ब्लॉगसेतु

Rajeev Upadhyay
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काजू भुने प्लेट में विस्की गिलास मेंउतरा है रामराज विधायक निवास में।पक्के समाजवादी हैं तस्कर हों या डकैतइतना असर है खादी के उजले लिबास में।आजादी का वो जश्न मनाएँ तो किस तरहजो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में।पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा देंसंसद बदल गई है यहाँ की नखा...
 पोस्ट लेवल : अदम गोंडवी कविता गज़ल
Rajeev Upadhyay
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मुझको भी तरकीब सिखा कोई यार जुलाहे अक्सर तुझको देखा है कि ताना बुनते जब कोई तागा टूट गया या ख़तम हुआ फिर से बाँध के और सिरा कोई जोड़ के उसमें आगे बुनने लगते हो तेरे इस ताने में लेकिन इक भी गाँठ गिरह बुनकर कीदेख नहीं सकता है कोई&nb...
Rajeev Upadhyay
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बे-नाम सा ये दर्द ठहर क्यूँ नहीं जाता जो बीत गया है वो गुज़र क्यूँ नहीं जाता॥सब कुछ तो है क्या ढूँढती रहती हैं निगाहें क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता॥वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता॥मैं अपनी ह...
Rajeev Upadhyay
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घर से निकले तो हो सोचा भी किधर जाओगेहर तरफ़ तेज़ हवाएँ हैं बिखर जाओगे।इतना आसाँ नहीं लफ़्ज़ों पे भरोसा करनाघर की दहलीज़ पुकारेगी जिधर जाओगे।शाम होते ही सिमट जाएँगे सारे रस्तेबहते दरिया से जहाँ होगे ठहर जाओगे।हर नए शहर में कुछ रातें कड़ी होती हैंछत से दीवारें जुदा ह...
Rajeev Upadhyay
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ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं, और क्या जुर्म है पता ही नहीं।इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं, मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं| ज़िन्दगी! मौत तेरी मंज़िल है दूसरा कोई रास्ता ही नहीं।सच घटे या बड़े तो सच न रहे, झूठ की कोई इन्तहा ही नहीं।ज़िन्द...
Rajeev Upadhyay
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धूप में निकलो घटाओं मेंनहाकर देखोज़िन्दगी क्या है, किताबों कोहटाकर देखो।सिर्फ आँखों से ही दुनियानहीं देखी जाती दिल की धड़कन को भी बीनाईबनाकर देखो।पत्थरों में भी ज़बां होती हैदिल होते हैंअपने घर के दरो-दीवार सजाकर देखो।वो सितारा है चमकने दोयूं ही आँखों मेंक्य...
Rajeev Upadhyay
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ऐसा लगता है ज़िन्दगी तुम होअजनबी जैसे अजनबी तुम हो।अब कोई आरज़ू नहीं बाकीजुस्तजू मेरी आख़िरी तुम हो।मैं ज़मीं पर घना अँधेरा हूँआसमानों की चांदनी तुम हो।दोस्तों से वफ़ा की उम्मीदेंकिस ज़माने के आदमी तुम हो।---------------------बशीर बद्रसाभार: कविता कोश
 पोस्ट लेवल : गज़ल बशीर बद्र
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आज आजाद हुआ भारत ----आज की ग़ज़ल -गज़लोपनिषद ---=============================================******काशी से नरेंद्र भाई मोदी , प्रधान मंत्री भारत सरकार का आह्वान व उद्घोष -----का मूल मन्त्र ---१. कार्य में पारदर्शिता व परिश्रम का समन्वय डा श्याम  २.कार्य...
VMWTeam Bharat
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वह पायल नहीं पहनती पांव में बस एक काले धागे से कहर बरसाती हैउसकी यही अदा तो 'निल्को'मुझे उसका दीवाना बनाती हैबहुत मजे से इठलाती है गूढ़ व्यंग की मीन बहुत बनाती हैमाथे पर जब बिंदी लगाती हैतो पूरे विश्व को सुंदर बनाती है'मधुलेश' का ख्याल आए तोवह भी कविता बन...
Kailash Sharma
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यादों में जब भी हैं आती बेटियां,आँखों को नम हैं कर जाती बेटियां।आती हैं स्वप्न में बन के ज़िंदगी,दिन होते ही हैं गुम जाती बेटियां।कहते हैं क्यूँ अमानत हैं और की,दिल से सुदूर हैं कब जाती बेटियां।सोचा न था कि होंगे इतने फासले,हो जाएंगी कब अनजानी बेटियां।होंगी कुछ तो म...