ब्लॉगसेतु

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--पीला-पीला और गुलाबी,रूप सभी को भाया है।लू के गर्म थपेड़े खाकर,फिर कनेर मुस्काया है।।--आया चलकर खुला खजाना,फिर से आज कुबेर का।निर्धन के आँगन में पनपा,बूटा एक कनेर का।कोमल और सजीले फूलों ने,मन को भरमाया है।लू के गर्म थपेड़े खाकर,फिर कनेर मुस्काया है।।--कितनी शीतलता...
 पोस्ट लेवल : कनेर मुस्काया है गीत
अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : नवगीत
YASHVARDHAN SRIVASTAV
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दिल को सुकून देतीवो मधुर संगीत हैआंखो में चमक भर देतावो तारा संगीत है।मन को खुश कर देतीवो धूप संगीत हैकमजोरी को हिम्मत देतावो साहरा संगीत है।जिंदगी को उम्मीद देतीवो भरपूर संगीत हैहौसलों में जुनून भर देतावो उजियारा संगीत है।चेहरे पर मुस्कान ला देतीवो सुकून सा संगीत...
अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : नवगीत
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 चलता जाता है मजदूरपथरीली पटरी को चुनता सुलभ सड़क को छोड़ रहा हैकाम नहीं अब करना उसको रुख वो घर को मोड़ रहा तन मन से वह थका हुआ है लौट रहा होकर मजबूरचलता जाता है मजदूर।।कदम द्वार की चौखट तक भी अब वह नहीं रख पाता है चलते-चलते थका म...
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गीतजिस रोग का जग में पार नहीं, जो रोग सभी पर भारी है। मुँह ढक कर के सब निकले हैं,अब कैसी यह लाचारी है। बंद हो गए देवालय सब, मधुशालाएँ खुलती है ।बेबस जनता आज सभी तो, राजनीति में तुलती है।देव आ रहे हैं जग मैं अब ,बन करके संसारी हैं।मुँह ढक कर के स...
jaikrishnarai tushar
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चित्र -साभार गूगल एक गीत -मेहँदी रचे गुलाबी हाथों ने फिर किया प्रणाम पीले कंगन नीलम पहने सोने जैसी शाम |मेहँदी रचे गुलाबी हाथों ने फिर किया प्रणाम |डोल रहे पीपल के पत्ते बिना हवाओं के ,संकोचों में चाँद मेघ के घ...
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--ख़ाक सड़कों की अभी तो छान लो।धूप में घर को बनाना ठान लो।।--भावनाओं पर कड़ा पहरा लगा,दुःख से आघात है गहरा लगा,मीत इनको ज़िन्दग़ी का मान लो।धूप में घर को बनाना ठान लो।।--काल का तो चक्र अब ऐसा चला,आज कोरोना ने दुनिया को छला,वेदना के रूप को पहचान लो।धूप में घर को बना...
अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : नवगीत
अभिलाषा चौहान
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 पोस्ट लेवल : नवगीत