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jaikrishnarai tushar
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चित्र -साभार गूगल एक गीत -स्वर्णमृग की लालसा स्वर्ण मृग की लालसा मत पालना हे राम !दोष मढ़ना अब नहीं यह जानकी के नाम |आज भी मारीच ,रावण घूमते वन -वन ,पंचवटियों में लगाये माथ पर चन्दन ,सभ्यता को नष्ट करना रहा...
jaikrishnarai tushar
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चित्र -साभार -गूगल एक गीत - कैक्टस का युग कैक्टस कायुग कहाँ अब बात शतदल की ?हो गयी कैसे विषैली हवा जंगल की |फेफड़ों मेंदर्द भरकर डूबता सूरज ,हो गया वातावरण का रंग कुछ असहज ,अब नहीं लगती सुरीली थाप मादल की |भैंस के&nb...
sanjiv verma salil
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नवगीत  छंद लुगाई है गरीब की *छंद लुगाई है गरीब कीगाँव भरे की है भौजाई जिसका जब मन चाहे छेड़े ताने मारे, आँख तरेरे लय; गति-यति की समझ न लेकिन कहे सात ले ले अब फेरे कैसे अपनी जान बचाए? जान पडी सांसत में भाईछंद लुगाई है गरीब कीगा...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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पुरोवाक'भीड़ का हिस्सा नहीं हूँ ' समय का किस्सा सही हूँ  आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'*                विश्ववाणी हिंदी के समसामयिक साहित्य की लोकप्रिय विधाओं में से एक नवगीत के उद्यान में एक नया पुष्प खिल रहा है, शशि पुर...
 पोस्ट लेवल : नवगीत शशि पुरवार
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नेक-नीयत हमेशा सलामत रहेडॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'मीत बेशक बनाओ बहुत से मगर,मित्रता में शराफत की आदत रहे।स्वार्थ आये नहीं रास्ते में कहीं,नेक-नीयत हमेशा सलामत रहे।।--भारती का चमन आप सिंचित करो,भाव मौलिक भरो, शब्द चुनकर धरो,काल को जीत लो अपने ऐमाल से,गीत में सुर क...
sanjiv verma salil
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नवगीतपत्थरों के भी कलेजेहो रहे पानी.आदमी ने जब सेमन पर रख लिए पत्थरदेवता को दे दिया हैपत्थरों का घररिक्त मन मंदिर हुआयाद आ रही नानी.नाक हो जब बहुत ऊँचीबैठती मक्खीकब गयी कट?, क्या पता?उड़ गया कब पक्षीनम्रता का?, शेष दुर्गतिअहं ने ठानी.चुराते हैं, झुकाते हैं आँखखुद से...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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भोजपुरी सरस्वती वंदनागीता चौबेजन्म - ११ अक्टूबर १९६७।आत्मजा - श्रीमती तारा देवी - श्री (डॉ0)इन्द्रदेव उपाध्याय।जीवनसाथी - श्री सुरेंद्र कुमार, अधीक्षण अभियंता।शिक्षा - स्नातक प्रतिष्ठा, इतिहास में स्नातकोत्तर।प्रकाशन - 'क्यारी भावनाओं की' शीघ्र प्रकाश्य।ब्लॉग : मन...
sanjiv verma salil
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नवगीतकहता मैं स्वाधीन*संविधानइस हाथ सेदे, उससे ले छीन।*जन ही जनप्रतिनिधि चुने,देता है अधिकार।लाद रहा जन पर मगर,पद का दावेदार।।शूल बिछाकरराह में, कहेफूल लो बीन।*समता का वादा करे,लगा विषमता बाग।चीन्ह-चीन्ह कर बाँटता,रेवड़ी, दूषित राग।।दो दूनीबतला रहा हाय!पाँच या तीन।...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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नवगीत:कौन बतायेनाम खेल का?.तोल-तोल के बोल रहे हैंइक-दूजे को तोल रहे हैंकौन बताये पर्दे पीछेकिसके कितने मोल रहे हैं?साध रहे संतुलनमेल का.तुम इतने लो, हम इतने लेंजनता भौचक कब कितने ले?जैसी की तैसी है हालतआश्वासन चाहे जितने लेमेल नीर केसाथ तेल का?.केर-बेर का साथ निराल...
 पोस्ट लेवल : नवगीत
sanjiv verma salil
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नवगीत:गीत पुराने छायावादीमरे नहींअब भी जीवित हैं.तब अमूर्तअब मूर्त हुई हैंसंकल्पना अल्पनाओं कीकोमल-रेशम सी रचना कीछुअन अनसजी वनिताओं सीगेहूँ, आटा, रोटी है परिवर्तन यात्रालेकिन सच भीसंभावनाऐं शेष जीवन कीचाहे थोड़ी पर जीवित हैं.बिम्ब-प्रतीकवसन बदले हैंअलंकार भी बदल गए...
 पोस्ट लेवल : नवगीत