ब्लॉगसेतु

Ravindra Pandey
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लाल, हरा, नीला, पीला, निखर रहे हैं रंग।मस्तानों की टोलियाँ,  फ़ाग में हुए मलंग।।भर पिचकारी घूम रहे,  बच्चे  चारों ओर।अनायास  बौछार  से,  राहगीर  सब दंग।।स्वप्नपरी के रूप में,  झूमें  हैं  चाचा आज।चाची गुझिया खिला रही...
ANITA LAGURI (ANU)
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हर शाख़ पर उल्लू बैठा हैहर शख़्स  यहां कीचड़ से मैला हैक्या रंग क्या गुलाल खेलूंहर चमन में शातिर शागिर्द बैठा हैतुम बात करते हो मकानों कीयहां हर घर बेज़ुबानों से दहला हैपंख लगाकर क्या उड़े चिड़ियाहर सैय्यद  पंख कतरने   बैठा हैजिस्म में थरथराहट...
मधुलिका पटेल
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वो खाकी शर्ट पर अब भी निशाँ होंगे पिछली होली केवो अबीर का गुब्बार रंग कर चला गया था तुम्हे रंगो का इंद्रधनुष बिखेर गया था ख़ुशी गुलाल का रंग दहकते गालों में खो गया था तुम्हे रंगों की पहचान जो गहराइयों से थी अब के बर...
Kailash Sharma
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दुख दर्द दहन हो होली में,हो रंग ख़ुशी के होली में।तन मन आंनदित हो जाये,जब रंग उड़ेंगे होली में।सब भेद भाव मिट जायेंगे,जब गले मिलेंगे होली में।जब पिया गुलाल लगायेंगे,तन मन सिहरेगा होली में।मन से मन का जब रंग मिले,तन रंग न चाहे होली में।...©कैलाश शर्मा 
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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आयी   राम    कीअवध   में    होली ,छायी  कान्हा  कीबृज    में   रंगोली।पक   गयी  सरसोंबौराये    हैं   आम,मनचलों  को  अबसूझी   है  ठिठोली।छायी   कान्हा  कीबृ...
गायत्री शर्मा
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लो आ गयी शरारतों वाली होली पिचकारियों के छिटो संग दोस्तों संग मौज-मस्ती और हँसी-ठिठौलीलो आ गयी ...किसी ने गालों पर मल दिया गुलाल मित्रता के चटक रंग से, मस्ती की भंग से तन-मन हुआ, हरा-पीला, गुलाबी-लाल निकली आज तंग गलियों में वही पुरानी टोली&...
 पोस्ट लेवल : poem gayatri गुलाल रंग होली holi
Bhavna  Pathak
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लटके है सिर तलवार तो क्या खाक है होलीहो एग्जाम का बुखार तो क्या खाक है होलीफिजिक्स केमेस्टी के साथ साथ मैथ भीकोड़े रही हो मार तो क्या खाक है होलीखुशियों को लगा है गहन दुश्मन बना एग्जामछाती पर है सवार तो क्या खाक है होलीबाहर है रंग गुलाल फाग और घर पे हमबैठे हैं मन क...
Kailash Sharma
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एक बार फिर होली आयी,खुशियों की सौगात है लाई.नीले पीले लाल गुलाबी,चारों ओर रंग बिखरे हैं.रंग में छुपे हुए चेहरों पे नए नए भाव निखरे हैं.भेदभाव हैं सब छुप जाते, जब गुलाल प्रेम से लगता.मिट जाते हैं सब शिकवे,जब है मित्र गले से लगता.गले लगाओ आज प्रेम से,सब के साथ मिठाई...
Sandhya Sharma
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बिरज में आज होली रे भाई सखियों संग नाचे रे राधिकाखेलत फाग अबीर हिलमिल ग्वालन संग  कुवंर कन्हाईबिरज में आज होली रे भाई …बाजत ताल मृदंग झांझ डफमंजीरा संग गुंजत शहनाईउड़त गुलाल लाल भए बदराभई केसर रंग की छिड़काईबिरज में आज होली रे भाई …अबीर गुलाल हाथ पिचका...
मुकेश कुमार
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होली का पर्व है अलबेलाहै मस्ती भरा!!जब भी आती है ये मनभावन होली आता है याद गाँव का कीचड़, साथ में गोबर, मिट्टी राख़ भी ... जब भी आती है ये स्वादिष्ट होली आता है मुंह में पानी क्योंकि बनते ये घर घर में मालपूआ, दहीबड़ा, गुजिया और बहुत से पकवान जब भी आती है ये रोमांचक हो...