट लेवल : गीत मन से मन के तार geet
sanjiv verma salil
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एक नवगीत  शहर *मेरा शहर न अब मेरा है, गली न मेरीरही गली है।**अपनेपन की माटी गायब,चमकदार टाइल्स सजी है।श्वान-काक-गौ तकें, न रोटीमृत गौरैया प्यास लजी है।सेव-जलेबी-दोने कहीं न,कुल्हड़-चुस्की-चाय नदारद।खुद को अफसर कहता नायब,छुटभैया तन करे अदावत।...
 पोस्ट लेवल : नवगीत शहर navgeet shahar
sanjiv verma salil
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अभिनव प्रयोग एक चोका गीतबरसात*वसुधा हेरेमेघदूत की राह।कौन पा सकेव्यथा-दर्द की थाह?*विरह अग्निझुलसाती बदननीर बहातेनिश-दिन नयनतरु भैया नेपात गिराए हाय!पवन पिता केटूटे सभी सपन।नंद चाँदनीबैरन देती दाहवसुधा हेरेमेघदूत की राह।।*टेर विधातासुनो न सूखे पानीआँख न रोएहोए...
 पोस्ट लेवल : चोका गीत choka geet
sanjiv verma salil
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नवगीत / दोहा गीत *जो अव्यक्त हो, व्यक्त है कण-कण में साकार काश!कभी हम पा सकें,उसके भी दीदार*कंकर-कंकर में वहीशंकर कहते लोगसंग हुआ है किस तरहमक्का में? संजोगजगत्पिता जो दयामयमहाकाल शशिनाथभूतनाथ कामारि वहभस्म लगाए माथभोगी-योगीसनातननाद वही ओंक...
 पोस्ट लेवल : नवगीत दोहा गीत
ऋता शेखर 'मधु'
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ग्रीष्म ऋतु ============ ग्रीष्म की दुपहरिया कोयल की कूक से टूट गयी काँच सी छत पर के पँखेसर्र सर्र नाच रहेहाथों में प्रेमचंदनैंनों से बाँच रहेनिर्मला की हिचकियाँ दिल में हैं खाँच सी कोलतार पर खड़े झुंड हैं मजूरों के द्वार पर नाच रहे बानर जमूरों के लू की बड़ी तपन खस...
 पोस्ट लेवल : नवगीत मौसम
Kailash Sharma
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                                     बीसवाँ अध्याय (२०.११-२०.१४)                      &nbs...
PRABHAT KUMAR
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जमाने की उलझनों में गीत नए गाए जाएंबसंत को बसंत समझ प्रीत नए लाए जाएंसेमलों का बाग हो या आम के बौर से नजदीकियाँहरे/भरे घास के पत्तों से भी धूल हटाए जाएंमोहब्बतों में आसमां ही हो ऊपर ये जरूरी नहींजमीन पर हों जो करीब उनपर प्रेम जताए जाएं-प्रभात
Saransh Sagar
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 अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुतेगिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते ।भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृतेजय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥ १ ॥सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते...
sanjiv verma salil
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गीत:कहे कहानी, आँख का पानी.*कहे कहानी, आँख का पानी.की सो की, मत कर नादानी...*बरखा आई, रिमझिम लाई.नदी नवोढ़ा सी इठलाई..ताल भरे दादुर टर्राये.शतदल कमल खिले मन भाये..वसुधा ओढ़े हरी चुनरिया.बीरबहूटी बनी गुजरिया..मेघ-दामिनी आँख मिचोली.खेलें देखे ऊषा भोली..संध्या-रजनी सखी...
 पोस्ट लेवल : geet गीत