ब्लॉगसेतु

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--साँसें धोखा दे जाती हैं,साँसों पर विश्वास न करना।सपने होते हैं हरजाई,सपनों से कुछ आस न करना।।--जो कर्कश सुर में चिल्लाते,उनको काग पुकारा जाता।जो खग मधुर गान को गाते,उनका स्वर कलरव कहलाता।हृदयहीन धनवान व्यक्ति से,कभी कोई अरदास न करना।सपने होते हैं हरजाई,सपनों स...
jaikrishnarai tushar
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चित्र-साभार गूगलएक लोकभाषा गीत-प्रेम क रंग निराला हउवैसिर्फ़ एक दिन प्रेम दिवस हौबाकी मुँह पर ताला हउवैई बाजारू प्रेम दिवस हौप्रेम क रंग निराला हउवैसबसे बड़का प्रेम देश कीसीमा पर कुर्बानी हउवैप्रेम क सबसे बड़ा समुंदरवृन्दावन कै पानी हउवैप्रेम भक्ति कै चरम बिंदु हौतुलस...
sanjiv verma salil
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नवगीत दिल्ली बोली*बड़बोलों ने खाई पटकनीदिल्ली बोलीपैदल ने वजीर को माराऔंधे मुँह वह जो हुंकाराजो गरजे वे मेघ न बरसेजनहितकारी की पौबाराअब जुबान पर लगा चटकनीबड़बोलों ने खाई पटकनीदिल्ली बोलीकथनी करनी का जो अंतरलोग समझते; चला न मंतरभानुमती का कुनबा आयारोगी भोगी सब...
 पोस्ट लेवल : नवगीत दिल्ली
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--उड़ता था उन्मुक्त कभी जो नीले-नीले अम्बर में।कैद हो गया आज सिकन्दर सोने के सुन्दर घर में।।--अपनी बोली भूल गया है,मिट्ठू-मिट्ठू कहता है,पिंजड़े में घुट-घुटकर जीता,दारुण पीड़ा सहता है,कृत्रिम झूला रास न आता, तोते को बन्दीघर मेंकैद हो गया आज सिकन्दर सोने के सुन...
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--बौराई गेहूँ की काया,फिर से अपने खेत में।सरसों पर पीताम्बर छाया,फिर से अपने खेत में।।--नये पात पेड़ों पर आये,टेसू ने भी फूल खिलाये,भँवरा गुन-गुन करता आया,फिर से अपने खेत में।।--धानी-धानी सजी धरा है,माटी का कण-कण निखरा है,मोहक रूप बसन्ती छाया,फिर से अपने खेत में।।-...
jaikrishnarai tushar
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चित्र -साभार गूगल दो गीत -जयकृष्ण राय तुषार चित्र -साभार गूगल एक -मन ही मन ख़ामोश कबूतर मन ही मन ख़ामोश कबूतर कुछ बतियाता है |बन्द लिफ़ाफे लेकर अब डाकिया न आता है |क्या इस युग में सब इतने निष्ठुर हो जाएंगे , ,अन्तरंग बातें भी यं...
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--जीवन में अँधियारा, लेकिन सपनों में उजियाला है।आभासी दुनिया में होता, मन कितना मतवाला है।।--चहक-महक होती बसन्त सी, नहीं दिखाई देती है,आहट नहीं मगर फिर भी, पदचाप सुनाई देती है,वीरानी बगिया को जो, पल-पल अमराई देती है,शिथिल अंग में यौवन की, आभा अँगड़...
 पोस्ट लेवल : गीत जालजगत की शाला है
Akhilesh Karn
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फिल्म : गंगा के पारगायक : तृप्ती शक्या (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); बंसिया बजाबै छै सैंयाबंसिया बजाबै छै सैंयादिल धरकाबै ने दैयाबंसिया बजाबै छै सैंयादिल धरकाबै ने दैयाहमरा ऊ बोलाबै छैनदिया किनार ने रे कीहमरा ऊ बोलाबै छैनदिया किनार ने र...
sanjiv verma salil
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नवगीत *चिरैया! आ, चहचहा * द्वार सूना टेरता है। राह तोता हेरता है। बाज कपटी ताक नभ से- डाल फंदा घेरता है। सँभलकर चल लगा पाए, ना जमाना कहकहा। चिरैया! आ, चहचहा * चिरैया माँ की निशानी चिरैया माँ की कहानी कह रही बदले समय मेंचिरैया कर निगहबानी मनो रमा है मन हम...
 पोस्ट लेवल : नवगीत चिरैया
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--आँख जब खोली जगत में, तभी था मधुमास पाया।चेतना मन में जगाने, जन्मदिन फिर आज आया।।--हूँ पुराना दीप, लेकिन जल रहा हूँ,मैं समय के साथ, फिर भी चल रहा हूँ,पर्वतों को काट करके, रास्ता मैंने बनाया।चेतना मन में जगाने, जन्मदिन फिर आज आया।।--था कभी शोला, अभी शबनम हुआ,स...