ब्लॉगसेतु

Basudeo Agarwal
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माटी की महक लिए, रीत की चहक लिए,प्रीत की दहक लिए, भाव को उभारिए।छातियाँ धड़क उठें, हड्डियाँ कड़क उठें,बाजुवें फड़क उठें, वीर-रस राचिए।दिलों में निवास करें, तम का उजास करें,देश का विकास करें, मन में ये धारिए।भारती की आन बान, का हो हरदम भान,विश्व में दे पहचान, गीत ऐसे ग...
sanjiv verma salil
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घनाक्षरी*नागनाथ साँपनाथ, जोड़ते मिले हों हाथ, मतदान का दिवस, फिर निकट है मानिए।                                  चुप रहे आज तक, अब न रहेंगे अब चुप, ई वी एम से जवाब, दें न बैर ठानिए...
 पोस्ट लेवल : घनाक्षरी
Basudeo Agarwal
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                               (1)जनसंख्या भीड़ दिन्ही, भीड़ धक्का-मुक्की किन्ही,धक्का-मुक्की से ही बनी, व्यवस्था कतार की।राशन की हो दुकान, बैंकों का हो भुगतान,चाहे लेना हो मकान, महिमा कत...
Basudeo Agarwal
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8+8+8+9 अंत नगणभड़क के ऑफिस से, आज फिर सैंया आए,लगता पड़ी है डाँट, बॉस की कड़क कड़क।कड़क गरजते हैं, घर में वे बिजली से,वहाँ का दिखाए गुस्सा, यहाँ वे फड़क फड़क।फड़क के बोले शब्द, दिल भेदे तीर जैसे,छलनी कलेजा हुआ, करता धड़क धड़क,धड़क बढे है ज्यों ज्यों, आ रहा रुदन भारी,सुलगे जि...
Basudeo Agarwal
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8 8 8 8  --32 मात्रा (बिना मात्रा के)मन यह नटखट, छण छण छटपट,मनहर नटवर, कर रख सर पर।कल न पड़त पल, तन-मन हलचल,लगत सकल जग, अब बस जर-जर।चरणन रस चख, दरश-तड़प रख,तकत डगर हर, नयनन जल भर।मन अब तरसत, अवयव मचलत,नटवर रख पत, जनम सफल कर।।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया1-03-18
Basudeo Agarwal
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(8, 8, 8, 8 पर यति अनिवार्य।प्रत्येक यति के अंत में हमेशा लघु गुरु (1 2) अथवा 3 लघु (1 1 1) आवश्यक।आंतरिक तुकान्तता के दो रूप प्रचलित हैं। प्रथम हर चरण की तीनों आंतरिक यति समतुकांत। दूसरा समस्त 16 की 16 यति समतुकांत। आंतरिक यतियाँ भी चरणान्त यति (1 2) या (1 1 1) के...
Basudeo Agarwal
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8,8,8,8 अंत गुरु लघु हर यति समतुकांत।जगत ये पारावार, फंस गया मझधार,दिखे नहीं आर-पार, थाम प्रभु पतवार।नहीं मैं समझदार, जानूँ नहीं व्यवहार,कैसे करूँ मनुहार, करले तु अंगीकार।चारों ओर भ्रष्टाचार, बढ़ गया दुराचार,मच गया हाहाकार, धारो अब अवतार।छाया घोर अंधकार, प्रभु कर उप...
Basudeo Agarwal
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घनाक्षरी पाठक या श्रोता के मन पर पूर्व के मनोभावों को हटाकर अपना प्रभाव स्थापित कर अपने अनुकूल बना लेनेवाला छंद है। घनाक्षरी में शब्द प्रवाह इस तरह होता है मानो मेघ की गर्जन हो रही हो। साथ ही इसमें शब्दों की बुनावट सघन होती है जैसे एक को ठेलकर दूसरा शब्द आने की जल्...
Basudeo Agarwal
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शिल्प~8888,अंत में लघु-लघुजब की क्रिकेट शुरु, बल्ले का था नामी गुरु,जीभ से बैटिंग करे, अब धुँवाधार यह।न्योता दिया इमरान, गुरु गया पाकिस्तान,फिर तो खिलाया गुल, वहाँ लगातार यह।संग बैठ सेनाध्यक्ष, हुआ होगा चौड़ा वक्ष,सब के भिगोये अक्ष, मन क्या विचार यहबेगाने की ताजपोशी...
sanjiv verma salil
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घनाक्षरी सलिला :छत्तीसगढ़ी में अभिनव प्रयोग.संजीव 'सलिल'*अँचरा मा भरे धान, टूरा गाँव का किसान, धरती मा फूँक प्राण, पसीना बहावथे.बोबरा-फार बनाव, बासी-पसिया सुहाव, महुआ-अचार खाव, पंडवानी भावथे..बारी-बिजुरी बनाय, उरदा के पीठी भाय, थोरको न ओतियाय, टूरी इठलावथे.भारत के...