ब्लॉगसेतु

अनीता सैनी
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बरसी न बदरिया न मुलाक़ात बहारों से की,  न तितलियों ने ताज पहनाया न  फुहार ख़ुशियों ने की,   मिली न सौग़ात सितारों की, ढलती शाम में वह कोयल-सी गुनगुनायी,    मुद्दतों बाद आज मेरी दहलीज़ मुस्कुरायी, &nb...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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वो शाम अब तक याद है दर-ओ-दीवार पर गुनगुनी सिंदूरी धूप खिल रही थी नीम के उस पेड़ पर चमकीली हरी पत्तियों पर एक चिड़िया इत्मीनान से अपने प्यारे चिरौटा से मिल रही थी ख़्यालों में अब अजब हलचल-सी  हो रही थी  धड़कन एक नाम...
ऋता शेखर 'मधु'
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गुनगुनी सी धूप आईशरद बैठा खाट लेकरमूँगफलियों को चटकतामिर्च नींबू चाट लेकरफुनगियों से हैं उतरतीहौले झूमती रश्मियाँफुदक रहीं डाल डाल परचपल चंचला गिलहरियाँचौपालों पर सजी बजींतरकारियाँ, हाट लेकरगुनगुनाती हैं गोरियाँगेहुँएँ औ' पाट लेकरछिल गईं फलियाँ मटर कीचढ़ी चुल्हे पर...