ब्लॉगसेतु

Atul Kannaujvi
0
हिंदी गज़ल|| Hindi Gazalअगर मुमकिन नहीं है फिर ये दावा कौन करता हैकोई भी फैसला उसके अलावा कौन करता हैउन्हें तो छींक पर भी दाद मिलती है जमाने कीहमारे शेर पर वाह—वाह, वा—वा कौन करता हैकिया है इश्क मैंने इसलिए मालूम है सबकुछमुहब्बत कौन करता है दिखावा कौन करता है।।&nbsp...
Atul Kannaujvi
0
 -अतुल कन्नौजवीइश्क़ ही काफ़ी है इक जान वार देने कोगुजरता वक्त है सबकुछ गुजार देने कोफरिश्ते सीढ़ियां लेकर छतों पे चढते रहेफलक से चांद सितारे उतार देने को,अजीब खेल है दुनिया बनाने वाले काजिंदगी देता है इक रोज मार देने कोसुकून दे दिया रातों की नींद भी दे दीबचा ह...
Atul Kannaujvi
0
- अतुल कन्नौजवीऐ फलक थोडी जगह मुझको भी दे तारों के बीचअब मुझे अच्छा नहीं लगता जमींदारों के बीचसच कई दिन तक रखा रहता है बाजारों के बीचझूठ बिक जाता है पलभर में खरीदारों के बीचमुल्क में हरेक सूबे में, यहां तक हर जगहबेवकूफों की हुकूमत है समझदारों के बीचइक बचाती जिंदगी...
Rajeev Upadhyay
0
चाँद है ज़ेरे क़दम सूरज खिलौना हो गया हाँ, मगर इस दौर में क़िरदार बौना हो गया। शहर के दंगों में जब भी मुफलिसों के घर जले कोठियों की लॉन का मंज़र सलौना हो गया। ढो रहा है आदमी काँधे पे ख़ुद अपनी सलीब ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा जब बोझ ढोना हो गया। यूँ तो आदम के बदन पर भी था...
 पोस्ट लेवल : अदम गोंडवी कविता गज़ल
Atul Kannaujvi
0
दूरदर्शन पर कार्यक्रम का संचालन करते शायर अतुल कन्नौजवी व कार्यक्रम में शामिल अन्य शोअरा।दिल का इक ख़्वाब दिल में दबा रह गयामैं उसे उम्रभर चाहता रह गया,उसके जैसा कोई भी दिखा ही नहींजिसकी तस्वीर मैं देखता रह गया,शाम होते ही वो याद आने लगाफिर उसे रातभर सोचता रह...
Atul Kannaujvi
0
इश्क में मुझको क्या क्या बोला जाता हैबेबी बाबू सोना बोला जाता हैलाख सितारों में भी चमक उसी की हैतभी चांद को तन्हा बोला जाता हैबगैर तेरे अब तो जीना मुश्किल हैप्यार में अक्सर ऐसा बोला जाता हैइश्क जिंदगी में चाहे कितने भी करलेकिन सबको पहला बोला जाता हैसहराओं में प्यास...
Rajeev Upadhyay
0
सहमा सहमा डरा सा रहता हैजाने क्यूँ जी भरा सा रहता है।काई सी जम गई है आँखों परसारा मंज़र हरा सा रहता है।एक पल देख लूँ तो उठता हूँजल गया घर ज़रा सा रहता है।सर में जुम्बिश ख़याल की भी नहींज़ानुओं पर धरा सा रहता है। ------------------------- गुलज़ार 
 पोस्ट लेवल : कविता गज़ल गुलज़ार
Roshan Jaswal
0
आसान  नहीं   मेरा   सफर  देख  रही  हूँकुछ छाँव मिले अब वो शजर देख रही हूँहाँ बादे  सबा  को  में जिधर देख रही हूंखुशबू लिए महकी सी सहर देख रही हूँमुश्किल है बहुत हिज्र में दिल को मिले आरामउठती  है जो ...
 पोस्ट लेवल : गज़ल कवितायें
Ravindra Prabhat
0
।। ग़ज़ल।।- रवीन्द्र प्रभातगमजदा है माहौल बहुत आहट बनाए रक्खो।बच्चों के लिए अपनी मुस्कुराहट बनाए रक्खो।भूख से लड़कर हम जी लेंगे कुछ दिन जरूर - मगर ए दोस्त तिश्नगी की तरावट बनाए रक्खो।स्याह अंधेरों में उम्मीदों की सुबह ढूढों मगर- इन अंधेरों के खिलाफ बगावत...
 पोस्ट लेवल : गजल गज़ल गज़लें ग़ज़ल
Rajeev Upadhyay
0
आप की याद आती रही रात भर चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर रात भर दर्द की शम्अ जलती रही ग़म की लौ थरथराती रही रात भर बाँसुरी की सुरीली सुहानी सदा याद बन बन के आती रही रात भर याद के चाँद दिल में उतरते रहे चाँदनी जगमगाती रही रात भर कोई दीवाना गलियों में फिरता रहा कोई आ...