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sanjiv verma salil
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मनहरण घनाक्षरी (३१ वर्ण)*मनहरण घनाक्षरी में १६,१५ वर्ण पर यति तथा चरणांत में गुरू होता है।*शालिनी हो, माननी हो, नहीं अभिमाननी हो,श्वास-आस स्वामिनी हो मीत मेरी कवितागति यति लय रस भाव बिंब रूप जस,प्राण मन आत्मा हो प्रीत मेरी कवितासाधना हो वंदंना हो प्रार्थना हो अर्चन...
 पोस्ट लेवल : मनहरण घनाक्षरी
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 राधाराधा आज मुसकाईसखियों के साथ आईकान्हा जी की मुरली कोआज तो छिपाएंगेआज हम छिप करकृष्ण से लिपटकर दही नवनीत से ही उनको भिगाएंगे होली का त्योहार आज रख दूर सब काज  मिलकर हम सब कृष्ण को सताएंगे मोहन है चित चोर बांधकर प...
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विषय - *परीक्षा*
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रंगों का त्योहाररंगों का त्योहार आयाखुशी चारों ओर लायाहाथ में गुलाल लेकेआप भी तो आइए गुजिया के थाल सजे ढोलक मंजीरे बजे राधे के तो साथ में आप भी तो गाइए बरसे गुलाल लालकरे होली में धमालसखी अपने साथ तो राधा को नचाइएरंग हरा लाल पीलाकृष्ण न...
Basudeo Agarwal
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हरि मुख से जो झरी, गीता जैसी वाणी खरी,गीता का जो रस पीता, होता बेड़ा पार है।ज्ञान-योग कर्म-योग, भक्ति-योग से संयोग,गीता के अध्याय सारे, अमिय की धार है।कर्म का संदेश देवे, शोक सारा हर लेवे,एक एक श्लोक या का, भाव का आगार है।शास्त्र की निचोड़ गीता, सहज सरल हिता,पंक्ति प...
Basudeo Agarwal
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माटी की महक लिए, रीत की चहक लिए,प्रीत की दहक लिए, भाव को उभारिए।छातियाँ धड़क उठें, हड्डियाँ कड़क उठें,बाजुवें फड़क उठें, वीर-रस राचिए।दिलों में निवास करें, तम का उजास करें,देश का विकास करें, मन में ये धारिए।भारती की आन बान, का हो हरदम भान,विश्व में दे पहचान, गीत ऐसे ग...
sanjiv verma salil
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घनाक्षरी*नागनाथ साँपनाथ, जोड़ते मिले हों हाथ, मतदान का दिवस, फिर निकट है मानिए।                                  चुप रहे आज तक, अब न रहेंगे अब चुप, ई वी एम से जवाब, दें न बैर ठानिए...
 पोस्ट लेवल : घनाक्षरी
Basudeo Agarwal
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                               (1)जनसंख्या भीड़ दिन्ही, भीड़ धक्का-मुक्की किन्ही,धक्का-मुक्की से ही बनी, व्यवस्था कतार की।राशन की हो दुकान, बैंकों का हो भुगतान,चाहे लेना हो मकान, महिमा कत...
Basudeo Agarwal
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8+8+8+9 अंत नगणभड़क के ऑफिस से, आज फिर सैंया आए,लगता पड़ी है डाँट, बॉस की कड़क कड़क।कड़क गरजते हैं, घर में वे बिजली से,वहाँ का दिखाए गुस्सा, यहाँ वे फड़क फड़क।फड़क के बोले शब्द, दिल भेदे तीर जैसे,छलनी कलेजा हुआ, करता धड़क धड़क,धड़क बढे है ज्यों ज्यों, आ रहा रुदन भारी,सुलगे जि...
Basudeo Agarwal
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8 8 8 8  --32 मात्रा (बिना मात्रा के)मन यह नटखट, छण छण छटपट,मनहर नटवर, कर रख सर पर।कल न पड़त पल, तन-मन हलचल,लगत सकल जग, अब बस जर-जर।चरणन रस चख, दरश-तड़प रख,तकत डगर हर, नयनन जल भर।मन अब तरसत, अवयव मचलत,नटवर रख पत, जनम सफल कर।।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया1-03-18