ब्लॉगसेतु

डा. सुशील कुमार जोशी
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पहाड़ी झबरीले कुछ काले कुछ सफेद कुछ काले सफेद कुछ मोटे कुछ भारी कुछ लम्बे कुछ छोटे कुत्तों के द्वारा घेर कर ले जायी जा रही कतारबद्ध अनुशाशित पालतू भेड़ों का रेवड़ गरड़िये की हाँक के साथ पथरीले ऊबड़ खाबड़ ऊँचे नीचे उतरते चढ़ते छिटकते फिर वापस लौटते मिमियाते मेंमनों को...
डा. सुशील कुमार जोशी
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स्वतंत्र एक शब्द है स्वतंत्रता एक ख्वाब है गुलाम और गुलामी आम है और खास है नकारते रहिये हो गये तो सीढ़ी आपके पास है नहीं हो पाये अगर का मतलब साँप कहीं ना कहीं है और बहुत नजदीक है और आसपास है साँप और सीढ़ी के बीच एक रिश्ता है इसीलिये खेला भी जाता है हर गुला...
Kavita Rawat
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सुनील  सजल
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लघु व्यंग्य -अंकुशगर्ल्स हॉस्टल की लड़कियों के एक समूह ने अपनी अधीक्षिका के खिलाफ विद्रोह कर दिया ।वे शिकायत हेतु उच्च अधिकारी के पास पहुंची ।उनकी अधीक्षिका उन  पर अंकुश पर अंकुश लगाती हैं ।पीना-खाना, मौज-मस्ती,, घूमने -फिरने और लड़कों के संग दोस्ती पर अंगुलियां...
Kavita Rawat
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जो अपना स्वामी स्वयं नहीं,उसे  स्वतंत्र नहीं कहा जा सकता है ।जिसे अत्यधिक स्वतंत्रता मिल जाय,वह सबकुछ चौपट करने लगता है ।।फरिश्तों की गुलामी करने से,शैतानों पर हुकूमत करना भला ।पिंजरे में बंद शेर की तरह जीने से,आवारा पशु की तरह रहना  भला&nb...
sanjiv verma salil
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लघुकथा - अपनों की गुलामी *इस स्वतंत्र देश से तो गुलाम भारत ही ठीक था। हम-तुम एक साथ तो रह पाते थे। तब मेरे लिये तुम लाठी-गोली भी हँसकर खा लेते थे। तुम्हारे साथ खेत, खलिहान, जंगल, पहाड़, महल, झोपड़ी हर जगह मैं रह पाता था। बच्चे, बूढ़े, महिला सभी का सान्निन्ध...
sanjiv verma salil
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लघुकथा - गुलामी का अनुबंध *संसद में सरकार पर असहनशीलता और तानाशाही का आरोप लगाकर लगातार कार्यवाही ठप करनेवालों की सहनशीलता का नमूना यह कि उनके एक नेता पडोसी देश के प्रधान मंत्री से अपने देश की सरकार बदलने का अनुरोध करते हैं, वे जनता द्वारा ५ साल के लिये चुनी गयी सर...
sanjiv verma salil
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लघुकथा गुलामी का अनुबंध *आप कैसे जनप्रतिनिधि हैं जो जनमत जानते हुए भी संसद में व्यक्त नहीं करते? क्या करूँ मजबूर हूँ?कैसी मजबूरी?दल की नीति जनमत की विरोधी है. मैं दल का उम्मीदवार था, चुने जाने के बाद मुझे संसद में वही कहना पड़ेगा जो दल चाहता है. अरे! तब तो दल का प्र...
ऋता शेखर 'मधु'
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गुलामी-''मैम, जल जमाव के कारण हमारे इलाके की स्थिति बहुत खराब है| गाड़ी निकल नहीं सकती और पैदल चलकर आऊँ तो कमर जितने पानी में चलना होगा|''एक मिनट की चुप्पी के पश्चात प्राचार्या ने कहा," आप डूबकर आएँ, तैर कर आएँ इससे हमे कोई मतलब नहीं|आना है तो आना है| यदि आप झंडोत्...
डा. सुशील कुमार जोशी
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सूरज डूब गयाबहुत अच्छी तरह आज का दिन भी पिछले उन्हत्तर सालों की तरह बीतना था बीत गया स्वतंत्रों की स्वतंत्रता हर जगह नजर आई बेचारी गुलामी गुलामों की दूर दूर तक कहीं भी नजर नहीं आई गुलाम और गुलामी की बात आजाद और आजादी के साथ करने की हिम्मत आज के दिन तो कम से कम नहीं...